उत्तराखंड में DGP दीपम सेठ के इस्तीफे की मांग तेज, सुराज सेवा दल का देहरादून में जोरदार प्रदर्शन
उत्तराखंड में DGP दीपम सेठ के इस्तीफे की मांग तेज, देहरादून में सुराज सेवा दल का जोरदार प्रदर्शन
देहरादून में शनिवार को उत्तराखंड की कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक और सामाजिक माहौल उस समय गरमा गया, जब सुराज सेवा दल के कार्यकर्ताओं ने पुलिस महानिदेशक (DGP) दीपम सेठ के इस्तीफे की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था, बढ़ते अपराध और हाल के विवादित घटनाक्रमों पर गंभीर सवाल उठाए।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल की भारी तैनाती रही और सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार से पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने की मांग की। संगठन का कहना है कि हाल के महीनों में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिन्होंने आम लोगों के मन में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर उठाए सवाल
सुराज सेवा दल ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड में अपराध और सामाजिक तनाव की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। संगठन का कहना है कि नशे के बढ़ते कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है, जबकि कई संवेदनशील मामलों में पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि राज्य में कानून का राज मजबूत करने के लिए पुलिस नेतृत्व की जवाबदेही तय होना आवश्यक है। उनका आरोप है कि कई मामलों में समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से जनता के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ी है।
कर्णप्रयाग और नागरासू विवाद के बाद बढ़ा असंतोष
संगठन ने हाल ही में कर्णप्रयाग में स्थानीय लोगों और कुछ निहंग सिखों के बीच हुई हिंसक झड़प का भी उल्लेख किया। इस घटना के बाद पूरे प्रदेश में काफी चर्चा हुई थी और पुलिस की कार्रवाई को लेकर विभिन्न पक्षों की ओर से सवाल भी उठाए गए थे।
इसके बाद रुद्रप्रयाग जिले के नागरासू गुरुद्वारे में कई दिनों तक चला गतिरोध भी चर्चा का विषय बना रहा। हालांकि प्रशासन, पुलिस और प्रतिनिधियों के बीच वार्ता के बाद मामला शांत हो गया, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी। सुराज सेवा दल का कहना है कि यदि शुरुआती स्तर पर बेहतर संवाद और प्रभावी पुलिस व्यवस्था होती तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं बनती।
उत्तराखंड-हिमाचल सीमा पर भी बढ़ा था तनाव
हाल के दिनों में उत्तराखंड-हिमाचल सीमा पर भी निहंग समूह और पुलिस के बीच तनाव की घटनाएं सामने आई थीं। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन को अतिरिक्त पुलिस बल और सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती करनी पड़ी थी। इन घटनाओं ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के बीच नई बहस को जन्म दिया। सुराज सेवा दल का कहना है कि ऐसे मामलों में बेहतर समन्वय और समय पर निर्णय लेने की आवश्यकता थी।
डीजीपी दीपम सेठ के इस्तीफे की मांग
प्रदर्शन के दौरान सुराज सेवा दल के नेताओं ने स्पष्ट रूप से उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ के इस्तीफे की मांग उठाई। उनका कहना है कि पुलिस प्रशासन की शीर्ष जिम्मेदारी राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की होती है और यदि लगातार विवाद सामने आ रहे हैं तो उसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार से पुलिस व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करने और पुलिस तंत्र में आवश्यक सुधार लागू करने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम
प्रदर्शन को देखते हुए देहरादून में पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। प्रदर्शन स्थल पर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। कुछ समय तक नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन जारी रहा, लेकिन पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में बनाए रखा और किसी भी प्रकार की हिंसक घटना सामने नहीं आई।
राजनीतिक गलियारों में तेज हुई चर्चा
सुराज सेवा दल के प्रदर्शन के बाद राज्य की राजनीति में भी इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दल भी लगातार कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना साध रहे हैं, जबकि सामाजिक संगठनों का एक वर्ग पुलिस सुधार और जवाबदेही की मांग कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि कानून-व्यवस्था जैसे संवेदनशील विषय पर सरकार और पुलिस प्रशासन दोनों को जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शी और प्रभावी कदम उठाने होंगे।
सरकार और पुलिस की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान
समाचार लिखे जाने तक उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय या राज्य सरकार की ओर से सुराज सेवा दल की मांगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई थी। हालांकि प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी संवेदनशील मामलों की निगरानी लगातार की जा रही है।
कानून-व्यवस्था पर बढ़ी सार्वजनिक बहस
बीते कुछ सप्ताह में सामने आई विभिन्न घटनाओं के बाद उत्तराखंड में कानून-व्यवस्था, पुलिस सुधार, सांप्रदायिक सौहार्द और सार्वजनिक सुरक्षा जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में प्रशासन, पुलिस, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों के बीच बेहतर संवाद आवश्यक है ताकि किसी भी प्रकार का तनाव समय रहते समाप्त किया जा सके और प्रदेश में शांति एवं सामाजिक सौहार्द बना रहे।
देहरादून में सुराज सेवा दल का प्रदर्शन केवल एक राजनीतिक विरोध नहीं बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर उठ रही चिंताओं का प्रतीक बन गया है। हालांकि संगठन ने डीजीपी दीपम सेठ के इस्तीफे की मांग की है, लेकिन इस पर अंतिम निर्णय सरकार के स्तर पर ही होगा। फिलहाल पूरे मामले पर सभी की नजर राज्य सरकार और उत्तराखंड पुलिस की आगामी प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि हाल के विवादों और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए प्रशासन आगे क्या रणनीति अपनाता है।
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