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सीडीएस जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल समाप्त, बोले- ‘बहुत संतोषजनक और शानदार रहा सफर’, ऑपरेशन सिंदूर से थिएटराइजेशन तक निभाई अहम भूमिका

सीडीएस जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल समाप्त, बोले- ‘बहुत संतोषजनक और शानदार रहा सफर’, ऑपरेशन सिंदूर से थिएटराइजेशन तक निभाई अहम भूमिका

नई दिल्ली। भारत के निवर्तमान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने शनिवार को अपने लगभग तीन वर्ष आठ महीने लंबे कार्यकाल को “बहुत संतोषजनक और शानदार” बताया। देश के सर्वोच्च सैन्य पद पर रहते हुए उन्होंने तीनों सेनाओं—थल सेना, वायु सेना और नौसेना—के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। उनके कार्यकाल को भारतीय सैन्य ढांचे में एक बड़े बदलाव और संयुक्त सैन्य रणनीति को मजबूत करने वाले दौर के रूप में देखा जा रहा है।

रविवार को लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि देश के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पदभार संभालेंगे। इस अवसर पर जनरल अनिल चौहान को त्रि-सेवा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने अपने सैन्य जीवन की उपलब्धियों और अनुभवों को साझा किया।

कार्यकाल को बताया शानदार और संतोषजनक

गार्ड ऑफ ऑनर मिलने के बाद जनरल चौहान ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि उनका कार्यकाल बेहद संतोषजनक रहा। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने तथा तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए गए। उन्होंने कहा कि सीडीएस के रूप में उनकी प्राथमिकता संयुक्त सैन्य क्षमता को मजबूत करना और बदलते वैश्विक तथा क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप भारतीय सेनाओं को तैयार करना था। उनके अनुसार, आने वाले वर्षों में भारत की सैन्य रणनीति में संयुक्तता (Jointness) और एकीकृत कमांड सिस्टम की भूमिका और बढ़ेगी।

ऑपरेशन सिंदूर में निभाई अहम भूमिका

जनरल अनिल चौहान ने अपने कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों की योजना और क्रियान्वयन में भूमिका निभाई। इनमें सबसे प्रमुख ऑपरेशन सिंदूर माना जा रहा है। सीडीएस के रूप में उन्होंने तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ मिलकर इस अभियान की रणनीति तैयार की और उसके सफल क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस अभियान ने भारतीय सैन्य नेतृत्व की संयुक्त कार्यप्रणाली और समन्वित क्षमता को प्रदर्शित किया।

थिएटराइजेशन मॉडल को आगे बढ़ाने का प्रयास

जनरल चौहान के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक भारतीय सेनाओं के थिएटराइजेशन मॉडल को आगे बढ़ाना माना जा रहा है। इस मॉडल के तहत तीनों सेनाओं की अलग-अलग कमानों को एकीकृत सैन्य कमानों में बदलने की योजना पर काम किया गया। इसका उद्देश्य संसाधनों का बेहतर उपयोग, तेज निर्णय प्रक्रिया और युद्ध के दौरान अधिक प्रभावी संचालन सुनिश्चित करना है। विशेषज्ञों के अनुसार, थिएटर कमांड व्यवस्था भारतीय रक्षा ढांचे में एक ऐतिहासिक सुधार साबित हो सकती है। जनरल चौहान ने इस दिशा में कई नीतिगत पहल शुरू कीं और विभिन्न सैन्य इकाइयों के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया।

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर दी अंतिम श्रद्धांजलि

सेवानिवृत्ति से पहले जनरल चौहान ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि वर्दी में यह उनका अंतिम पुष्पचक्र अर्पण था और यह उन वीर सैनिकों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर था जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर किए। उन्होंने कहा कि सैन्य जीवन से नागरिक जीवन में प्रवेश करना उनके लिए एक भावुक क्षण है। इस दौरान उन्होंने अपने सहयोगियों, मित्रों और परिवारजनों का आभार व्यक्त किया।

जनरल बिपिन रावत के बाद संभाली थी जिम्मेदारी

जनरल अनिल चौहान ने सितंबर 2022 में देश के दूसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के रूप में कार्यभार संभाला था। उनकी नियुक्ति उस समय हुई जब देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत की तमिलनाडु में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु के बाद यह पद लंबे समय तक खाली रहा था। लगभग नौ महीने बाद सरकार ने जनरल चौहान को यह जिम्मेदारी सौंपी। उनकी नियुक्ति को सैन्य नेतृत्व में निरंतरता बनाए रखने और संयुक्त सैन्य सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण माना गया था।

सेवा विस्तार भी मिला

जनरल चौहान का कार्यकाल सितंबर 2025 में समाप्त होना था, लेकिन सरकार ने उन्हें सेवा विस्तार दिया था। इसके बाद उन्होंने अतिरिक्त अवधि तक सीडीएस के रूप में अपनी सेवाएं जारी रखीं। वह मूल रूप से मई 2021 में लेफ्टिनेंट जनरल के पद से सेवानिवृत्त हो चुके थे, लेकिन सीडीएस नियुक्त होने के बाद उन्हें चार सितारा जनरल का दर्जा प्राप्त हुआ।

बालाकोट एयर स्ट्राइक के समय थे डीजीएमओ

फरवरी 2019 में जब भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की थी, उस समय जनरल अनिल चौहान सैन्य संचालन महानिदेशक (DGMO) के पद पर कार्यरत थे। रक्षा सूत्रों के अनुसार, उस समय उन्होंने अभियान की रणनीतिक योजना और समन्वय में महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे। यही अनुभव बाद में उन्हें देश के सर्वोच्च सैन्य पद तक पहुंचाने में सहायक साबित हुआ।

गौरवशाली सैन्य करियर

18 मई 1961 को जन्मे जनरल अनिल चौहान को वर्ष 1981 में भारतीय सेना की 11 गोरखा राइफल्स में कमीशन मिला था। अपने चार दशक से अधिक लंबे सैन्य करियर में उन्होंने जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर भारत में आतंकवाद विरोधी अभियानों का व्यापक अनुभव प्राप्त किया। उन्होंने बारामूला सेक्टर में इन्फैंट्री डिवीजन की कमान संभाली, पूर्वोत्तर में एक कोर का नेतृत्व किया और बाद में पूर्वी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ भी बने।

कई प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान से हुए सम्मानित

देश के प्रति उत्कृष्ट सेवाओं के लिए जनरल अनिल चौहान को अनेक प्रतिष्ठित सैन्य अलंकरणों से सम्मानित किया गया है। उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक (PVSM), उत्तम युद्ध सेवा पदक (UYSM), अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM), सेना पदक (SM) और विशिष्ट सेवा पदक (VSM) से सम्मानित किया जा चुका है। इन पुरस्कारों के माध्यम से भारतीय सेना में उनके योगदान, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति समर्पण को मान्यता मिली है।

नए सीडीएस के सामने होंगी बड़ी चुनौतियां

अब लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि देश के नए सीडीएस के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे। उनके सामने थिएटर कमांड की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने, आधुनिक युद्ध तकनीकों को अपनाने और तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त संचालन को और मजबूत बनाने जैसी महत्वपूर्ण चुनौतियां होंगी।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जनरल अनिल चौहान ने जिस संयुक्त सैन्य ढांचे की नींव मजबूत की है, उसे आगे बढ़ाना नए सीडीएस की सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। भारत के बदलते सुरक्षा वातावरण में यह भूमिका आने वाले वर्षों में और अधिक महत्वपूर्ण होने जा रही है।

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