भारत और जापान के बीच लॉक हुई करोड़ों की डील,AI,डिफेंस सहित आर्थिक और रणनीतिक समझौतों पर हुए हस्ताक्षर।
नई दिल्ली में आयोजित 16 वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मलेन में भारत और जापान के बीच आज कई बड़े आर्थिक और रणनीतिक समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्री मोदी (Narendra Modi )और जापान की प्रधानमंत्री Sanae Takaichi ने दोनों देशों के आर्थिक और तकनीकी सहयोग को अगले स्तर पर ले जाने का रोडमैप पेश किया।
इन क्षेत्रों में हुआ भारत और जापान के बीच समझौता :
1. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में बनी साझेदारी
- भारत की सॉफ्टवेयर क्षमता और जापान की एडवांस मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी को जोड़कर AI के क्षेत्र में संयुक्त रिसर्च और नए समाधान विकसित किए जाएंगे।
- दोनों देश AI के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग पर भी साथ काम करेंगे।
2. ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security)
- LNG (Liquefied Natural Gas), स्वच्छ ऊर्जा और बायोगैस परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
- भारत में करीब 1,000 बायोगैस और ऑर्गेनिक फर्टिलाइज़र प्लांट स्थापित करने की संयुक्त पहल शुरू की जाएगी।
3. क्रिटिकल मिनरल्स और मेटल्स।
- सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बैटरी और हाई-टेक उद्योगों के लिए जरूरी लिथियम, निकेल और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन मजबूत करने पर समझौता हुआ।
- इसका उद्देश्य चीन पर निर्भरता कम करना और वैकल्पिक सप्लाई नेटवर्क बनाना है
4. आर्थिक सुरक्षा (Economic Security)
- दोनों देशों ने सप्लाई चेन को अधिक सुरक्षित और मजबूत बनाने का साझा रोडमैप जारी किया।
- खासकर सेमीकंडक्टर, हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और महत्वपूर्ण उद्योगों में सहयोग बढ़ाया जाएगा।
5. रक्षा क्षेत्र में नई शुरुआत
भारत और जापान ने अपने पहले संयुक्त रक्षा सह-विकास (Co-development) प्रोजेक्ट पर भी समझौता किया।
इससे रक्षा तकनीक और रणनीतिक साझेदारी को नई गति मिलेगी
व्यापार और निवेश पर बड़ा ऐलान
- जापान ने भारत में 10 अरब डॉलर (लगभग ₹83,000 करोड़) के नए निवेश की योजना का ऐलान किया।
- दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2025–26 में लगभग 27.5 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।
- जापान पहले से भारत की हाई-स्पीड रेल, मैन्युफैक्चरिंग और बैंकिंग जैसे क्षेत्रों में बड़ा निवेशक है
भारत के लिए इस डील के मायने।
- AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर में नए निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
- EV, ग्रीन एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग उद्योगों को फायदा मिलेगा।
- भारत की वैश्विक सप्लाई चेन में भूमिका और मजबूत होगी।
- जापानी कंपनियों के लिए भारत निवेश का और बड़ा केंद्र बन सकता है।
यह समझौता केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि भारत की टेक्नोलॉजी, ऊर्जा और मैन्युफैक्चरिंग अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण बिज़नेस डेवलपमेंट माना जा रहा है।
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