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Kanwar Yatra 2026 -हरिद्वार में यात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में, 4 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की आने की उम्मीद

हरिद्वार में इस समय 30 जुलाई से शुरू होने वाले ऐतिहासिक 'कांवड़ मेले' (कांवड़ यात्रा) की तैयारियां युद्ध स्तर पर चल रही हैं। जिला प्रशासन और पुलिस विभाग 25 जुलाई तक सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

चूंकि इस बार 4 करोड़ से भी अधिक शिवभक्तों के हरिद्वार पहुंचने की उम्मीद है, इसलिए प्रशासन सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर बेहद गंभीर है। वर्तमान में मुख्य रूप से निम्नलिखित तैयारियां की जा रही हैं: 

1. सुरक्षा और पुलिस गाइडलाइंस (एडवाइजरी) : 

सीसीटीवी नेटवर्क: हर की पौड़ी और सभी प्रमुख घाटों सहित पूरे मेला क्षेत्र में आधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं।

कांवड़ की ऊंचाई तय: बिजली के तारों से दुर्घटना रोकने के लिए सामान्य पैदल कांवड़ की ऊंचाई अधिकतम 6 फीट और झांकी वाली कांवड़ की ऊंचाई 10 फीट निर्धारित की गई है।

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2. बुनियादी सुविधाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर : 

घाट और पार्किंग व्यवस्था: श्रद्धालुओं के लिए शुद्ध पेयजल, नए शौचालय, ठहरने के लिए रैन बसेरे और स्वास्थ्य शिविर (मेडिकल कैंप) स्थापित किए जा रहे हैं। रोड़ी बेलवाला सहित प्रमुख पार्किंग स्थलों को दुरुस्त किया जा रहा है। 

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कांवड़ पटरी मार्ग: कांवड़ियों के चलने वाले विशेष रास्तों (कांवड़ पटरी) की मरम्मत, सफाई और लाइटिंग की व्यवस्था तेज कर दी गई है।

3. अंतरराज्यीय समन्वय और रूट डायवर्जन : 

उत्तराखंड सरकार ने उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की पुलिस के साथ बैठकें की हैं।

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ट्रैफिक प्लान: दिल्ली-मेरठ-मुजफ्फरनगर-हरिद्वार हाईवे (NH-34) पर भारी वाहनों और सामान्य यातायात के लिए रूट डायवर्जन प्लान तैयार किया जा रहा है ताकि कांवड़ियों को कोई असुविधा न हो।

राज्य सरकार इन तैयारियों को कुम्भ मेला 2027 के साथ जोड़कर (co-ordinate करके) देख रही है, ताकि जो भी इंफ्रास्ट्रक्चर अभी बने, उसका लाभ अगले साल होने वाले महाकुम्भ में भी मिल सके।

इन चीजों पर प्रतिबंध: मेले में तलवार, त्रिशूल, लाठी, डंडे, मॉडिफाइड साइलेंसर (पटाखा छोड़ने वाले) और नशे पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी।

 

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