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लोकल से ग्लोबल हुआ डिजिटल इंडिया: UPI के 10 साल पूरे, 11 देशों तक पहुंची पहुंच; हर दिन 66 करोड़ का लेनदेन

भारत में UPI एक डिजिटल क्रांति बनकर उभरा है, मंगलवार को UPI ( Unified Payment Interface ) लॉन्च होने के 10 साल पूरे हो गए हैं. महज एक दशक में ही ये 11 देशों तक पहुंच चुका है और वैश्विक लेनदेन में 49 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है.इस खबर में जानिए इन 10 सालों में इस क्रांति से क्या-क्या बदला।

आज हर कोई डिजिटल पेमेंट के लिए UPI का इस्तेमाल करता है यानि आप जब चाहो तब पैसों का लेन-देन कर सकते हैं.इससे समय की बचत तो होती ही है.आकस्मिक हालातों में ये और भी कारगर साबित होता है.आज छोटी से छोटी दुकानों पर भी डिजिटल लेनदेन होता है.

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इसके लॉन्च के 10 साल पूरे होने पर, पीएम मोदी ने कहा कि UPI ने जो पैमाना और पहुंच हासिल की है, वह हर भारतीय के लिए गर्व की बात है। उन्होंने लोगों से अपने अनुभव साझा करने को कहा कि कैसे इस डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म ने उनके जीवन पर असर डाला है।पीएम ने एक्स पर पर लिखा, 'एक दशक पहले UPI शुरू किया गया था, जो भारत की डिजिटल पेमेंट यात्रा में एक बड़ा मोड़ साबित हुआ। UPI का पैमाना और पहुंच ऐसी है जिस पर हर भारतीय को गर्व होना चाहिए।'

10 सालों में कितना बढ़ा ट्रांजैक्शन ?

UPI को 25 अगस्त 2016 को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की देखरेख में नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने लॉन्च किया था। तब से यह भुगतान प्रणाली भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम का एक अहम हिस्सा बन गया।

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10 सालों में 13000 गुना बढ़ोतरी : 

पिछले 10 सालों में UPI के जरिए होने वाले ट्रांजैक्शन की संख्या और उनकी वैल्यू दोनों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। सालाना ट्रांजैक्शन जहां 2016-17 में 1.78 करोड़ था अब बढ़कर 2025-26 में 24,162 करोड़ से ज्यादा हो गया है जो लगभग 13000 गुना की बढ़ोतरी है।

वैल्यू में 4000 गुना बढ़ोतरी : 

ट्रांजैक्शन की संख्या ही नहीं, बल्कि इसके जरिए होने वाले भुगतान की कुल रकम में भी जबरदस्त इजाफा हुआ है। 2016-17 में UPI के जरिए करीब ₹0.07 लाख करोड़ का लेनदेन हुआ था, जो 2025-26 में बढ़कर लगभग ₹314 लाख करोड़ हो गया।

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जुलाई महीने में टूटा रिकॉर्ड : 

 

UPI की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। मई 2026 में पहली बार एक महीने में 2,366 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए। मई में 2,320 करोड़ और जुलाई 2026 में 2,366 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जो UPI के एक दशक के सफर में अब तक का सबसे बड़ा मासिक आंकड़ा है।

UPI से जुड़े बैंकों की संख्या में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। 2016-17 में सिर्फ 44 बैंक UPI पर लाइव थे। वित्त वर्ष 2025-26 तक यह संख्या बढ़कर 703 बैंक हो गई।

11 देशों में भी पहुंचा UPI

UPI अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। यह UAE, फ्रांस, भूटान, श्रीलंका, नेपाल, सिंगापुर, मॉरीशस, कतर, कंबोडिया, ग्रीस और मालदीव समेत 11 देशों में संचालित हो रहा है। IMF के अनुसार, 2025 में वैश्विक रियल-टाइम पेमेंट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में UPI की हिस्सेदारी करीब 49 फीसदी थी। इस तरह 10 साल में UPI भारत की डिजिटल पहचान के साथ-साथ दुनिया के प्रमुख रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम में भी अपनी जगह बना चुका है।

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UPI के 10 साल का सफर कुछ ऐसा रहा : 

 

UPI को 25 अगस्त 2016 को RBI की देखरेख में NPCI ने लॉन्च किया था।

आज के समय में 94 प्रतिशत से ज्यादा छोटे दुकानदार UPI का इस्तेमाल कर रहे हैं।

जुलाई 2026 में ही 2366 से ज्यादा करोड़ का ट्रांजैक्शन UPI से हुआ है।

UPI लॉन्च होने के एक महीने बाद हुए थे सबसे ज्यादा ट्रांजैक्शन

UPI से 81 करोड़ से ज्यादा पेमेंट पॉइंट्स पर होता है भुगतान।

साल 2018 में पेमेंट पॉइंट्स की संख्या महज 31 लाख थी

भारत के अलावा 11 अन्य देशों ने भी अपनाया UPI (फ्रांस, सिंगापूर UAE और मॉरिशस भी शामिल)

दुनिया में हर दूसरे रियल टाइम डिजिटल पेमेंट में से एक भारत में होता है।

2016-17 में 1.78 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में 24,162 करोड़ से ज्यादा सालाना ट्रांसेक्शन हो गया

शुरुआत में 0.07 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 314 लाख करोड़ रुपये हो गई ट्रांजैक्शन की वैल्यू

UPI के फायदे अनेक तो नुकसान भी कम नहीं : 

वित्त वर्ष 2023-24 में UPI फ्रॉड के 13.42 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए थे, वहीं वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा करीब 12.64 लाखरहा। वर्तमान वित्त वर्ष (2025-26) में ही अब तक 16 लाख से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। 

इन धोखाधड़ी के कारण सिर्फ वित्त वर्ष 2024-25 में आम जनता को 981 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जो 2025-26 में बढ़कर 1,200 करोड़ रुपये को पार कर चुका है।

UPI खुद असुरक्षित नहीं है बल्कि ठग लोगों को भावनात्मक रूप से लोगों को झांसे में लेकर ठगी करते हैं क्योंकि पैसे पाने के लिए कभी भी पिन नहीं डालना होता सरकार इसके लिए जागरूकता अभियान भी चलाती है लेकिन  ठगी करने वाले नए-नए तरीके ढूंढ ही लेते हैं।

सावधान रहें सुरक्षित रहें, मेहनत की कमाई पर कोई डाका ना डाले उसका ध्यान रखें ! 

 

 

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