प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सेशेल्स पहुंचे, राष्ट्रीय दिवस समारोह में होंगे मुख्य अतिथि, भारत-सेशेल्स संबंधों को मिलेगी नई मजबूती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सेशेल्स पहुंचे, राष्ट्रीय दिवस समारोह में होंगे मुख्य अतिथि, भारत-सेशेल्स संबंधों को मिलेगी नई मजबूती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार से तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर सेशेल्स पहुंच गए हैं। सेशेल्स गणराज्य के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री 27 से 29 जून तक इस द्वीपीय देश में रहेंगे। इस दौरान वह सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस की स्वर्ण जयंती समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह यात्रा भारत और सेशेल्स के बीच स्थापित हुए राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर हो रही है, जिसे दोनों देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा केवल औपचारिक राजकीय दौरा नहीं बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा नीति को नई दिशा देने वाला कदम भी मानी जा रही है। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
यात्रा से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा?
सेशेल्स रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बयान जारी कर कहा कि सेशेल्स भारत का अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री पड़ोसी और भरोसेमंद साझेदार है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, सांस्कृतिक निकटता और हिंद महासागर क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता की साझा प्रतिबद्धता पर आधारित हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का 'विजन महासागर (MAHASAGAR)' और वैश्विक दक्षिण (Global South) को मजबूत बनाने का संकल्प सेशेल्स जैसे मित्र देशों के सहयोग से और मजबूत होगा।
50 साल पुराने राजनयिक संबंधों का ऐतिहासिक अवसर
भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना को इस वर्ष 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। दोनों देशों के बीच दशकों से राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, समुद्री सुरक्षा और सांस्कृतिक सहयोग लगातार मजबूत होता रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा आने वाले वर्षों के लिए दोनों देशों के संबंधों की नई रूपरेखा तैयार करेगी।
राष्ट्रीय सभा को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनेंगे मोदी
इस यात्रा की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सेशेल्स की राष्ट्रीय सभा (National Assembly) को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे। इसे दोनों देशों के लोकतांत्रिक संबंधों और संसदीय सहयोग की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। यह संबोधन भारत और सेशेल्स के बीच बढ़ते विश्वास और रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक भी होगा।
हिंद महासागर में क्यों अहम है सेशेल्स?
भले ही सेशेल्स भौगोलिक रूप से छोटा द्वीप राष्ट्र हो, लेकिन हिंद महासागर में उसकी रणनीतिक स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है। यह द्वीप पश्चिमी हिंद महासागर में स्थित है, जहां से दुनिया के कई महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग गुजरते हैं। इसी कारण भारत सहित कई वैश्विक शक्तियां इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही हैं।भारत के लिए सेशेल्स समुद्री सुरक्षा, समुद्री निगरानी, आतंकवाद विरोधी सहयोग और समुद्री डकैती (Anti-Piracy) से निपटने की रणनीति का अहम हिस्सा है।
'महासागर विजन' के तहत बढ़ रहा सहयोग
भारत ने हाल के वर्षों में महासागर (MAHASAGAR) विजन के तहत हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग बढ़ाया है। इस पहल के अंतर्गत भारत और सेशेल्स के बीच कई क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत हो रही है, जिनमें शामिल हैं—
- समुद्री डोमेन अवेयरनेस (Maritime Domain Awareness)
- ब्लू इकोनॉमी
- समुद्री सुरक्षा
- समुद्री डकैती रोकथाम
- जलवायु परिवर्तन से मुकाबला
- आपदा प्रबंधन
- तटीय सुरक्षा
इन क्षेत्रों में सहयोग से हिंद महासागर क्षेत्र को अधिक सुरक्षित और स्थिर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
ब्लू इकोनॉमी में नई संभावनाएं
सेशेल्स का विशाल एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन (EEZ) और उसकी समुद्र आधारित अर्थव्यवस्था भारत के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करती है। मछली पालन, समुद्री जैव विविधता, पर्यटन, समुद्री अनुसंधान और समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है।भारत ब्लू इकोनॉमी के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग, निवेश और क्षमता निर्माण के माध्यम से सेशेल्स की सहायता भी कर रहा है।
भारतीय नौसेना भी होगी समारोह का हिस्सा
सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भारतीय नौसेना के दो युद्धपोत और भारतीय सशस्त्र बलों की एक टुकड़ी भी भाग लेगी। यह केवल सैन्य सहभागिता नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच मजबूत रक्षा सहयोग और समुद्री साझेदारी का प्रतीक माना जा रहा है। भारत लंबे समय से सेशेल्स की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में सहयोग करता रहा है।
भारतीय समुदाय से भी मिलेंगे प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा के दौरान सेशेल्स में बसे भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगे।सेशेल्स में भारतीय मूल के लोग कई पीढ़ियों से रह रहे हैं और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक एवं आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।व्यापार, शिक्षा, पर्यटन और सामाजिक गतिविधियों में भारतीय समुदाय का योगदान उल्लेखनीय माना जाता है।
राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी से होगी महत्वपूर्ण बैठक
प्रधानमंत्री मोदी और सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी होगी। बैठक में रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल सहयोग, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक दक्षिण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौतों पर भी सहमति बन सकती है।
वैश्विक दक्षिण की आवाज को मिलेगा बल
भारत पिछले कुछ वर्षों से वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूत करने का प्रयास कर रहा है। सेशेल्स जैसे छोटे लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देशों के साथ सहयोग बढ़ाकर भारत हिंद महासागर क्षेत्र में नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था, आर्थिक विकास और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करना चाहता है।
भारत की समुद्री रणनीति में सेशेल्स की बढ़ती भूमिका
विशेषज्ञों के अनुसार हिंद महासागर आने वाले दशकों में वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और सामरिक प्रतिस्पर्धा का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है। ऐसे में सेशेल्स जैसे मित्र देशों के साथ मजबूत साझेदारी भारत की समुद्री रणनीति को नई मजबूती प्रदान करेगी।रक्षा सहयोग, समुद्री निगरानी और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा भारत की विदेश नीति और हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी रणनीतिक प्राथमिकताओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर यह दौरा दोनों देशों के बीच विश्वास, सुरक्षा, ब्लू इकोनॉमी, व्यापार और सांस्कृतिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का अवसर प्रदान करेगा। साथ ही यह यात्रा हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी एक अहम कदम साबित हो सकती है।
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