हरीश रावत की धन्यवाद यात्रा से कुमारी शैलजा नाराज, चिठ्ठी लिखकर कार्यक्रम आगे ना बढ़ाने का आग्रह
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की अंदरूनी सियासत एक बार फिर गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत की ओर से निकाली जा रही ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ को लेकर पार्टी नेतृत्व ने आपत्ति जताई है। कांग्रेस की उत्तराखंड प्रभारी एवं महासचिव कुमारी शैलजा ने 1 अक्टूबर को रावत को पत्र लिखकर इन कार्यक्रमों को आगे नहीं बढ़ाने का आग्रह किया है।
PCC अध्यक्ष से भी नहीं हुई चर्चा :
सोशल मीडिया पर सामने आए पत्र में शैलजा ने लिखा है कि पार्टी के संज्ञान में आया है कि रावत राज्य में एक यात्रा कर रहे हैं। पत्र के मुताबिक, इस संबंध में न तो प्रदेश प्रभारी से और न ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) अध्यक्ष से चर्चा की गई।सैलजा ने यह भी लिखा कि हाल के दिनों में रावत की ओर से कुछ विवादित बयान दिए जाने की बात सामने आई है। ऐसे समय में, जब राज्य में अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं, कांग्रेस को एकजुट होकर आगे बढ़ने की जरूरत है।
समानांतर कार्यक्रम पार्टी हित में नहीं’
पत्र में शैलजा ने स्पष्ट किया कि चुनावी समय में पार्टी संगठन से अलग कोई समानांतर कार्यक्रम कांग्रेस के हित में नहीं होगा। इसी आधार पर उन्होंने रावत से अपनी यात्रा और अन्य ऐसे कार्यक्रमों को आगे नहीं बढ़ाने का अनुरोध किया।पत्र के सामने आने के बाद उत्तराखंड कांग्रेस में गुटबाजी और नेतृत्व के बीच समन्वय को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
हरीश रावत बोले—पार्टी को मजबूत करना ही उद्देश्य :
दूसरी ओर, हरीश रावत ने यात्रा को लेकर अपने रुख का संकेत देते हुए कहा है कि इसका उद्देश्य कोई समानांतर संगठन खड़ा करना नहीं, बल्कि जनता से सीधा संवाद करना और कांग्रेस को मजबूत करना है। रिपोर्टों के मुताबिक रावत ने पार्टी और संगठन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई है।
रावत की प्रस्तावित यात्रा का कार्यक्रम जसपुर से काशीपुर, रामनगर और कालाढूंगी होते हुए हल्द्वानी तक बताया गया है। 5 अक्टूबर को इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की उनकी तैयारी की खबरें सामने आईं।
अब दिल्ली तलब किए गए हरीश रावत :
मामला अब प्रदेश स्तर से आगे बढ़कर कांग्रेस हाईकमान तक पहुंच गया है। रिपोर्टों के अनुसार कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने हरीश रावत को दिल्ली बुलाया है। माना जा रहा है कि बैठक में उनकी राजनीतिक गतिविधियों, व्यक्तिगत यात्राओं और प्रदेश संगठन के साथ समन्वय को लेकर चर्चा होगी
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ कांग्रेस नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन में एकजुटता बनाए रखने की है। ऐसे में हरीश रावत की स्वतंत्र राजनीतिक सक्रियता और प्रदेश संगठन के बीच तालमेल का मुद्दा पार्टी के लिए अहम बन गया है।
शैलजा की चिट्ठी को इसी संदर्भ में पार्टी हाईकमान का अनुशासन और एकजुटता का स्पष्ट संदेश माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर है कि दिल्ली में होने वाली बातचीत के बाद रावत अपनी यात्रा को लेकर क्या फैसला लेते हैं और कांग्रेस नेतृत्व इस विवाद को किस तरह सुलझाता है।









