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देहरादून - घर वालों से पैसे मांगने में आती है शर्म - कई रह गए कुंवारे, बेरोजगार युवाओं ने सचिवालय किया कूच

"संघर्षों के साये में इतिहास हमारा पलता है,
जिस ओर जवानी चलती है, उस ओर ज़माना चलता है।" 

अक्सर छात्र संघ के चुनावों में सुनाई देने वाली ये आवाज इन दिनों देश की सड़कों पर सुनाई दे रही है, सोमवार को दिल्ली तो मंगलवार को देहरादून में युवाओं का हुजूम उमड़ पड़ा।बेरोजगार संघ के आव्हान पर आज सुबह देहरादून के परेड ग्राउंड पर सैंकड़ों युवा अपनी 12 सूत्रीय मांगों को लेकर पहुंचे ,युवाओं ने कुछ देर परेड ग्राउंड पर नारेबाजी कर सचिवालय के लिए कूच किया।

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नेशन वन की टीम ने परेड़ ग्राउंड पहुंचकर युवाओं से बातचीत की तो जाना कि कई युवा ऐसे हैं जो अब परिवार से खर्च मांगने पर भी झिझक रहे हैं, नौकरी ना होने के कारण कई युवा अविवाहित हैं, जैसे तैसे करके कमरे का किराया दे रहे हैं।अपनी जवानी को किराए के कमरों और आन्दोलनों में खपाने से युवा हताश हैं। 

बेरोजगार संघ के अध्यक्ष राम कंडवाल ने कहा कि सरकार बस कागजों में भर्तियां निकाल रही है अगर धरातल पर भर्तियां निकलती तो आज सड़कों पर युवा नजर नहीं आते।कंडवाल ने कहा कि केंद्र हो या फिर राज्य सरकार हो दोनों सरकारी युवाओं को ठगने का काम कर रही है. उन्होंने कहा कि सरकार ने बेरोजगारों के साथ 60 हजार भर्तियों को जारी किए जाने का वादा किया था, लेकिन यह वादा भी अब तक पूरा नहीं हो पाया है.

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कंडवाल ने कहा कि आज अन्य प्रदेशों से युवाओं को यहां लाया जा रहा है और उन्हें नौकरियां दी जा रही है, लेकिन राज्य के युवा रोजगार पाने के लिए धक्के खा रहे हैं. कंडवाल का कहना है कि अगर सरकार भर्तियों की विज्ञप्ति जारी कर दी थी तो बेरोजगारों को सड़कों पर उतर कर आंदोलन करने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता. बेरोजगार संघ ने बीते रोज दिल्ली में युवाओं के साथ हुए लाठी चार्ज की भी तीखी निंदा की है.

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उत्तराखंड बेरोजगार संघ के प्रदेश अध्यक्ष राम कंडवाल के नेतृत्व में सैकड़ों युवा सुबह परेड ग्राउंड में इकट्ठा हुए। वहां से जब युवाओं ने सचिवालय की तरफ पैदल मार्च निकाला, तो पुलिस ने सुभाष रोड पर बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया, जिसके बाद युवा वहीं सड़क पर धरने पर बैठ गए।

बेरोजगार संगठन की प्रमुख मांगें निम्नलिखित थीं:

  1. जेई और एई भर्ती: उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) द्वारा जूनियर इंजीनियर (JE) और असिस्टेंट इंजीनियर (AE) के पदों पर रुकी हुई भर्ती विज्ञप्ति को तुरंत जारी करना। 
  2. पुलिस भर्ती विज्ञप्ति: उत्तराखंड पुलिस में 1500 पदों पर भर्ती की नई विज्ञप्ति और उत्तराखंड महिला पुलिस सिपाही के 400 पदों पर तत्काल भर्ती प्रक्रिया शुरू करना। 
  3. पुलिस भर्ती वेटिंग लिस्ट: पूर्व में हुई पुलिस भर्ती की वेटिंग लिस्ट (प्रतीक्षा सूची) जारी करने की मांग।
  4. पारदर्शी परीक्षा कैलेंडर: साल 2026 के भीतर सभी लंबित परीक्षाओं को कराने के लिए एक स्पष्ट और नियमित भर्ती कैलेंडर जारी करना।
  5. पेपर लीक और धांधली पर रोक: भर्ती परीक्षाओं में होने वाली कथित अनियमितताओं व पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना। 
  6. 60 हजार नौकरियों का वादा: युवाओं का आरोप है कि सरकार ने पूर्व में राज्य में 60,000 सरकारी पदों को भरने का वादा किया था जो अभी तक अधूरा है।
  7. लोकसेवा आयोग अपना कैलेंडर तत्काल जारी करे। 

 

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