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घास के बोझ से सपनों तक: पहाड़ की महिलाओं के संघर्ष की कहानी कहेगी फिल्म ‘घस्यारी’, जल्द सिनेमाघरों में

उत्तराखंड के पहाड़ों की रीढ़ माने जाने वाली महिलाओं का संघर्ष किसी से छिपा नहीं है.उनकी सुबह बाकि दुनिया की सुबह से अलग होती है. जहां शहरों में सुबह-सुबह ग्रीन टी और कॉफी की चुस्कियां ली जाती हैं वहीं पहाड़ की महिलाएं इस वक्त अपनी गौशाला पहुंच जाती हैं और वहां के काम निपटाकर घर आकर चूल्हा चौका करती हैं और ये क्रम रात तक चलता ही रहता है. दिन में जंगलों से घास लाना,लकड़ी लाना और इसी के साथ सीजन के हिसाब से खेती बाड़ी का काम. इस संघर्ष को शब्दों में लिखना बहुत मुश्किल है और अगर इसे फिल्म के जरिए दिखाना तो और भी मुश्किल लेकिन उत्तराखंड के एक प्रतिभाशाली निर्देशक सुनील बडोनी ने इसी विषय को चुनकर फिल्म बनाई है जिसका नाम ही है 'घस्यारी ' 

यूँ तो हर घास काटकर लाने वाली महिला को 'घस्यारी' कहा जाता है लेकिन पहाड़ों की घस्यारी का जीवन सिर्फ घास काटकर घर लाने तक ही नहीं है. उसे पहाड़ों के सफर को तयकर दूर जंगलों में जाना होता है.जंगली जानवरों का डर, पेड़ों से गिरने का ख़तरा और इन सब मुश्किलों के बाद उस बोझ को घर तक लाना। इसकी तह में जाएंगे तो कहानी लम्बी होती चली जाएगी सीधे फिल्म पर आते हैं। 

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माँ शक्ति पिक्चर्स के बैनर तले बनी फिल्म 'घस्यारी ' का रविवार को देहरादून संस्कृति विभाग के प्रेक्षागृह में पोस्टर एवं ट्रेलर लॉन्च किया गया.कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के नोडल अधिकारी के. एस चौहान रहे साथ ही पदमश्री माधुरी बर्थवाल,बीना बिंजोला, रेखा धस्माना उनियाल और मीना राणा की गरिमामई मौजूदगी रही. फिल्म जो आपने अब तक ऊपर पढ़ा उन सभी विषयों को छूती है. निर्देशक सुनील बडोनी ने बताया कि वो इस फिल्म को आज से 30 साल पहले बनाना चाहते थे लेकिन नौकरी में ऐसे उलझे कि ये प्रॉजेक्ट अटका ही रह गया. गत वर्ष उन्होंने 'कारा एक प्रथा ' फिल्म बनाई जिसने सिनेमाहॉल में दर्शकों का दिल तो जीता ही साथ ही देश दुनिया में कई अवार्ड्स भी अपने नाम किए।फिल्म की मूल कहानी एवं डायलॉग प्रेम रंगीला के थे जिनमें आज के अनुसार बदलाव किया गया है।

लेखक/ निर्देशक सुनील बडोनी का पहाड़ से काफी गहरा नाता रहा है वो खुद एक मंझे हुए कलाकार तो हैं ही साथ ही समाज के उस हिस्से को कहानी का रूप देने के महारथी भी हैं जिसे कोई छूना नहीं चाहता.फिल्म में उत्तराखंड फिल्म जगत के बेहतरीन कलाकारों का सामंजस्य है. मुख्य भूमिका में शिवानी भंडारी और शुभ चंद्रा हैं. वहीं रमेश रावत, राजेश जोशी, मंजू बहुगुणा, दिनेश बौड़ाई, श्रिस्टी रावत, मंजू बहुगुणा, संयोगिता ध्यानी, सुषमा व्यास, गीता गुसाईं नेगी, अशोक नेगी, पूनम लखेड़ा, अंशिका बिष्ट, इंदु रावत, बिनीता नेगी, रमेश नौडियाल, वीरेंद्र असवाल, भानु जोशी, अंजना गुसाईं, भारती आनंद, अनीता सेंदवाल, शीनू नेगी, सौरभ पंवार और ऋतिक राणा जैसे कई कलाकार हैं। 

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फिल्म की पटकथा एवं निर्देशन सुनील बडोनी का है,फिल्म में गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी, संतोष खेतवाल, अनुराधा निराला कोटियाल, दिवंगत शशि जोशी की आवाज से सजे गीत हैं इन गीतों को संतोष खेतवाल ने लिखा है.फिल्मांकन सारांश बडोनी का है एवं संपादन सारांश और शुभम का है.फिल्म के एसोसिएट निर्देशक दीपक रावत एवं मुख्य सहायक निर्देशक सचिन रावत हैं। 

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फिल्म निर्मात्री परिणीता बडोनी ने बताया कि फिल्म को इसी माह के अंतिम सप्ताह में दिल्ली और देहरादून के सिनेमाघरों में प्रदर्शित किया जाएगा।ट्रेलर एवं पोस्टर लॉन्च के अवसर पर कार्यक्रम में मौजूद दर्शकों ने फिल्म की कहानी और ट्रेलर की जमकर सराहना की। 

 

नेशन वन माँ शक्ति पिक्चर्स को फिल्म की सफलता की अग्रिम शुभकामनाएं प्रेषित करता है और मीडिया सहयोगी के तौर पर अपने सभी दर्शकों एवं पाठकों से निवेदन करता है कि फिल्म देखने जरूर सिनेमाहॉल तक पहुंचें और 'घस्यारी ' को जन-जन तक पहुंचाने में अपना सहयोग दें।

 

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