मन की बात 134वां एपिसोड: पीएम मोदी ने जल संरक्षण, समाज सेवा, खेल और भीषण गर्मी से बचाव का दिया संदेश
मन की बात के 134वें एपिसोड में पीएम मोदी ने दिया जनभागीदारी, जल संरक्षण और समाज सेवा का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से सामाजिक कार्यों में भागीदारी बढ़ाने, जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने और खिलाड़ियों की उपलब्धियों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने रविवार को अपने लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 134वें एपिसोड के माध्यम से देशवासियों को कई महत्वपूर्ण संदेश दिए। इस दौरान उन्होंने समाज सेवा, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, खिलाड़ियों की उपलब्धियां, भीषण गर्मी से बचाव और भारत की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाने वाले आमों की विभिन्न किस्मों पर विस्तार से चर्चा की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसे लाखों लोग हैं जो बिना किसी स्वार्थ के समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं। ऐसे लोगों की पहचान करना, उनकी सराहना करना और उनके कार्यों से प्रेरणा लेना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सकारात्मक बदलाव की कहानियां समाज को नई दिशा देने का काम करती हैं और लोगों में सेवा भाव को बढ़ावा देती हैं।
समाज सेवा से बदल सकता है देश का भविष्य
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से समाज सेवा और जनभागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक अपने आसपास के क्षेत्र में किसी एक सकारात्मक कार्य से भी जुड़ जाए, तो देश में बड़े बदलाव संभव हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि समाज के लिए काम करने वाले लोग किसी पुरस्कार या पहचान की अपेक्षा नहीं रखते, लेकिन उनके प्रयासों का प्रभाव लाखों लोगों तक पहुंचता है। उन्होंने लोगों से ऐसे अभियानों का हिस्सा बनने की अपील की, जो समाज के कमजोर वर्गों, पर्यावरण और शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक योगदान दे रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकारों के प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब लोग मिलकर किसी उद्देश्य के लिए कार्य करते हैं, तब परिवर्तन अधिक प्रभावी और स्थायी बनता है।
भीषण गर्मी के बीच सावधानी बरतने की अपील
देश के कई हिस्सों में लगातार बढ़ रहे तापमान और हीटवेव की स्थिति का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों से विशेष सावधानी बरतने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, दोपहर के समय अनावश्यक रूप से बाहर न निकलना और स्वास्थ्य संबंधी निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है।
पीएम मोदी ने कहा कि बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को गर्मी से विशेष रूप से बचाने की आवश्यकता है। उन्होंने लोगों से सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की ताकि हीटवेव के प्रभाव को कम किया जा सके।
भारत के पारंपरिक पेयों की विशेषता बताई
गर्मी से राहत देने वाले भारतीय पारंपरिक पेयों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विविधता केवल भाषा, वेशभूषा या खानपान तक सीमित नहीं है, बल्कि पारंपरिक पेय पदार्थों में भी इसकी झलक दिखाई देती है।
उन्होंने बताया कि उत्तर भारत में आम पन्ना बेहद लोकप्रिय है, जबकि पंजाब और हरियाणा में लस्सी लोगों की पहली पसंद मानी जाती है। राजस्थान और गुजरात में छाछ का व्यापक उपयोग होता है। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में सत्तू का शरबत गर्मी से राहत देने वाला प्रमुख पेय है।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि कोंकण और गोवा क्षेत्र में कोकम शरबत और सोलकढ़ी का विशेष महत्व है, जबकि दक्षिण भारत में पनकम, नीर मोर और सांबरम जैसे पेय पदार्थ लंबे समय से लोगों के जीवन का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये पेय न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक हैं।
आम की विविधता और किसानों के योगदान की सराहना
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने भारत में मिलने वाले आमों की प्रसिद्ध किस्मों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में आम उत्पादन के लिए जाना जाता है और देश के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग स्वाद और विशेषताओं वाले आम पाए जाते हैं।
उन्होंने महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र के प्रसिद्ध हापुस (अल्फांसो) आम, गुजरात के केसर आम, उत्तर प्रदेश के दशहरी आम और काशी के लंगड़ा आम का विशेष रूप से उल्लेख किया। पीएम मोदी ने कहा कि इन आमों की लोकप्रियता केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इनकी बड़ी मांग है।
प्रधानमंत्री ने आम उत्पादक किसानों की सराहना करते हुए कहा कि वे देश की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनके अथक परिश्रम के कारण भारत विश्व में अपनी कृषि पहचान को और मजबूत कर रहा है।
जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान
प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण के विषय को भी विशेष महत्व दिया। उन्होंने देशभर में नदियों, तालाबों, कुओं और पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए चलाए जा रहे सामुदायिक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर लोग मिलकर वर्षों से सूखे पड़े जल स्रोतों को पुनर्जीवित कर रहे हैं, जिससे न केवल जल संकट कम हुआ है बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बचपन की यादों से जुड़े तालाबों और कुओं को दोबारा जीवंत होते देखना लोगों के लिए गर्व और खुशी का विषय है।
उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वर्षा जल संचयन, जल संरक्षण और जल स्रोतों की सफाई जैसे अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
खिलाड़ियों की उपलब्धियों पर जताया गर्व
पीएम मोदी ने हाल ही में National Senior Athletics Championships में भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता के दौरान चार अलग-अलग स्पर्धाओं में राष्ट्रीय रिकॉर्ड बने, जो भारतीय खेलों के उज्ज्वल भविष्य का संकेत हैं। प्रधानमंत्री ने Gurindervir Singh, Tejaswin Shankar, Dev Meena, Kuldeep Kumar और Animesh Kujur सहित कई खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धियों के लिए बधाई दी।
उन्होंने कहा कि युवा खिलाड़ियों की सफलता देश के लाखों युवाओं को प्रेरित करती है और भारत को खेल महाशक्ति बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मन की बात के 134वें एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समाज सेवा, जनभागीदारी, जल संरक्षण, खेल, कृषि और सांस्कृतिक विरासत जैसे विषयों को केंद्र में रखा। उन्होंने देशवासियों से सकारात्मक कार्यों में योगदान देने, पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने और सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का आह्वान किया। कार्यक्रम का मूल संदेश यही रहा कि जब समाज और सरकार मिलकर कार्य करते हैं, तभी राष्ट्र विकास की नई ऊंचाइयों को छूता है।
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