सल्ट के पणचुरा गांव में सड़क का इंतजार: 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला को चारपाई पर ले जाना पड़ा अस्पताल
सड़क के इंतजार में पहाड़: 75 वर्षीय भागुली देवी को चारपाई पर ढोकर पहुंचाया अस्पताल
उत्तराखंड के सल्ट विकासखंड की जाख ग्रामसभा स्थित पणचुरा गांव में सड़क सुविधा का अभाव एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। विकास के दावों के बीच गांव की 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला Bhaguli Devi को उपचार के लिए ग्रामीणों ने चारपाई पर लिटाकर करीब तीन किलोमीटर पैदल सड़क तक पहुंचाया। दुर्गम पहाड़ी रास्तों से गुजरते हुए ग्रामीणों ने लगभग दो घंटे की कठिन मशक्कत के बाद उन्हें मुख्य सड़क तक पहुंचाया, जहां से आगे वाहन के माध्यम से इलाज के लिए ले जाया गया।
चोट के बाद लगातार बिगड़ती रही हालत
ग्रामीणों के अनुसार भागुली देवी कुछ महीने पहले घर के चबूतरे से गिरकर घायल हो गई थीं। चोट लगने के बाद उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाने की आवश्यकता थी, लेकिन गांव तक सड़क न होने के कारण समय पर उपचार नहीं मिल सका। मजबूरी में उनका इलाज घर पर ही चलता रहा और समय के साथ उनकी स्थिति कमजोर होती गई।
बेटों के आने पर हुआ अस्पताल ले जाने का फैसला
भागुली देवी अपने बुजुर्ग पति के साथ गांव में रहती हैं, जबकि उनके तीनों बेटे रोजगार के सिलसिले में बाहर रहते हैं। हाल ही में गांव में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के दौरान जब उनके बेटे घर पहुंचे और मां की बिगड़ती हालत देखी, तो बेहतर इलाज के लिए उन्हें अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया गया। इसके बाद ग्रामीणों और परिजनों ने मिलकर चारपाई के सहारे उन्हें सड़क तक पहुंचाने का अभियान शुरू किया।
ग्रामीणों के कंधों पर टिकी है जिंदगी
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। सड़क सुविधा के अभाव में गांव के बीमार लोगों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को अक्सर डंडी-कंडी या चारपाई के सहारे अस्पताल पहुंचाना पड़ता है।राशन, गैस सिलेंडर और अन्य जरूरी सामान लाने के लिए भी लोगों को लंबी पैदल दूरी तय करनी पड़ती है।
पलायन की बड़ी वजह बनी सड़क की कमी
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क न होने के कारण गांव के कई परिवार रोजगार और बेहतर सुविधाओं की तलाश में पलायन कर चुके हैं। गांव में अब अधिकांश बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे ही रह गए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले 26 वर्षों में सड़क जाख तक तो पहुंच गई, लेकिन उससे आगे मात्र तीन किलोमीटर दूर स्थित पणचुरा गांव आज भी सड़क संपर्क से नहीं जुड़ पाया है।
“सड़क नहीं तो वोट नहीं” का भी नहीं हुआ असर
सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीण वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं। पिछले पंचायत चुनाव में ग्रामीणों ने “सड़क नहीं तो वोट नहीं” का नारा देते हुए मतदान बहिष्कार तक किया था। इसके बावजूद अब तक सड़क निर्माण की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि चुनावी वादों के बावजूद उनकी समस्या जस की तस बनी हुई है।
विकास की तस्वीर पर सवाल
भागुली देवी को चारपाई पर ढोकर सड़क तक ले जाने की घटना केवल एक परिवार की परेशानी नहीं, बल्कि पहाड़ के उन सैकड़ों गांवों की हकीकत है जहां आज भी बुनियादी सुविधाएं लोगों की पहुंच से दूर हैं। ग्रामीणों ने एक बार फिर शासन-प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द सड़क निर्माण कार्य शुरू कर पणचुरा गांव को मुख्यधारा से जोड़ा जाए, ताकि भविष्य में किसी भी बीमार या बुजुर्ग व्यक्ति को ऐसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।
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