सरकार ने मानी CJP की तीनों मांगे, दिल्ली जंतर मंतर पर आंदोलन ख़त्म करने का ऐलान
पिछले एक महीने से दिल्ली का जंतर मंतर चर्चा का केंद्र रहा,देशभर में लोग जंतर मंतर की हर अपडेट को लेकर उत्सुक नजर आए,आख़िरकार आज 25 जुलाई अब इतिहास में यादगार दिन बन गया,जब देश के युवाओं ने अपने भविष्य के लिए देश के शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेकर ही दम लिया,मोदी सरकार में ये पिछले 12 साल में दूसरा इस्तीफा है।
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CJP आंदोलन में कब क्या हुआ :
दिल्ली के जंतर मंतर पर पिछले 37 दिनों से CJP (Cockroach Janta Party ) का नीट पेपर लीक के विरोध में दो सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन चल रहा था,20 जुलाई के बाद इसमें एक और मांग जुड़ गई। 6 जून को जंतर मंतर पर पहला प्रदर्शन हुआ और धीरे -धीरे इसमें देशभर के युवा जुड़ते गए ,सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक भूख हड़ताल की इसके साथ ही आइसा छात्र संगठन के लोग भी 23 दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठे।
20 जुलाई को मानसून सत्र का पहला दिन था और इसी दिन CJP ने चलो संसद का आव्हान किया,और इसी दिन सुबह सोनम वांगचुक(Sonam Wangchuk) को जबरन अस्तपाल ले जाने के लिए उठाया गया इस दौरान पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज किया जिसके बाद ये आंदोलन देशव्यापी बन गया, राजनैतिक पार्टियों ने सड़क पर उतरकर छात्रों को खुलकर समर्थन दिया।
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और अब आखिरकार 25 जुलाई को छात्रों की बड़ी जीत हुई दोपहर को शिक्षा मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफ़ा सौंपा और शाम होते ही CJP और सरकार की साझा प्रेस वार्ता में ये ऐलान हुआ कि सरकार ने छात्रों की तीनों मांगें
1 : शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान(Dharmendra Pradhan) का इस्तीफ़ा
2 : नीट पेपर लीक रद्द होने पर आत्महत्या करने वाले छात्र -छात्राओं को 1-1 करोड़ का मुआवजा
3 : छात्रों पर हुई एफआईआर रद्द की जाएं।
CJP प्रवक्ताओं ने प्रेस वार्ता में कहा कि सरकार ने सभी मांगें मान ली हैं हम आंदोलन समाप्त करने का ऐलान करते हैं,सभी युवा अपने -अपने घर को लौट जाएं ,साथ ही आज शाम CJP ने पूरे देश में आत्महत्या करने वाले छात्रों के लिए कैंडल मार्च निकालने की भी अपील की है।CJP प्रवक्ता सौरव दास ने आगे कहा कि, इसके अलावा, हमने सरकार के सामने एक पांच सूत्री मांग पत्र भी रखा, जिसमें व्यापक शैक्षिक सुधारों और परीक्षा सुधारों के बारे में बात की गई थी। हम उस मांग पत्र के संबंध में लगभग चार सप्ताह में सरकार से फिर मिलेंगे ताकि हम व्यापक सुधारों पर मिलकर काम कर सकें। यदि सरकार इन सभी मांगों पर सहमत होती है, तो हम आंदोलन वापस लेना भी चाहेंगे।



















