साकेत बिल्डिंग हादसा: दिल्ली में इमारत गिरने से 4 की मौत, 10 घायल, मकान मालिक पर केस दर्ज
दिल्ली के साकेत में इमारत गिरने से 4 की मौत, 10 घायल: सातवीं मंजिल निर्माण के दौरान हुआ बड़ा हादसा, मलबे में दबे लोगों को स्थानीय लोगों ने बचाया
Saket Building Collapse: दक्षिण दिल्ली में बड़ा हादसा, 4 लोगों की मौत
दक्षिण दिल्ली के साकेत इलाके में शनिवार रात एक दर्दनाक हादसे ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। वेस्टर्न मार्ग स्थित गली नंबर-5 में एक बहुमंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई, जिससे चार लोगों की मौत हो गई जबकि 10 अन्य घायल हो गए। हादसा उस समय हुआ जब इमारत की सातवीं मंजिल की छत ढालने की तैयारी चल रही थी। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और राहत-बचाव कार्य तत्काल शुरू किया गया।
पुलिस के अनुसार, हादसे में घायल हुए लोगों में तीन महिलाएं और सात पुरुष शामिल हैं। गंभीर रूप से घायल लोगों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। घटना के बाद पुलिस ने मकान मालिक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया गया है।
कैसे हुआ हादसा?
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शनिवार शाम अचानक तेज आवाज के साथ इमारत का एक हिस्सा गिरना शुरू हुआ और देखते ही देखते पूरी संरचना ध्वस्त हो गई। हादसे का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें इमारत को कुछ ही सेकंड में जमीन पर गिरते देखा जा सकता है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह एक कमर्शियल बिल्डिंग थी, जिसकी पहली और दूसरी मंजिल पर कई निजी कार्यालय संचालित हो रहे थे। इमारत के पास बने एक प्लॉट पर मेडिकल छात्रों के लिए रसोई और कैंटीन भी संचालित की जा रही थी। इमारत गिरने के दौरान उसका मलबा सीधे इस रसोई पर गिरा, जिसके कारण वहां मौजूद कई लोग इसकी चपेट में आ गए।
14 लोगों को मलबे से निकाला गया
दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) और स्थानीय प्रशासन ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चलाया। रविवार सुबह तक मलबे से कुल 14 लोगों को बाहर निकाला जा चुका था। सभी घायलों को एम्स ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया, जहां चार लोगों को मृत घोषित कर दिया गया। मृतकों में एक युवक की पहचान 26 वर्षीय रवि के रूप में हुई है। अन्य मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।
घायलों की पहचान
हादसे में घायल हुए लोगों में निम्न नाम शामिल हैं:
- तरुण कुमार (26 वर्ष), गुरुग्राम
- साइका खान (27 वर्ष), बिहार
- नीलम यादव (25 वर्ष), सैदुल्लाजाब
- आदित्य शर्मा (24 वर्ष), सैदुल्लाजाब
- क्षितिज प्रताप (25 वर्ष), नोएडा
- अनुज दीक्षित (25 वर्ष), साकेत
- आस्था (25 वर्ष), सैदुल्लाजाब
- विशाल (24 वर्ष), साकेत
पुलिस के अनुसार अधिकांश घायल मेडिकल छात्र हैं, जो पास स्थित कैंटीन में भोजन कर रहे थे। कुछ लोग इमारत के अंदर भी मौजूद थे जब यह हादसा हुआ।
मकान मालिक पर मामला दर्ज
हादसे की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मकान मालिक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि इमारत के निर्माण संबंधी दस्तावेज, मंजूरी और संरचनात्मक सुरक्षा मानकों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या भवन निर्माण नियमों का उल्लंघन किया गया था या अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण बिना अनुमति के किया जा रहा था। यदि नियमों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
धूल का गुबार छंटते ही मदद के लिए दौड़े स्थानीय लोग
हादसे के बाद का दृश्य बेहद भयावह था। इमारत गिरने के कुछ मिनटों तक पूरे क्षेत्र में धूल का घना गुबार छाया रहा। चारों तरफ चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल था। लेकिन इसी दौरान स्थानीय लोगों ने जिस साहस और मानवता का परिचय दिया, उसकी हर तरफ सराहना हो रही है।
जैसे ही लोगों को समझ आया कि इमारत गिर गई है, आसपास के निवासी अपनी जान की परवाह किए बिना मलबे की ओर दौड़ पड़े। उस समय तक न तो पुलिस पहुंची थी और न ही दमकल विभाग। मलबे के अंदर से दबे लोगों की आवाजें सुनाई दे रही थीं। कोई मदद के लिए पुकार रहा था तो कोई दर्द से कराह रहा था।
स्थानीय लोगों ने बचाईं कई जिंदगियां
स्थानीय युवाओं ने अपने हाथों से ईंटें हटानी शुरू कर दीं। कुछ लोगों ने लोहे की सरियों को हटाकर रास्ता बनाने की कोशिश की। आसपास के घरों और दुकानों से फावड़े, रॉड और टॉर्च मंगाए गए। स्थानीय निवासी जगदीश ने बताया कि उस समय किसी को अपनी सुरक्षा की चिंता नहीं थी। सभी का लक्ष्य सिर्फ मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालना था।राहत एजेंसियों के पहुंचने से पहले ही स्थानीय लोगों ने तीन लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। घायल बाहर निकलते ही दर्द से कराह रहे थे, लेकिन जीवित बचने की राहत उनके चेहरों पर साफ दिखाई दे रही थी।
कैंटीन में खाना खा रहे थे छात्र
सैदुल्लाजाब और आसपास के क्षेत्रों की कमेटी के प्रधान रविंद्र सिंह ने बताया कि इमारत में विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं। यहां कॉफी हाउस, कैफे, कोचिंग सेंटर, पीजी और कैंटीन चल रही थीं।हादसे के समय कई छात्र कैंटीन में भोजन कर रहे थे। इसी वजह से मलबे में अधिक लोगों के दबे होने की आशंका जताई गई थी। हालांकि राहत दल लगातार तलाशी अभियान चला रहा है ताकि किसी भी संभावित व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
जांच में जुटी एजेंसियां
दिल्ली पुलिस, नगर निगम और अन्य संबंधित एजेंसियां अब हादसे के कारणों की जांच कर रही हैं। विशेषज्ञों की टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इमारत गिरने की असली वजह क्या थी। निर्माण गुणवत्ता, भवन की उम्र, अतिरिक्त मंजिलों का भार और सुरक्षा मानकों के पालन जैसे सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा और जांच रिपोर्ट आने के बाद उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
दिल्ली में भवन सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
साकेत में हुई इस घटना ने एक बार फिर राजधानी में निर्माणाधीन और पुरानी इमारतों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार बढ़ते शहरीकरण और अवैध निर्माण की शिकायतों के बीच यह हादसा प्रशासन के लिए भी बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमित भवन सुरक्षा ऑडिट और निर्माण कार्यों की निगरानी आवश्यक है ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके।
Watch Video
Watch the full video for more details on this story.











