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फूलों की घाटी पर्यटकों के लिए खुली: पहले दिन 108 पर्यटक पहुंचे, अक्टूबर तक कर सकेंगे दीदार

फूलों की घाटी पर्यटकों के लिए खुली, पहले दिन पहुंचे 108 सैलानी; अक्टूबर तक मिलेगा प्रकृति का अद्भुत नजारा

विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी में फिर लौटी रौनक

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान (Valley of Flowers National Park) रविवार से पर्यटकों के लिए खोल दी गई है। घाटी के खुलते ही प्रकृति प्रेमियों, ट्रेकर्स और फोटोग्राफी के शौकीनों में खासा उत्साह देखने को मिला। पहले ही दिन 108 पर्यटकों ने इस प्राकृतिक स्वर्ग का दीदार किया और हिमालय की गोद में बसे इस अनोखे पर्यटन स्थल की खूबसूरती को करीब से महसूस किया।

यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल फूलों की घाटी अपने दुर्लभ फूलों, औषधीय वनस्पतियों, रंग-बिरंगी तितलियों और अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। हर वर्ष हजारों देशी-विदेशी पर्यटक यहां पहुंचते हैं और हिमालयी जैव विविधता का अनूठा अनुभव प्राप्त करते हैं।

स्थानीय पर्यटन कारोबार को मिलेगा बढ़ावा

फूलों की घाटी के खुलने के साथ ही गोविंदघाट, घांघरिया और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियां तेज हो गई हैं। होटल, होमस्टे, रेस्टोरेंट, घोड़ा-खच्चर संचालक, पोर्टर और स्थानीय व्यवसायियों को इस सीजन से बड़ी उम्मीदें हैं।चारधाम यात्रा के साथ-साथ फूलों की घाटी भी उत्तराखंड पर्यटन का एक प्रमुख आकर्षण है। ऐसे में घाटी के खुलने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की संभावना है।पर्यटन विभाग और वन विभाग को उम्मीद है कि इस वर्ष भी हजारों पर्यटक घाटी का भ्रमण करेंगे, जिससे क्षेत्र के लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर प्राप्त होंगे।

अक्टूबर तक पर्यटकों के लिए खुली रहेगी घाटी

प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी फूलों की घाटी को जून महीने की शुरुआत में पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। यह राष्ट्रीय उद्यान 1 जून से 31 अक्टूबर तक या बर्फबारी शुरू होने तक पर्यटकों के लिए खुला रहेगा।मानसून के आगमन के साथ घाटी में फूलों का खिलना शुरू हो जाता है। जुलाई, अगस्त और सितंबर के महीने फूलों की घाटी घूमने के लिए सबसे उपयुक्त माने जाते हैं। इस दौरान पूरी घाटी हजारों रंग-बिरंगे फूलों से ढक जाती है और ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रकृति ने रंगों की चादर बिछा दी हो।

500 से अधिक प्रजातियों के फूलों का अनोखा संसार

फूलों की घाटी अपनी जैव विविधता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहां लगभग 500 से अधिक देशी और विदेशी प्रजातियों के फूल पाए जाते हैं।

घाटी में खिलने वाले प्रमुख फूलों में शामिल हैं—

  • ब्रह्म कमल
  • ब्लू पोस्ता (Blue Poppy)
  • कोबरा लिली
  • प्रिमूला
  • एनिमोन
  • डेल्फीनियम
  • पोटेंटिला
  • जेरैनियम
  • मार्श मैरीगोल्ड
  • एस्टर प्रजाति के फूल

जब ये फूल एक साथ खिलते हैं तो पूरी घाटी इंद्रधनुषी रंगों से भर जाती है और पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती है।

ट्रेकिंग प्रेमियों के लिए है स्वर्ग

फूलों की घाटी तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को रोमांचक ट्रेकिंग का अनुभव भी मिलता है।यात्रा की शुरुआत चमोली जिले के गोविंदघाट से होती है। यहां से लगभग 13 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर पर्यटक घांघरिया पहुंचते हैं, जो फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब यात्रा का बेस कैंप माना जाता है।इसके बाद घांघरिया से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी तय कर फूलों की घाटी के प्रवेश द्वार तक पहुंचा जाता है।यह ट्रेक हिमालयी जंगलों, झरनों, पहाड़ों और नदी घाटियों से होकर गुजरता है, जो यात्रियों को एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करता है।

घाटी के भीतर रात रुकने की अनुमति नहीं

फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान एक संरक्षित क्षेत्र है, इसलिए यहां पर्यावरण संरक्षण के विशेष नियम लागू हैं।पर्यटकों को केवल दिन के समय घाटी के भीतर प्रवेश की अनुमति होती है। सूर्यास्त से पहले सभी यात्रियों को घाटी से वापस लौटना अनिवार्य होता है। घाटी के अंदर कैंपिंग या रात्रि विश्राम की अनुमति नहीं दी जाती।इस व्यवस्था का उद्देश्य क्षेत्र की जैव विविधता और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखना है।

नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व का हिस्सा है घाटी

फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान, नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह क्षेत्र हिमालयी वनस्पतियों और दुर्लभ जीव-जंतुओं के संरक्षण के लिए जाना जाता है।यहां मिलने वाले प्रमुख वन्यजीवों में हिमालयी कस्तूरी मृग, हिमालयी भालू, नीली भेड़ (भरल), हिमालयी लोमड़ी और कई दुर्लभ पक्षी प्रजातियां शामिल हैं।इसके अलावा यहां पाई जाने वाली कई औषधीय जड़ी-बूटियां आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

पुष्पावती नदी और ग्लेशियर बढ़ाते हैं खूबसूरती

फूलों की घाटी की सुंदरता केवल फूलों तक सीमित नहीं है। घाटी के मध्य से बहने वाली पुष्पावती नदी, प्राकृतिक झरने, रतवान ग्लेशियर से निकलने वाली जलधाराएं, ऊंचे बर्फ से ढके पर्वत और दूर-दूर तक फैले हिमालयी दृश्य इसकी खूबसूरती को और भी आकर्षक बना देते हैं।मानसून के दौरान बादलों से घिरे पहाड़ और खिलते फूल मिलकर ऐसा दृश्य प्रस्तुत करते हैं, जिसे देखकर पर्यटक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।

क्यों खास है फूलों की घाटी?

प्रमुख विशेषताएं:

  • यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल
  • 500 से अधिक फूलों की प्रजातियां
  • समुद्र तल से लगभग 12,995 फीट की ऊंचाई
  • 87.5 वर्ग किलोमीटर में फैला राष्ट्रीय उद्यान
  • नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व का हिस्सा
  • ट्रेकिंग और प्रकृति प्रेमियों के लिए आदर्श गंतव्य
  • दुर्लभ वनस्पतियों और वन्यजीवों का आवास

प्रकृति प्रेमियों के लिए सुनहरा अवसर

फूलों की घाटी का खुलना उत्तराखंड पर्यटन सीजन की एक महत्वपूर्ण शुरुआत माना जाता है। आने वाले महीनों में जब घाटी पूरी तरह फूलों से सज जाएगी, तब यहां का दृश्य और भी मनमोहक होगा।यदि आप प्रकृति, ट्रेकिंग, फोटोग्राफी और हिमालयी सौंदर्य के शौकीन हैं, तो फूलों की घाटी की यात्रा आपके लिए एक यादगार अनुभव साबित हो सकती है। जून से अक्टूबर तक खुलने वाला यह प्राकृतिक खजाना हर साल लाखों लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है और इस बार भी पर्यटकों का उत्साह पहले दिन से ही देखने को मिल रहा है।

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