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MP : पत्रकारिता के नाम पर ब्लैकमेलिंग का धंधा: डॉक्टरों को फंसाने वाले मास्टरमाइंड विनय अरोरा की जमानत खारिज

देवास।मध्य प्रदेश के देवास शहर में निजी डॉक्टरों और नर्सिंग होम संचालकों को डरा-धमकाकर लाखों रुपये ऐंठने वाले एक शातिर अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। यह गिरोह डॉक्टरों के पास जाकर जबरन गैर-कानूनी काम करने का दबाव बनाता था और छिपकर उनकी वीडियो रिकॉर्डिंग कर लेता था। बाद में खुद को बड़ा पत्रकार बताकर (PTI प्रमुख ) बताकर वीडियो वायरल करने और जेल भिजवाने के नाम पर लाखों रुपये की वसूली (उगाही) करता था। इस मामले के मुख्य आरोपी, देहरादून निवासी विनय अरोरा की गिरफ्तारी से बचने के लिए लगाई गईं दो अलग-अलग अग्रिम जमानत अर्जियों को देवास कोर्ट (पंचम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अभिषेक गौड़) ने सिरे से खारिज कर दिया है।

अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मीडिया और प्रेस के नाम पर संगठित रूप से डॉक्टरों को ब्लैकमेल करने और डराकर पैसा वसूलने का बेहद गंभीर मामला है।

महिलाओं को आगे कर ऐसे बिछाते थे जाल :

पुलिस जांच में सामने आया है कि इस गिरोह में महिलाएं और खुद को पत्रकार बताने वाले पुरुष शामिल हैं, जो बेहद चालाकी से काम करते थे.गिरोह इतना संगठित तरीके से काम करता था मानो वो सचमुच का मरीज हो गिरोह की महिला सदस्य (मरीज या नर्स बनकर) और उनके पुरुष साथी देवास के नामी डॉक्टरों के पास जाते थे।

पहले से ही तीन बेटियां होने का हवाला देकर और परिजनों के पुत्र की मांग को लेकर दबाव कहकर डॉक्टरों पर अवैध रूप से गर्भपात (Abortion) करने या पेट में पल रहे बच्चे का लिंग टेस्ट करने का भारी दबाव बनाते थे।

जब डॉक्टर उनसे बातचीत कर रहे होते थे, तभी गिरोह के लोग हिडन कैमरे (गुप्त कैमरे) से पूरी बातचीत की वीडियो रिकॉर्डिंग कर लेते थे।

इसके बाद गिरोह के मुख्य सदस्य डॉक्टरों को वह एडिटेड (कांट-छांट की हुई) वीडियो दिखाकर डराते थे कि उनके पास आपकी अवैध गतिविधियों का स्टिंग ऑपरेशन है। मामला रफा-दफा करने के लिए डॉक्टरों से लाखों रुपये मांगे जाते थे।

पहला शिकार: श्रीराम नर्सिंग होम से 15 लाख की मांग : 

किस्सा: गिरोह की महिला सदस्य शरीफा और सिमरन अपने साथी राजवीर (विनय अरोरा) के साथ श्रीराम नर्सिंग होम पहुंचीं। उन्होंने वहां की महिला डॉक्टरों पर तीन बेटियां होने का हवाला देकर जबरन गर्भपात कराने का दबाव डाला, लेकिन डॉक्टरों ने साफ मना कर दिया।

वीडियो वायरल करने की धमकी पर वसूली का खेल : इसके बाद खुद को पत्रकार बताने वाले राजेश धनेचा और उसके दो साथी एक जो खुद को PTI प्रमुख और दूसरा तहलका डॉटकॉम का प्रमुख बताता था ने डॉक्टरों को एक एडिटेड वीडियो दिखाया। वीडियो को दबाने और पुलिस-प्रशासन को न देने के बदले डॉक्टरों से 15 लाख रुपयेकी मांग की गई और मना करने पर बदनामी की धमकी दी गई।

पुलिस व कोर्ट की कार्रवाई: डॉक्टरों की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज किया.विनय अरोरा ने खुद को बीमार और बुजुर्ग बताकर जमानत की अर्जी डाली थी और खुद को एक सच्चा पत्रकार बताकर भ्रूण हत्या के मामले उजागर करने वाला पत्रकार बताया.कोर्ट ने आरोपी विनय अरोरा की जमानत अर्जी को खारिज करते हुए उसे राहत देने से इनकार कर दिया।

ये गिरोह यहीं नहीं रुका और इसने दूसरा शिकार माहेश्वरी नर्सिंग होम को बनाया और 10 लाख रुपये वसूल भी लिए : 

किस्सा: गिरोह ने इसी तरह माहेश्वरी नर्सिंग होम के डॉक्टरों का भी एक फर्जी सीक्रेट वीडियो तैयार किया। इसके बाद आरोपी राजेश धनेचा और श्रीकांत उपाध्याय ने डॉक्टरों को डराया कि दिल्ली की विजिलेंस और स्वास्थ्य विभाग की बड़ी टीम आई है और आपका अस्पताल तुरंत सील कर दिया जाएगा।

मोटी वसूली: अस्पताल बचाने और मामला रफा-दफा करने के लिए पहले 21 लाख रुपये मांगे गए, जो बाद में 16 लाख रुपये में तय हुए। डर के मारे डॉक्टर ने आरोपियों को10 लाख रुपयेनकद दे भी दिए थे।

आरोपी की दलील: पकड़े जाने के डर से मुख्य आरोपी विनय अरोरा ने कोर्ट में दावा किया कि वह तो एक सच्चा पत्रकार है और समाज की भलाई के लिए भ्रूण हत्या के खिलाफ खोजी पत्रकारिता (Sting Operation) कर रहा था।साथ ही उसने अपनी उम्र और बीमारी का हवाला भी दिया था. 

कोर्ट का झटका: कोर्ट ने आरोपी की दलील को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि यह पत्रकारिता नहीं, बल्कि पत्रकारिता के नाम पर किया जा रहा संगठित अपराध है। कोर्ट ने उसकी इस दूसरी जमानत अर्जी को भी ठुकरा दिया

जांच जारी, कई आरोपी अभी भी फरार : 

अदालत ने जमानत याचिकाएं निरस्त करते हुए साफ कहा कि सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल कॉल रिकॉर्ड से साफ पता चलता है कि डॉक्टरों को फंसाने के लिए एक पूरा नेटवर्क काम कर रहा था। आरोपी विनय अरोरा का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी रहा है। चूंकि मामला अभी शुरुआती जांच में है, फ़िलहाल सह आरोपी श्रीकांत उपाध्याय की कार से 3.5 लाख रुपए जब्त कर लिए गए हैं जिसमें दो लाख एक मामले के और डेढ़ लाख एक मामले से वसूली गई रकम है. गिरोह के कुछ अन्य सदस्य अब भी फरार हैं, इसलिए आरोपी को कोई राहत नहीं दी जा सकती। कोतवाली पुलिस अब फरार आरोपियों और गिरोह के अन्य मददगारों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।

संलग्न : "अदालती आदेश - विनय अरोरा अग्रिम जमानत याचिका (देवास कोर्ट)"

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