मणिपुर हिंसा के बाद राहत शिविरों में 731 विस्थापितों की मौत, 43 हजार से अधिक लोग अब भी बेघर
मणिपुर हिंसा के तीन साल बाद भी संकट बरकरार, राहत शिविरों में 731 विस्थापितों की मौत
पूर्वोत्तर राज्य Manipur में मई 2023 में भड़की जातीय हिंसा के बाद उत्पन्न मानवीय संकट की गंभीर तस्वीर सामने आई है। राज्य के गृह विभाग द्वारा सूचना का अधिकार (RTI) के तहत साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, राहत शिविरों और अस्थायी आवासों में रह रहे कम से कम 731 विस्थापित लोगों की अब तक मौत हो चुकी है।
यह जानकारी मणिपुर सूचना आयोग के निर्देश पर आरटीआई कार्यकर्ता Hareshwar Goswami को उपलब्ध कराई गई।
नौ जिलों में दर्ज हुईं 731 मौतें
राज्य के विभिन्न जिला प्रशासन से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार राहत शिविरों और पूर्वनिर्मित आवासों में सबसे अधिक मौतें Churachandpur जिले में दर्ज की गईं, जहां 248 विस्थापितों की जान गई।
जिलावार आंकड़े इस प्रकार हैं:
- चूराचांदपुर – 248 मौतें
- Bishnupur – 151 मौतें
- Kangpokpi – 128 मौतें
- Imphal West – 94 मौतें
- Kakching – 60 मौतें
- Imphal East – 25 मौतें
- Jiribam – 13 मौतें
- Thoubal – 11 मौतें
- Tengnoupal – 1 मौत
43 हजार से अधिक लोग अब भी शिविरों में
हिंसा शुरू होने के लगभग तीन वर्ष बाद भी बड़ी संख्या में लोग अपने घरों को वापस नहीं लौट सके हैं।
30 अप्रैल 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार राज्यभर में 43,000 से अधिक लोग अब भी राहत शिविरों और प्री-फैब्रिकेटेड घरों में रहने को मजबूर हैं।
सबसे अधिक विस्थापित आबादी कांगपोकपी जिले में दर्ज की गई है:
- कांगपोकपी – 15,694 लोग
- बिष्णुपुर – 10,092 लोग
- चूराचांदपुर – 6,365 लोग
ये आंकड़े बताते हैं कि मणिपुर में विस्थापन का संकट अभी भी गहराई से बना हुआ है।
अप्राकृतिक मौतों के भी सामने आए मामले
आरटीआई रिपोर्ट के अनुसार राहत शिविरों और पुनर्वास बस्तियों में कम से कम 25 अप्राकृतिक मौतें भी दर्ज की गई हैं।
चूराचांदपुर जिले में:
- 4 लोगों की डूबने से मौत
- 1 व्यक्ति की करंट लगने से मौत
- 1 यौन उत्पीड़न से जुड़ा मामला
प्रशासन के अनुसार यौन उत्पीड़न मामले में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। घटनाओं के बाद शिविरों में जागरूकता और काउंसलिंग कार्यक्रम भी चलाए गए।
वहीं इंफाल वेस्ट में:
- 2 आत्महत्या के मामले
- 1 ड्रग ओवरडोज से मौत
- 1 गोली लगने से मौत
दर्ज की गई है।
स्वास्थ्य संकट भी बना बड़ी चुनौती
विस्थापित परिवार केवल आवास और सुरक्षा की समस्या से ही नहीं जूझ रहे, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का भी सामना कर रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार:
- इंफाल ईस्ट के शिविरों में 217 लोग गंभीर या असाध्य बीमारियों से पीड़ित हैं।
- इंफाल वेस्ट में 41 मरीज गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।
- बिष्णुपुर में 26 लोगों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हैं।
प्रशासन दे रहा है सहायता
जिला प्रशासनों ने बताया कि शिविरों में रह रहे लोगों को विभिन्न प्रकार की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, जिनमें शामिल हैं:
- चिकित्सा उपचार
- मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग
- आवश्यक दवाएं
- व्हीलचेयर और एयर मैट्रेस
- गंभीर मरीजों के लिए सर्जरी और उपचार हेतु वित्तीय सहायता
मानवीय संकट की गंभीर तस्वीर
मणिपुर हिंसा के बाद सामने आए ये आंकड़े राज्य में जारी विस्थापन संकट की गंभीरता को दर्शाते हैं। तीन वर्षों बाद भी हजारों परिवार राहत शिविरों में जीवन बिताने को मजबूर हैं, जबकि सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। यह रिपोर्ट प्रभावित समुदायों के पुनर्वास, स्वास्थ्य सेवाओं और दीर्घकालिक शांति बहाली की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित करती है।
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