निर्जला एकादशी 2026: हरिद्वार में उमड़ा आस्था का सैलाब, हर की पैड़ी पर लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में डुबकी
निर्जला एकादशी पर हरिद्वार में उमड़ा आस्था का सैलाब, हर की पैड़ी पर लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में डुबकी
धर्मनगरी हरिद्वार में सुबह से श्रद्धालुओं की भारी भीड़, सुरक्षा के लिए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट
धर्मनगरी हरिद्वार में निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। सुबह से ही देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे लाखों श्रद्धालु हर की पैड़ी और अन्य गंगा घाटों पर स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। गंगा तटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने से पूरा शहर भक्तिमय माहौल में डूबा हुआ है। प्रशासन को उम्मीद है कि दिन चढ़ने के साथ श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ेगी तथा शाम की गंगा आरती तक लाखों श्रद्धालु मां गंगा में आस्था की डुबकी लगा चुके होंगे। भीड़ को देखते हुए प्रशासन और पुलिस विभाग ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं।
हर की पैड़ी पर सुबह से उमड़ रही भीड़
निर्जला एकादशी के अवसर पर सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालुओं का हरिद्वार पहुंचना शुरू हो गया था। हर की पैड़ी, मालवीय घाट, सुभाष घाट, बिरला घाट और अन्य प्रमुख गंगा घाट श्रद्धालुओं से खचाखच भरे नजर आए। श्रद्धालु गंगा स्नान के बाद पूजा-अर्चना कर भगवान विष्णु का स्मरण कर रहे हैं। कई श्रद्धालु अपने परिवार के साथ गंगा तट पर दान-पुण्य करते हुए भी दिखाई दिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व माना जाता है। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड सहित कई राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे हैं।
क्या है निर्जला एकादशी का महत्व?
हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहा जाता है। इसे वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन बिना जल ग्रहण किए व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही गंगा स्नान, जल दान, अन्न दान और जरूरतमंदों की सहायता करने से व्यक्ति को अनेक यज्ञों के समान फल प्राप्त होता है। धर्माचार्यों के अनुसार निर्जला एकादशी को "भीम एकादशी" के नाम से भी जाना जाता है।
24 एकादशियों के बराबर मिलता है पुण्यफल
ज्योतिष एवं धर्म विशेषज्ञ पंडित मनोज त्रिपाठी के अनुसार एक वर्ष में कुल 24 एकादशियां पड़ती हैं और सभी एकादशियों का व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है। उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति किसी कारणवश पूरे वर्ष सभी एकादशियों का व्रत नहीं कर पाता है, तो केवल निर्जला एकादशी का व्रत करने से उसे सभी 24 एकादशियों के व्रत के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
प्रशासन ने किए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम
निर्जला एकादशी स्नान पर्व को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में है। पिछले सप्ताह सोमवती अमावस्या पर उमड़ी रिकॉर्ड भीड़ को ध्यान में रखते हुए इस बार अतिरिक्त व्यवस्थाएं की गई हैं।श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुचारू आवागमन के लिए पूरे मेला क्षेत्र को 4 सुपर जोन, 12 जोन और 30 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक क्षेत्र में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की विशेष तैनाती की गई है।इसके अलावा सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से भीड़ पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। घाटों पर जल पुलिस और आपदा राहत टीमों को भी सक्रिय रखा गया है।
रूट डायवर्जन और यातायात व्यवस्था लागू
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया है। शहर में कई स्थानों पर रूट डायवर्जन किए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।साथ ही दिन के समय भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। पार्किंग स्थलों पर अतिरिक्त व्यवस्था की गई है और वाहनों को निर्धारित स्थानों पर ही खड़ा करने के निर्देश दिए गए हैं।यातायात पुलिस लगातार लोगों को मार्गदर्शन देने का काम कर रही है।
गंगा तटों पर दिखा दान-पुण्य का दृश्य
निर्जला एकादशी के अवसर पर श्रद्धालु केवल स्नान ही नहीं कर रहे, बल्कि बड़ी संख्या में दान-पुण्य भी कर रहे हैं। कई श्रद्धालु गरीबों और जरूरतमंदों को जल, फल, भोजन और वस्त्र वितरित करते नजर आए।धार्मिक मान्यता है कि इस दिन जल और अन्न का दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। इसी कारण गंगा घाटों पर सेवा कार्यों का भी विशेष आयोजन किया गया है।कई सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं द्वारा निशुल्क शरबत, पानी और भोजन वितरण शिविर लगाए गए हैं।
सोमवती अमावस्या की भीड़ के बाद बढ़ी सतर्कता
प्रशासन इस बार विशेष रूप से सतर्क है क्योंकि बीते सप्ताह सोमवती अमावस्या के स्नान पर्व पर हरिद्वार में लगभग 75 लाख श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया था।उस दौरान हरिद्वार में रिकॉर्ड भीड़ देखने को मिली थी। वीकेंड और धार्मिक पर्व एक साथ पड़ने के कारण श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा था।इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए निर्जला एकादशी के लिए पहले से ही विस्तृत सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन योजना तैयार की गई है।
शाम की गंगा आरती में जुटेंगे लाखों श्रद्धालु
प्रशासन को उम्मीद है कि शाम तक श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि होगी। विशेष रूप से हर की पैड़ी पर होने वाली विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।हरिद्वार आने वाले अधिकांश श्रद्धालु गंगा स्नान के साथ-साथ शाम की आरती में भी शामिल होना चाहते हैं। ऐसे में शाम के समय भीड़ प्रबंधन प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती रहने वाला है।
आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हुआ हरिद्वार
निर्जला एकादशी के अवसर पर पूरा हरिद्वार आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति भाव से सराबोर दिखाई दे रहा है। घाटों पर गूंजते भजन, मंदिरों में बजती घंटियां और गंगा तट पर उमड़ती श्रद्धालुओं की भीड़ धर्मनगरी की विशेष पहचान को और मजबूत कर रही है। श्रद्धालु मां गंगा और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और कल्याण की कामना कर रहे हैं।
निर्जला एकादशी के अवसर पर हरिद्वार में एक बार फिर आस्था का विराट स्वरूप देखने को मिल रहा है। लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान और दान-पुण्य कर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। वहीं प्रशासन भी सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर पूरी तरह मुस्तैद है। यदि श्रद्धालुओं की संख्या इसी तरह बढ़ती रही तो शाम तक हरिद्वार में एक बार फिर श्रद्धा और विश्वास का ऐतिहासिक संगम देखने को मिल सकता है।
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