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मध्यरात्रि वार्ता के बाद बड़ा दावा, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने का मिला भरोसा

नई दिल्ली: हाल ही में केंद्र सरकार और आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रतिनिधियों के बीच देर रात हुई बातचीत के बाद एक बड़ा दावा सामने आया है। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे संगठन CJP ने कहा है कि केंद्र की ओर से भरोसा दिलाया गया है कि बिहार और असम में आंदोलन से जुड़े लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस ली जाएंगी और भविष्य में भी उनके खिलाफ कोई नई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।

संगठन के अनुसार, बैठक के दौरान बिहार और असम सरकारों द्वारा तैयार किए गए मसौदा आदेश भी साझा किए गए, जिनमें प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने तथा उनके खिलाफ दर्ज मामलों को समाप्त करने की बात कही गई है। CJP का दावा है कि केंद्र ने यह भी आश्वासन दिया है कि भाजपा और एनडीए शासित अन्य राज्यों में भी इसी तरह के कदम उठाए जाएंगे।

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इस घटनाक्रम को आंदोलनकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। लंबे समय से प्रदर्शनकारी यह मांग कर रहे थे कि शांतिपूर्ण विरोध में शामिल छात्रों और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज सभी मामले वापस लिए जाएं और उन्हें किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई से राहत मिले।

हालांकि, संगठन ने स्पष्ट किया है कि जब तक राज्यों की ओर से आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हो जाती और सभी वादों को जमीन पर लागू नहीं किया जाता, तब तक वह पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखेगा। उनका कहना है कि यदि आश्वासन के अनुरूप कार्रवाई नहीं हुई तो आगे की रणनीति पर भी विचार किया जाएगा।

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दूसरी ओर, बिहार और असम सरकारों की ओर से भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और भविष्य में नई एफआईआर दर्ज न करने की दिशा में कदम उठाने की जानकारी सामने आई है। इससे आंदोलन से जुड़े लोगों में राहत की उम्मीद बढ़ी है।

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फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार अपने आश्वासनों को कितनी जल्दी आधिकारिक आदेशों के जरिए लागू करती है। यदि ऐसा होता है तो यह हाल के समय में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत के जरिए निकले सबसे अहम समाधानों में से एक माना जाएगा।

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