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कोलकाता में बड़ा हादसा: निर्माणाधीन फैक्ट्री शेड ढहा, 18 घायल; कई मजदूरों के मलबे में फंसे होने की आशंका

कोलकाता में निर्माणाधीन फैक्ट्री शेड ढहा, 18 घायल; कई लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका

तारातला इलाके में बड़ा हादसा, बचाव दल गैस कटर और ड्रिलिंग मशीनों की मदद से चला रहा रेस्क्यू ऑपरेशन

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के तारातला इलाके में बुधवार को एक बड़ा निर्माण हादसा हो गया। यहां एक निर्माणाधीन फैक्ट्री शेड अचानक ढह गया, जिससे कम से कम 18 लोग घायल हो गए। अधिकारियों के अनुसार कई अन्य मजदूरों के अभी भी मलबे में फंसे होने की आशंका है, जिसके चलते व्यापक स्तर पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है।

घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों और राहत-बचाव टीमों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर मलबे में दबे लोगों को निकालने का प्रयास शुरू किया। घायलों को उपचार के लिए कोलकाता के प्रसिद्ध SSKM अस्पताल भेजा गया है, जहां चार लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

काम के दौरान अचानक भरभराकर गिरा ढांचा

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसा उस समय हुआ जब निर्माणाधीन फैक्ट्री शेड में मजदूर काम कर रहे थे। बताया जा रहा है कि कंक्रीट डालने का काम चल रहा था, तभी पूरा ढांचा अचानक भरभराकर गिर पड़ा।प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक शेड में लगे भारी लोहे के बीम और कंक्रीट के स्लैब सीधे नीचे काम कर रहे मजदूरों पर आ गिरे। हादसा इतना अचानक हुआ कि कई लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला और वे मलबे के नीचे दब गए।

मलबे के नीचे से आती रहीं मदद की आवाजें

हादसे के बाद का दृश्य बेहद भयावह था। आसपास मौजूद लोगों ने बताया कि ढांचा गिरने के बाद मलबे के नीचे दबे मजदूर लगातार मदद के लिए पुकार रहे थे। घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचने वालों में शामिल उज्ज्वल कुमार ने बताया कि मलबे के नीचे दबे लोगों की चीखें साफ सुनाई दे रही थीं। उन्होंने और अन्य स्थानीय लोगों ने बचाव दल के पहुंचने तक फंसे हुए लोगों को पानी पहुंचाने और राहत कार्य में मदद करने का प्रयास किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई मजदूर दर्द से कराह रहे थे और उन्हें जल्द से जल्द बाहर निकालने की कोशिश की जा रही थी।

ग्राउंड फ्लोर पर काम कर रहे थे मजदूर

स्थानीय लोगों के अनुसार इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर निर्माण कार्य जारी था, जबकि पहली और दूसरी मंजिल पर कंक्रीट संरचना का काम काफी हद तक पूरा हो चुका था। बताया जा रहा है कि नीचे काम कर रहे मजदूरों पर ही पूरा ढांचा गिर पड़ा। इस कारण सबसे ज्यादा नुकसान ग्राउंड फ्लोर पर मौजूद श्रमिकों को हुआ।अधिकारियों का मानना है कि मलबे में अभी भी कुछ लोगों के फंसे होने की संभावना है, इसलिए रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज कर दिया गया है।

गैस कटर और ड्रिलिंग मशीनों की मदद से चल रहा बचाव कार्य

दमकल विभाग और कोलकाता पुलिस की आपदा प्रबंधन टीम मौके पर लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई है।बचाव कार्य में सबसे बड़ी चुनौती भारी लोहे के बीम, मोटी सरिया और कंक्रीट के बड़े स्लैब हैं, जिन्हें हटाए बिना अंदर फंसे लोगों तक पहुंचना संभव नहीं है। इसी कारण रेस्क्यू टीम गैस कटर की सहायता से लोहे के ढांचों को काट रही है। वहीं मलबे के भीतर सुरक्षित रास्ता बनाने के लिए ड्रिलिंग मशीनों का उपयोग किया जा रहा है।कोलकाता पुलिस की आपदा प्रबंधन टीम के एक सदस्य ने बताया कि मलबे के नीचे से आने वाली आवाजों की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है ताकि जीवित लोगों तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके।

घटिया निर्माण सामग्री की आशंका

दमकल विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने प्रारंभिक जांच के आधार पर कहा कि हादसा कंक्रीट डालने के दौरान हुआ। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि निर्माण कार्य में घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माणाधीन ढांचों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी या खराब गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग ऐसे हादसों का बड़ा कारण बन सकता है।

राज्य सरकार ने बनाया कंट्रोल रूम

हादसे की गंभीरता को देखते हुए पश्चिम बंगाल सरकार ने स्थिति की निगरानी और राहत-बचाव कार्यों के समन्वय के लिए राज्य सचिवालय नबन्ना में एक विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किया है। सरकारी अधिकारियों को लगातार घटनास्थल से अपडेट मिल रहे हैं और रेस्क्यू ऑपरेशन की प्रगति पर नजर रखी जा रही है।

मंत्री और अधिकारी पहुंचे घटनास्थल

राज्य मंत्री इंद्रनील खान ने घटनास्थल का दौरा कर बचाव कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि फिलहाल सरकार की प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना और घायलों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना है।

उन्होंने कहा कि बचाव कार्य पूरा होने के बाद हादसे के कारणों और संभावित लापरवाही की विस्तृत जांच कराई जाएगी। इसके अलावा शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल और कोलकाता नगर निगम की आयुक्त स्मिता पांडे भी घटनास्थल पर पहुंचीं और स्थिति का जायजा लिया। भाजपा नेता राकेश सिंह ने भी मौके का दौरा किया।

छह-सात महीने से चल रहा था निर्माण कार्य

जानकारी के अनुसार संबंधित गोदाम और फैक्ट्री शेड का निर्माण कार्य पिछले छह से सात महीनों से जारी था। बताया जा रहा है कि भूमि का स्वामित्व बेहेरा ब्रदर्स कंस्ट्रक्शन से जुड़े शंभू बेहेरा के पास है, जबकि परियोजना का विकास कार्य असगर खान द्वारा कराया जा रहा था। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया था। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।

सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल

हादसे के बाद एक बार फिर निर्माणाधीन परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े निर्माण कार्यों के दौरान श्रमिकों की सुरक्षा, संरचनात्मक मजबूती और गुणवत्ता नियंत्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यदि इन मानकों की अनदेखी की जाती है तो ऐसे हादसे बड़ी जनहानि का कारण बन सकते हैं।

कोलकाता के तारातला इलाके में निर्माणाधीन फैक्ट्री शेड का ढहना एक गंभीर औद्योगिक और निर्माण सुरक्षा हादसे के रूप में सामने आया है। 18 लोगों के घायल होने और कई मजदूरों के मलबे में फंसे होने की आशंका ने चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल पूरा ध्यान बचाव कार्यों पर केंद्रित है, जबकि हादसे के कारणों और संभावित लापरवाही की जांच बाद में की जाएगी। रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद ही इस दुर्घटना की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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