वेब स्टोरी

धुरंधर 2 रिव्यू: रणवीर सिंह की दमदार एक्टिंग के बावजूद कमजोर पड़ी कहानी

धुरंधर 2 रिव्यू: हाइप बड़ी, कहानी थोड़ी फीकी, रणवीर सिंह ने संभाली फिल्म

फिल्म धुरंधर 2 को लेकर शुरुआत से ही जबरदस्त हाइप बनी हुई थी। दर्शक इसके दूसरे पार्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे और मेकर्स को भी इस बात का पूरा भरोसा था कि यह फिल्म पहले पार्ट की तरह ही धमाल मचाएगी।

हालांकि, रिलीज से पहले ही फिल्म को झटका तब लगा जब देशभर के कई शहरों में इसके प्रीव्यू शोज कैंसल हो गए, जिससे फैंस निराश हुए। इसके बावजूद जिन दर्शकों को फिल्म देखने का मौका मिला, उनके मन में सबसे बड़ा सवाल यही था—क्या यह फिल्म उम्मीदों पर खरी उतरती है?

कहानी: बदले की कहानी, लेकिन बिना दमदार पकड़

फिल्म की कहानी जसकीरत सिंह रांगी के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका किरदार रणवीर सिंह ने निभाया है। कहानी छह चैप्टर में बंटी हुई है और इसकी शुरुआत फ्लैशबैक से होती है, जहां जसकीरत और उसके परिवार के साथ हुए अन्याय को दिखाया जाता है।

परिस्थितियां उसे बंदूक उठाने पर मजबूर करती हैं और बदले की आग में वह एक एमएलए के घर में घुसकर खून-खराबा करता है। इसके बाद उसे उम्रकैद की सजा मिलती है।

कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब आईबी डायरेक्टर अजय सान्याल (आर माधवन) उसे देश के लिए काम करने का मौका देते हैं। जसकीरत पाकिस्तान में हमजा अली मजारी बनकर एक मिशन पर निकलता है। फिल्म आगे बढ़ती है और कहानी रहमान डकैत की मौत के बाद की घटनाओं पर केंद्रित हो जाती है। हालांकि प्लॉट दिलचस्प है, लेकिन इसकी प्रस्तुति उतनी कसावट भरी नहीं लगती।

एक्टिंग: रणवीर सिंह का वन-मैन शो

पूरी फिल्म में अगर कोई सबसे ज्यादा प्रभाव छोड़ता है तो वो हैं रणवीर सिंह। गुस्सा, एक्शन और इमोशंस—हर सीन में उनका प्रदर्शन दमदार है। अर्जुन रामपाल को इस बार ज्यादा स्क्रीन स्पेस मिला है, लेकिन उनका किरदार उतना खतरनाक नहीं बन पाया। वहीं संजय दत्त का रोल सीमित है और वे खास प्रभाव नहीं छोड़ पाते। आर माधवन जब-जब स्क्रीन पर आते हैं, फिल्म में जान आ जाती है। उनका किरदार इस पार्ट में और मजबूत नजर आता है। राकेश बेदी सरप्राइज पैकेज साबित होते हैं और क्लाइमैक्स में दर्शकों को प्रभावित करते हैं।

डायरेक्शन और स्क्रीनप्ले: रिसर्च अच्छी, लेकिन कसावट की कमी

फिल्म का निर्देशन आदित्य धर ने किया है। उनकी रिसर्च और डिटेलिंग काबिले तारीफ है। फिल्म में नोटबंदी, अतीक अहमद और दाऊद इब्राहिम जैसे तत्वों को जोड़ने की कोशिश दिलचस्प है। लेकिन जहां पहले पार्ट में कहानी टाइट और सरप्राइज से भरी थी, वहीं इस बार स्क्रीनप्ले ढीला नजर आता है। कई सीन पहले से प्रेडिक्टेबल लगते हैं और फिल्म की लंबाई (लगभग 4 घंटे) भी इसे भारी बना देती है।

म्यूजिक और एक्शन

फिल्म के एक्शन सीन अच्छे हैं, लेकिन कुछ जगहों पर उन्हें जबरन लंबा खींचा गया है। गानों की बात करें तो एक-दो गानों को छोड़कर कोई भी खास याद नहीं रहता। एक रोमांटिक गाना तो पूरी तरह से जबरदस्ती डाला हुआ लगता है।

क्या है कमी?

  • फिल्म बहुत लंबी है

  • कहानी में कसावट की कमी

  • सरप्राइज एलिमेंट्स की कमी

  • सपोर्टिंग कास्ट का कमजोर उपयोग

क्या देखें या नहीं?

अगर आपने इसका पहला पार्ट देखा है, तो यह फिल्म एक बार जरूर देख सकते हैं। लेकिन अगर आप पहले पार्ट जैसी एक्साइटमेंट, ट्विस्ट और एंटरटेनमेंट की उम्मीद लेकर जाएंगे, तो थोड़ा निराश हो सकते हैं। कुल मिलाकर, यह एक ठीक-ठाक फिल्म है जिसे आप रणवीर सिंह की दमदार एक्टिंग के लिए देख सकते हैं, लेकिन ज्यादा उम्मीदें लेकर न जाएं।

Watch Video

Watch the full video for more details on this story.

You Might Also Like

Facebook Feed