CJP Protest- Sonam Wangchuk के साथ 23 दिनों की भूख हड़ताल करने वाली Neha Bora कौन हैं, इस खबर में सब जानिए
इन दिनों पूरे देश का केंद्र बिंदु देश की राजधानी दिल्ली बन चुकी है, सोनम वांगचुक के साथ 4 छात्र नेता भी भूख हड़ताल पर बैठे थे. जिनमें से एक हैं नेहा बोरा जिनका एक वीडियो अब इतिहास के सबसे जोरदार भाषणों में माना जा रहा है. इस खबर में उस भाषण और नेहा के बारे में विस्तार से जानिए।
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जंतर मंतर पर सोनम वांगचुक ही नहीं बल्कि 3 लोग नेहा बोरा, मनीष कुमार और आमीन अमितोज भी भूख हड़ताल पर बैठे थे ये सभी छात्र नेता हैं जो (AISA) से जुड़े हुए हैं, 20 जुलाई को इन सभी ने अपनी 23 दिनों की भूख हड़ताल ख़त्म कर दी।
इंटरनेट पर सोनम वांगचुक के बाद सबसे ज्यादा नेहा बोरा को सर्च किया जा रहा है, और 23 दिनों की भूख हड़ताल ख़त्म करने के बाद नेहा बोरा ने मंच पर इतना जोरदार भाषण दिया कि अब नेहा बोरा की चर्चाएं तेज होने लगी है भाषण में उन्होंने क्या कहा उससे पहले नेहा के बारे में जानना जरुरी है।
कौन है नेहा बोरा :
नेहा बोरा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की एक शोधार्थी (PhD scholar) हैं। वो वर्तमान में AISA (अखिल भारतीय छात्र संघ) की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं.नेहा को अक्सर शिक्षा के निजीकरण, मॉब लिंचिंग, बिलकिस बानो के न्याय और गाजा में नागरिकों की स्थिति जैसे मुद्दों पर मुखर होकर अपनी बात रखते देखा गया है।
उत्तराखंड की रहने वाली नेहा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन और अंबेडकर विश्वविद्यालय से मास्टर की पढ़ाई की है. फिलहाल वह जेएनयू के स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स में शोध कर रही हैं. छात्र राजनीति के अलावा वह थिएटर गतिविधियों से भी जुड़ी रही हैं.
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वामपंथी छात्र राजनीति से जुड़ी नेहा अक्सर शिक्षा के निजीकरण, छात्र अधिकारों और सामाजिक समानता के मुद्दों पर मुखर रहती हैं। हालांकि, उनके कुछ बयानों (जैसे हिंदू समाज, जातिगत राजनीति और कुछ पत्रकारों के साथ हुए विवादों पर की गई टिप्पणियों) को लेकर दक्षिणपंथी समूहों द्वारा उनकी आलोचना भी की जाती रही है।
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नेहा बोरा ने जंतर मंतर पर कई भाषण दिए जिनमें से दो ने खूब सुर्खियां बटोरी पहला छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में दिल्ली पुलिस कमिश्नर का इस्तीफा और दूसरा भाषण जो इस वक्त सुर्खियां बटोर रहा 'दहशत गर्दी की गवाही ' अब इस भाषण को समझते हैं नेहा ने इसमें क्या कुछ कहा :
"नेहा ने 23 दिनों की भूख हड़ताल के बाद मंच से कहा यहां पर मौजूद छात्र के शरीर पर पड़े पुलिस के डंडों के निशान दहशतगर्दी की गवाही देंगे, इतिहास के पन्नों में दहशत,डर जैसे शब्द लिखे जाएंगे तब दिल्ली पुलिस को याद किया जाएगा, छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन और संसद मार्च के दौरान लाठीचार्ज के दौरान छात्रों के सर खोल दिए याद रखा जाएगा, अनशन स्थल पर टूटी दीवार दिल्ली पुलिस की करतूत की याद दिलाएगी, नेहा ने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री, गृह मंत्री , शिक्षा मंत्री किसी को अपने भाषण में नहीं बक्शा और कहा कि जो बची हुई जान हमारे अंदर छोड़ी वो सबसे बड़ी गलती है, आपकी हिंसा के गवाह कल गवाही देंगे हमारे सहस को याद रखा जाएगा।
हमें प्रेरित कौन करता है इसका जवाब भी सुन लीजिए हम फातिमा शेख, सावित्री माई जिन्होंने पूरे समाज की आलोचना झेली अपने शरीर पर पत्थर झेले ताकि समाज में शिक्षा की लौ जले वो हमारी प्रेरणा हैं,हम बाबा साहेब आंबेडकर से प्रेरणा लेते हैं, भगत सिंह से प्रेरणा लेते हैं। हिंसा करने वालों की कल भी हार हुई थी आज भी हार हो रही है।



















