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पथराव और लाठीचार्ज के बाद उत्तरकाशी में 3 दिन बाद खुला बाजा़र
उत्तरकाशी में करबी 55 साल पुरानी मस्जिद हो हटाने को लेकर विवाद छिड़ गया था। वहीं शहर में मस्जिद के खिलाफ एक समुदाय के धार्मिक संगठन की जनाक्रोश रैली को हल्के में लेना पुलिस प्रशासन को काफर भारी पड़ गाया। आपको बता दें कि पुलिस ने 8 नामजद और 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जानिए उत्तरकाशी में क्या हैं हालात उत्तरकाशी में पथराव और लाठीचार्ज की घटना के बाद आज तीसरे दिन बाज़ार खुले। प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल की जिला हकाई के अध्यक्ष सुभाष बडोनी ने गंगा यमुना घाटी के व्यापारियों की एकजुटता के लिए उंनकी सराहना की है। इसके साथ ही दिवाली के त्यौहार को देखते हुए आज से दिवाली तक सभी इकाईयों में साप्ताहिक बंदी पर अपने प्रतिष्ठान खुला रखने को कहा गया है। आपको बता दें कि शहर में मस्जिद को लेकर विवाद की शुरूआत दो महीने पहले उस समय हुई जब एक समुदाय के धार्मिक संगठन ने करीब ने करीब 2 नाली ज़मीन पर बनी मस्जिद को अवैध बताते हुए र्मोचे की शुरूआत हुई। आरटीआई से मिली जानकारी से संगठन ने बताया अवैध एक समुदाय के धार्मिक संगठन ने मस्जिद को अवैध बताते हुए जिला प्रशासन से इस संबंध में सूचनाधिकार में जानकारी मांगी थी। हालांकि बाद में जिला प्रशासन ने अधूरी जानकारी देने की बात कही। इस बीच दूसरे समुदाय के लोगों ने भी मस्जिद के संबंध में ज़मीन से जुड़े दस्तावेज़ जिला प्रशासन का सौंपी। जिसके बाद कुछ समय के लिए बढता विवाद खत्म हो गया था। लेकिन अक्टूबर में प्रस्तावित जनाक्रोश रैली का समय नज़दीक आते ही ये विवाद दोबारा से बढ़ने लगा जिसक बसद गत 21 अक्टूबर को जिला प्रशासन ने दोबारा एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मस्जिद को सरकारी भूमि पर अैध रूप से बने होने की भ्रामक जानकारी प्रस्तारित करने को लेकर स्थ्तिी स्पष्ट की। वहीं इस पूरे मामले में प्रशासन का कहना था कि ये मस्जिद किसी सरकारी ज़मीन पर नहीं बल्कि निजी ज़मीन पर निर्मित है। जो उत्तरप्रदेश सरकार के मुस्लिम वक्फ विभाग के सरकारी गजट में भी अनुसूचित है लेकिन लगातार विरोध कर रहे संगठन इस बात को मानने से साफ इंकार कर रहे हैं। यह भी पढ़े - बेटियों के जन्म से लेकर 21 साल तक मिलेगा वित्तीय लाभ

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