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"उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज; ईवीएम मशीनें पहुंचने से राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ीं"

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां और चुनावी तैयारियां दोनों ही बेहद तेज हो चुकी हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी किए गए नए प्लानर और जमीनी स्तर पर शुरू हुई प्रशासनिक हलचल ने सभी राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

 

1 -ईवीएम (EVM) और वीवीपीएटी (VVPAT) की बड़ी खेप पहुंची : 

चुनाव को निष्पक्ष और समय पर संपन्न कराने के लिए निर्वाचन आयोग ने मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित कर दी है। राज्य में पहले से मौजूद स्टॉक के अलावा बिहार से अतिरिक्त मशीनें मंगाई गई हैं, जिन्हें जिलावार भेजा जा चुका है:

  • बिहार से आई मशीनें: 2,500 बैलेट यूनिट, 6,000 वीवीपीएटी (VVPAT) और 12,500 कंट्रोल यूनिट।
  • कुल उपलब्ध स्टॉक: वर्तमान में राज्य के पास कुल 27,700 बैलेट यूनिट, 25,697 वीवीपीएटी और 36,553 कंट्रोल यूनिट सुरक्षित हैं।
  • जांच प्रक्रिया (FLC): सितंबर-अक्टूबर के महीनों में इन सभी मशीनों की प्रथम स्तर की जांच (First Level Checking) की जाएगी और खराब मशीनों को तुरंत अलग कर दिया जाएगा।

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2.- प्रशासनिक फेरबदल: तीन साल से जमे अफसर हटेंगे

चुनाव आयोग के कड़े नियमों के तहत राज्य में प्रशासनिक सर्जरी होने वाली है। ऐसे सभी आईएएस (IAS), पीसीएस (PCS) और चुनाव ड्यूटी से जुड़े अधिकारी जो पिछले 3 साल से एक ही जगह या गृह जनपद में तैनात हैं, उनका तबादला किया जाएगा। यह प्रक्रिया चुनाव से करीब 6 महीने पहले इसलिए की जा रही है ताकि नए अधिकारियों को चुनावी ट्रेनिंग दी जा सके।

3. अधिकारियों और राजनीतिक दलों की ट्रेनिंग शुरू :

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के प्लानर के अनुसार अगले महीने से बड़े स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू होने जा रहा है:

जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) और रिटर्निंग अफसरों (RO) के लिए 5 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण आयोजित होगा।

सितंबर-अक्टूबर से राजनीतिक दलों और चुनाव से जुड़े विभिन्न सेल के प्रतिनिधियों को भी चुनावी बारीकियों की ट्रेनिंग दी जाएगी।

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4. बुनियादी सामानों की खरीद और मतदाता जागरूकता : 

प्रशासन ने चुनाव के लिए जरूरी सामग्री जैसे पावर पैक, सील्स और टैग्स आदि की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके साथ ही, हर जिले में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए व्यवस्थित मतदाता शिक्षा एवं चुनावी भागीदारी (SVEEP) का खास प्लान भी तैयार किया जा रहा है।

ईवीएम मशीनों के जिलों में पहुंचने और अफसरों के तबादलों की सुगबुगाहट ने उत्तराखंड के सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, और सभी दल अपनी-अपनी जमीनी रणनीति मजबूत करने में जुट गए हैं।

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