जिन बच्चों का गीत सुनकर राष्ट्रपति हुई थी भावुक, NIEPVD Dehradun के वही दृष्टि बाधित छात्र एक सप्ताह से धरने पर
देहरादून स्थित राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (NIEPVD) के मॉडल स्कूल के कक्षा 9 से 12 तक के सैकड़ों दृष्टिबाधित छात्र अपनी बुनियादी मांगों और सुविधाओं को लेकर अगस्त 2026 से बड़े पैमाने पर हड़ताल और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।ये वही बच्चे हैं जिन्होनें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के जन्मदिन पर गीत गाया था जिसे सुनकर राष्ट्रपति भी भावुक हो गई थी।
NIEPVD के छात्र गत एक सप्ताह से धरने पर बैठे हैं, छात्रों का सबसे बड़ा आरोप है कि संस्थान में कोई स्थायी निदेशक (Permanent Director) नियुक्त नहीं है। वर्तमान प्रभारी निदेशक का मुख्य कार्यालय नई दिल्ली में है, जिसके कारण छात्रों की रोजमर्रा की समस्याओं पर समय रहते सुनवाई नहीं होती। प्रशासन के साथ हुई दो दौर की वार्ताएं विफल होने के बाद छात्रों ने इस आंदोलन को और तेज कर दिया है तथा मांगे पूरी न होने पर भूख हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है।
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पूर्व में 12वीं पास करने के बाद छात्रों को उच्च शिक्षा और पुनर्वास के लिए 5 साल तक संस्थान की ओर से छात्रवृत्ति मिलती थी। पिछले 2-3 वर्षों से इसे बंद कर दिया गया है, जिसे छात्र तुरंत बहाल करने की मांग कर रहे हैं।
संस्थान द्वारा छात्रों को डिजिटल पढ़ाई के लिए लैपटॉप देने का वादा किया गया था, जो लंबे समय से लंबित है। अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों के लिए ब्रेल पुस्तकों की भारी कमी है। छात्रों की मांग है कि उन्हें पढ़ाई के लिए आवश्यक सामग्री औरकिताबें उचित एवं सस्ती दरों पर उपलब्ध कराई जाएं।
हॉस्टल मेस और स्कूल कैंटीन मेंखराब खाने की गुणवत्ता, प्राथमिक कक्षाओं में ब्रेल शिक्षकों की कमी, और डिस्पेंसरी में स्टाफ द्वारा कथित दुर्व्यवहार को लेकर छात्रों में भारी आक्रोश है।
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छात्रों के बढ़ते विरोध को देखते हुए संस्थान के प्रभारी निदेशक (प्रदीप ए.) ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की कार्यकारी परिषद को पत्र लिखकर कुछ मुद्दों पर कदम उठाने की बात कही है।
प्रबंधन ने लैपटॉप के लिए ₹48 लाख की राशि स्वीकृत होने का दावा किया है और इसे नवंबर तक वितरित करने का भरोसा दिया है।
स्कॉलरशिप को फिर से शुरू करने पर सहमति बनी है, लेकिन इसमें एक शर्त रखी गई है कि छात्र या तो संस्थान की स्कॉलरशिप चुन सकते हैं या नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) की, जिसे छात्रों ने खारिज कर दिया है।
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इसके अलावा, विवादों के घेरे में आईं हॉस्टल वार्डन को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। छात्रों का कहना है कि वे केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होंगे और जब तक ठोस लिखित आदेश और स्थायी प्रशासनिक सुधार नहीं होते, उनका आंदोलन लगातार जारी रहेगा।



















