उत्तराखंड - अब बुग्यालों में रात बिता सकेंगे पर्यटक, सुप्रीम कोर्ट ने नाईट स्टे पर लगी रोक हटाई
उत्तराखंड में प्रकृति का दीदार करने वाले पर्यटकों के लिए खुशखबरी है,सुप्रीम कोर्ट ने बुग्यालों में नाईट स्टे की रोक को हटा दिया है।ये मामला पिछले 8 सालों से विवादों में रहा था अब पर्यटक और पर्यटन की दृष्टि से राहत मिलती नजर आ रही है।
रुपकुंड, वेदनी बुग्याल सहित प्रदेश के बुग्यालों का दीदार करने और वहां रात बिताने की चाहत रखने वाले पर्यटकों के लिए एक बड़ी सुखद खबर है।पिछले आठ वर्षों से चला आ रहा नाइट स्टे का प्रतिबंध समाप्त हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्देशों के बाद इस रोक को हटा लिया गया। डीएफओ ने अपने 27 जुलाई के पत्र में वन क्षेत्राधिकारियों से न्यायालय के निर्देशों का पालन करने के आदेश दिए।
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पर्यावरण संरक्षण और बुग्यालों में घटती हरियाली को देखते हुए उच्च न्यायालय नैनीताल ने 21 अगस्त 2018 को बुग्यालों में पर्यटकों के रात्रि विश्राम पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था। न्यायालय के इस फैसले के बाद बुग्यालों में टेंट लगाने और रात बिताने पर रोक थी जिससे पर्यटन को बड़ा झटका लगा था।
बेस कैंप लोहाजंग से वाण, दीदना, लोहाजंग, बांक, कुलिंग, मुंदोली आदि कई गांवों में पर्यटकों के ठहरने के लिए युवाओं की ओर से बनाए गए होम स्टे व होटल लॉज बंद हो गए थे।
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डीएफओ के पत्र के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई 2026 के निर्देश में हाईकोर्ट के आदेश को बदलते हुए बुग्यालों में नाइट स्टे पर लगी रोक को हटा दिया है।
- सर्वेश कुमार दुबे, प्रभागीय वनाधिकारी बद्रीनाथ वन प्रभाग चमोली।



















