मुंडका सेप्टिक टैंक हादसा: जहरीली गैस से 3 मजदूरों की मौत, फैक्टरी मालिक समेत 3 गिरफ्तार
मुंडका सेप्टिक टैंक हादसा: जहरीली गैस से तीन मजदूरों की मौत, फैक्टरी मालिक समेत तीन गिरफ्तार
दिल्ली के मुंडका औद्योगिक क्षेत्र में शुक्रवार दोपहर एक दर्दनाक औद्योगिक हादसे ने तीन परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। एक फैक्टरी के सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से तीन मजदूरों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान अरुण (38), संदीप (32) और चांद (42) के रूप में हुई है।
हादसे के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए फैक्टरी मालिक सूरज मारवाह, फैक्टरी कर्मचारी जयंत और ठेकेदार नीरज को गिरफ्तार कर लिया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि मजदूरों को बिना आवश्यक सुरक्षा उपकरणों के सेप्टिक टैंक में उतारा गया था।
कैसे हुआ मुंडका सेप्टिक टैंक हादसा?
जानकारी के अनुसार, मुंडका औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक फैक्टरी में बने सेप्टिक टैंक की सफाई का काम निजी ठेकेदार को दिया गया था। शुरुआत में मशीनों से सफाई की जा रही थी, लेकिन टैंक के तल में जमा ठोस कचरा मशीन से नहीं निकल पाया।
इसके बाद अधिक पैसे देने का लालच देकर मजदूर चांद को टैंक के अंदर उतारा गया। जैसे ही वह नीचे पहुंचा, जहरीली गैस के कारण बेहोश होकर गिर पड़ा।उसे बचाने के लिए साथी मजदूर अरुण अंदर उतरा, लेकिन वह भी गैस की चपेट में आ गया। इसके बाद तीसरे मजदूर संदीप ने दोनों को बचाने की कोशिश की, लेकिन वह भी बेहोश होकर टैंक में गिर गया।जब तक दमकल और पुलिस मौके पर पहुंची, तब तक काफी देर हो चुकी थी।
दमकल कर्मियों ने निकाला बाहर, अस्पताल में मृत घोषित
घटना की सूचना दोपहर करीब 12 बजे पुलिस और दमकल विभाग को मिली।दमकल कर्मियों ने सुरक्षा उपकरण पहनकर टैंक में प्रवेश किया और तीनों मजदूरों को बाहर निकाला। उन्हें तत्काल संजय गांधी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया।पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत के सटीक कारणों की पुष्टि होगी, लेकिन शुरुआती जांच में जहरीली गैस से दम घुटना ही मौत की वजह माना जा रहा है।
फैक्टरी मालिक, कर्मचारी और ठेकेदार गिरफ्तार
पुलिस जांच में सामने आया कि सेप्टिक टैंक की सफाई का ठेका नांगलोई निवासी नीरज को दिया गया था।फैक्टरी कर्मचारी जयंत के माध्यम से यह काम तय हुआ था। नीरज ने ही तीनों मजदूरों को बुलाया था।मामले में पुलिस ने फैक्टरी मालिक, कर्मचारी और ठेकेदार के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर तीनों को गिरफ्तार कर लिया है।
चांद के पीछे रह गए दो मासूम बच्चे
इस हादसे ने सबसे बड़ा झटका मजदूर चांद के परिवार को दिया।चांद अपने पीछे पत्नी, ढाई साल की बेटी और महज आठ महीने के बेटे को छोड़ गए हैं।परिजनों के अनुसार वह सुबह मजदूरी करते थे और शाम को मोमोज और फिंगर फूड की रेहड़ी लगाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। किराए के छोटे से मकान में रहने वाला यह परिवार अब पूरी तरह बेसहारा हो गया है।
12 हजार की नौकरी, लेकिन जान चली गई
मृतक संदीप बेहद गरीब परिवार से थे।परिवार के अनुसार उनकी मासिक आय केवल 12 से 13 हजार रुपये थी। जिस दिन काम नहीं मिलता था, उस दिन घर चलाना मुश्किल हो जाता था।उनके पीछे वृद्ध माता-पिता, पत्नी, एक बेटी और छोटा भाई रह गए हैं।
साथियों को बचाने उतरे अरुण भी नहीं लौटे
मृतक अरुण ने इंसानियत की मिसाल पेश की।जब उन्होंने अपने साथी को टैंक में तड़पते देखा तो बिना अपनी जान की परवाह किए उसे बचाने नीचे उतर गए।लेकिन जहरीली गैस ने उन्हें भी अपनी चपेट में ले लिया और तीनों मजदूरों की मौत हो गई।
मैनुअल स्कैवेंजिंग पर प्रतिबंध के बावजूद क्यों हो रहे हैं ऐसे हादसे?
देश में 2013 से हाथ से मैला उठाने और बिना सुरक्षा उपायों के सीवर या सेप्टिक टैंक में मजदूरों को उतारने पर प्रतिबंध है।सुप्रीम कोर्ट ने भी कई बार स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ऐसी सफाई पूरी तरह मशीनों से होनी चाहिए।इसके बावजूद देशभर में लगातार ऐसे हादसे सामने आते रहते हैं।केंद्र सरकार के संसद में दिए गए आंकड़ों के अनुसार 2017 से मार्च 2026 तक देश में 622 मजदूर सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान जान गंवा चुके हैं। इनमें दिल्ली में ही 62 मौतें दर्ज की गई हैं।
हाल के वर्षों में हुए बड़े सेप्टिक टैंक हादसे
- 22 अगस्त 2025: लिबासपुर, दिल्ली में दो मजदूरों की मौत।
- 17 मई 2024: बवाना इंडस्ट्रियल एरिया में दो सगे भाइयों की मौत।
- 24 मार्च 2023: पटपड़गंज इंडस्ट्रियल एरिया में एक कर्मचारी की मौत।
- 30 मार्च 2022: रोहिणी में चार लोगों की सीवर में दम घुटने से मौत।
- 27 मार्च 2021: गाजीपुर में बैंक्वेट हॉल के सेप्टिक टैंक हादसे में मौत।
- 11 अक्टूबर 2020: बदरपुर में सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान दो लोगों की मौत।
सेप्टिक टैंक सफाई के लिए क्या हैं सुरक्षा नियम?
विशेषज्ञों और सुरक्षा मानकों के अनुसार किसी भी व्यक्ति को सेप्टिक टैंक में उतारने से पहले निम्न व्यवस्थाएं अनिवार्य हैं—
- गैस और ऑक्सीजन स्तर की जांच।
- पर्याप्त वेंटिलेशन।
- फुल बॉडी पीपीई किट।
- हेलमेट, दस्ताने और गमबूट।
- गैस डिटेक्टर।
- सेफ्टी हार्नेस।
- आवश्यकता होने पर ऑक्सीजन या श्वसन उपकरण।
- प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम की मौजूदगी।
- प्राथमिक उपचार की व्यवस्था।
यदि इन नियमों का पालन नहीं किया जाता, तो यह गंभीर लापरवाही मानी जाती है।
मशीनें हैं, लेकिन मजदूर आज भी उतर रहे हैं टैंकों में
हालांकि आज अधिकांश स्थानों पर सक्शन मशीनों और आधुनिक उपकरणों से सेप्टिक टैंक साफ करने का दावा किया जाता है, लेकिन कई निजी संस्थानों और फैक्ट्रियों में केवल तरल गंदगी मशीन से निकाली जाती है।टैंक के तल में जमा ठोस गाद हटाने के लिए आज भी मजदूरों को बिना पर्याप्त सुरक्षा के अंदर उतार दिया जाता है। यही लापरवाही बार-बार जानलेवा साबित हो रही है।
मुंडका सेप्टिक टैंक हादसा केवल एक फैक्टरी दुर्घटना नहीं, बल्कि उन सुरक्षा मानकों पर बड़ा सवाल है जिनका पालन कागजों तक सीमित रह जाता है। जब कानून, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और आधुनिक मशीनें उपलब्ध हैं, तब भी मजदूरों को जहरीली गैस से भरे टैंकों में उतारना गंभीर लापरवाही और मानवीय संवेदनहीनता को दर्शाता है। यदि सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन नहीं किया गया, तो ऐसे हादसे भविष्य में भी निर्दोष मजदूरों की जान लेते रहेंगे।
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