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Nanda Ki Chauki पुल धंसाव मामले की जांच में बड़े खुलासे, डिजाइन से गायब थे सुरक्षा इंतजाम

Dehradun : 28 जुलाई को पुराने पांवटा साहिब राजमार्ग पर टौंस नदी स्थित नंदा की चौकी स्थित नवनिर्मित पुल की एप्रोच रोड महज 16 दिनों में धंस गई, 16 करोड़ की लागत से बने इस प्रॉजेक्ट की गुणवत्ता पर कई सवाल उठे और भ्र्ष्टाचार के आरोप भी लगे,अब इस मामले की जांच में कई बड़े खुलासे हुए हैं. जिसमें डिजाइन और सुरक्षा उपायों की कमी पाई गई। 

 

नंदा की चौकी पुल की एप्रोच रोड धंसाव मामले की जांच रिपोर्ट सौंप दी गई है, जिसमें डिजाइन में सुरक्षा उपायों की कमी पाई गई है। जांच में मुख्य जिम्मेदारी कंसल्टेंट और आईआईटी बीएचयू की तय की गई है, साथ ही लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों पर भी सवाल उठे हैं।

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नंदा की चौकी के पुल की एप्रोच रोड पर धंसाव मामले की जांच क्षेत्रीय मुख्य अभियंता दयानंद ने पूरी कर दी है। इसके साथ ही जांच रिपोर्ट शनिवार को उच्चाधिकारियों के सुपुर्द कर दी गई है। जांच रिपोर्ट में क्या-क्या दर्ज किया गया है, इसे अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से जो बातें बाहर आई हैं, उसके अनुसार पुल की सुरक्षा के आवश्यक इंतजाम डिजाइन से गायब पाए गए।

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पुराने पांवटा साहिब राजमार्ग पर टौंस नदी स्थित नंदा की चौकी का पुल 15 सितंबर 2025 की मध्य रात्रि को अतिवृष्टि के दौरान क्षतिग्रस्त हो गया था। लंबी कसरत के बाद इसका संचालन 12 जुलाई 2026 की सुबह तब शुरू किया गया, जब टौंस नदी की अस्थाई पुलिया तेज बहाव में ढह गई थी। कुछ दिन तो सब ठीक रहा, मगर 28 जुलाई की सुबह करीब पांच बजे पुल की एप्रोच रोड धंस गई। हालांकि, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सख्ती के बाद 12 घंटे में एप्रोच रोड का धंसाव दूर कर यातायात बहाल कर दिया गया था।

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इस धंसाव के कारणों की पड़ताल और जिम्मेदारी तय करने के लिए क्षेत्रीय मुख्य अभियंता को जांच सौंप दी गई थी।जांच में उन्होंने पाया कि टौंस नदी का बहाव एकतरफा एप्रोच रोड की दिशा में होने से यह स्थति पैदा हुई। इसके लिए काफी हद तक अस्थाई पुलिया के अवशेष भाग को न हटाया जाना और नदी क्षेत्र में बनी एक गौशाला को माना गया।

कंसलटेंट के डिजाइन को जब आइआइटी बीएचयू को परीक्षण के लिए भेजा गया तो वहां से भी इस दिशा में कोई सुझाव नहीं दिए गए और इसे उपयुक्त बता दिया गया, लिहाजा प्रमुख रूप से कंसलटेंट और आइआइटी की जिम्मेदारी तय की गई है। 

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वहीं निर्माण करने वाली कंपनी पर भी विपक्ष सवाल खड़े कर रहा है मीडिया रिपोर्ट्स में इस निर्माण का ठेका बीजेपी से जुडी एक नेत्री के पति का होने का दावा किया जा रहा है।वहीं विपक्ष के कई नेताओं ने 28 जुलाई को नंदा की चौकी पहुंचकर अपना विरोध जताया था,वहीं अवैध खनन का मुद्दा भी गरमा रहा है।

 

 

 

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