नगरासू गुरुद्वारा विवाद: निहंगों की उत्तराखंड एंट्री पर सख्ती, हिमाचल बॉर्डर पर पुलिस छावनी में तब्दील हुआ कुल्हाल
नगरासू गुरुद्वारा विवाद: हिमाचल बॉर्डर पर अलर्ट, निहंगों की एंट्री रोकने के लिए पुलिस की कड़ी निगरानी
कुल्हाल पुलिस चौकी बनी छावनी, भारी संख्या में पुलिस और आईटीबीपी तैनात
नगरासू गुरुद्वारा विवाद के बाद उत्तराखंड पुलिस पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है। संभावित तनाव को देखते हुए हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर स्थित कुल्हाल क्षेत्र को सुरक्षा के लिहाज से छावनी में तब्दील कर दिया गया है। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी स्थिति में कानून-व्यवस्था को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।
कोतवाली विकासनगर के अंतर्गत आने वाली कुल्हाल पुलिस चौकी और आसपास के क्षेत्रों में भारी संख्या में पुलिस बल तथा आईटीबीपी के जवानों की तैनाती की गई है। अधिकारियों के अनुसार निहंग समूहों की गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर उन्हें सीमा पर ही रोका जाएगा।
बॉर्डर पर चौकसी, वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद
सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए एसपी देहात पंकज गैरोला, कोतवाल राजीव रौथाण सहित कई वरिष्ठ अधिकारी स्वयं मौके पर मौजूद हैं। पुलिस लगातार आने-जाने वाले वाहनों और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है।
इसके अलावा डाकपत्थर पुल और डाकपत्थर बैराज क्षेत्र में भी अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। यह इलाका हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बीच महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग माना जाता है। प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
नगरासू गुरुद्वारा विवाद के बाद बढ़ी संवेदनशीलता
हाल ही में नगरासू गुरुद्वारा विवाद ने राज्यभर में चर्चा बटोरी थी। विवाद उस समय और संवेदनशील हो गया जब चार निहंग सिख गुरुद्वारे की चौथी मंजिल पर चढ़ गए और खुद को भीतर बंद कर लिया। इससे स्थानीय स्तर पर तनाव का माहौल बन गया और सामाजिक सौहार्द प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने मामले के समाधान के लिए विशेष रणनीति तैयार की और वरिष्ठ अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी।
एएसपी हरबंस सिंह की सूझबूझ से टला बड़ा विवाद
इस पूरे घटनाक्रम में एएसपी रानीखेत हरबंस सिंह की भूमिका बेहद अहम रही। पुलिस अधिकारियों के अनुसार उन्होंने पारंपरिक पुलिस कार्रवाई के बजाय संवाद और विश्वास का रास्ता चुना। 22 जून को हरबंस सिंह बिना वर्दी और बिना किसी आधिकारिक पहचान के एक सामान्य सिख श्रद्धालु के रूप में नगरासू पहुंचे। उन्होंने पहले स्थानीय हालात का बारीकी से अध्ययन किया और फिर गुरुद्वारे के सेवादारों तथा अपने पुराने संपर्कों के माध्यम से निहंग सिखों तक पहुंच बनाई।उनका उद्देश्य किसी भी तरह के टकराव के बजाय बातचीत के जरिए समाधान निकालना था।
निहंगों की क्या थीं प्रमुख मांगें?
23 जून को हुई बातचीत के दौरान निहंग सिखों ने अपनी चिंताओं और मांगों को अधिकारियों के सामने रखा।
जानकारी के अनुसार उनकी मुख्य मांगें थीं:
- हेमकुंड साहिब यात्रा का निर्बाध संचालन।
- यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं से कथित ओवररेटिंग पर रोक।
- कर्णप्रयाग घटना के बाद हिरासत में लिए गए निहंग सिखों के मामले की निष्पक्ष जांच।
- श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना।
बातचीत के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि निहंग समूह का कर्णप्रयाग में हुई मूल घटना से प्रत्यक्ष संबंध नहीं था, बल्कि वे उससे जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी चिंता जता रहे थे।
बाहरी ताकतों द्वारा माहौल बिगाड़ने की कोशिश
सूत्रों के अनुसार इस संवेदनशील मामले में कुछ बाहरी और अंतरराष्ट्रीय स्तर की ताकतों द्वारा भी भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही थी। सोशल मीडिया के माध्यम से कई भ्रामक जानकारियां प्रसारित होने की आशंका जताई गई थी, जिससे विवाद और बढ़ सकता था। हालांकि पुलिस और प्रशासन ने समय रहते स्थिति को समझते हुए संवाद का रास्ता अपनाया और किसी भी प्रकार के बड़े तनाव को टालने में सफलता हासिल की।
हेमकुंड साहिब यात्रा पर नहीं पड़ेगा असर
प्रशासन का कहना है कि हेमकुंड साहिब यात्रा पूरी तरह सुरक्षित और सुचारू रूप से संचालित की जा रही है। यात्रा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था पहले की तरह जारी है और श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। पुलिस लगातार यात्रा मार्गों, गुरुद्वारों और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर निगरानी बनाए हुए है ताकि किसी भी अफवाह या असामाजिक गतिविधि को समय रहते रोका जा सके।
प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की
एएसपी हरबंस सिंह ने बताया कि सभी पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण वातावरण में बातचीत हुई है और विवाद का समाधान निकाल लिया गया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में किसी प्रकार का तनाव नहीं है और सभी पक्ष शांति बनाए रखने के पक्ष में हैं। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी संदिग्ध जानकारी की पुष्टि किए बिना उसे साझा न करने की अपील की है।
नगरासू गुरुद्वारा विवाद के बाद उत्तराखंड पुलिस ने जिस सतर्कता और संयम का परिचय दिया, उससे संभावित तनाव को टालने में सफलता मिली है। हिमाचल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी गई है, जबकि संवाद और विश्वास के जरिए विवाद का शांतिपूर्ण समाधान भी निकाल लिया गया है। प्रशासन का कहना है कि राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सभी एजेंसियां पूरी तरह तैयार हैं।
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