दयारा बुग्याल ट्रैकिंग के दौरान युवती लापता, SDRF और पुलिस की सर्च ऑपरेशन जारी
दयारा बुग्याल ट्रैक पर लापता हुई युवती, SDRF और पुलिस की संयुक्त टीम कर रही तलाश
उत्तरकाशी में ट्रैकिंग के दौरान लापता हुई युवती
उत्तराखंड के प्रसिद्ध पर्यटन और ट्रैकिंग स्थल दयारा बुग्याल से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। ट्रैकिंग के लिए पहुंची एक युवती संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई है। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आ गया और वन विभाग, एसडीआरएफ, पुलिस तथा राजस्व विभाग की संयुक्त टीम युवती की तलाश में जुट गई है।
यह घटना बीते शुक्रवार शाम की बताई जा रही है। लापता युवती अपने दो अन्य साथियों के साथ दयारा बुग्याल ट्रैक पर गई थी। ट्रैकिंग के दौरान वह अचानक समूह से अलग हो गई और उसके बाद से उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। घटना के बाद क्षेत्र में चिंता का माहौल है और बचाव दल लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं।
हल्द्वानी निवासी बताई जा रही है युवती
आपदा कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के अनुसार लापता ट्रैकर की पहचान बबीता पांडे के रूप में हुई है। ट्रैकिंग अनुमति के दौरान जमा किए गए दस्तावेजों में उनका पता हल्द्वानी, जिला नैनीताल दर्ज है। अधिकारियों के अनुसार युवती की उम्र करीब 30 वर्ष है।
बताया जा रहा है कि बबीता पांडे अपने दो साथियों के साथ दयारा बुग्याल की ट्रैकिंग पर पहुंची थीं। ट्रैकिंग के दौरान किन परिस्थितियों में वह लापता हुईं, इसकी जानकारी अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है। प्रशासन सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच और खोज अभियान चला रहा है।
SDRF, पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम तलाश में जुटी
घटना की सूचना मिलने के बाद प्रशासन ने तत्काल राहत एवं खोज अभियान शुरू कर दिया। एसडीआरएफ के जिला प्रभारी जेपी बिजल्वाण ने बताया कि सूचना मिलते ही भटवाड़ी क्षेत्र में तैनात एसडीआरएफ टीम को मौके पर रवाना कर दिया गया। सर्च ऑपरेशन में एसडीआरएफ के साथ पुलिस, वन विभाग और राजस्व विभाग की टीमें भी शामिल हैं। पर्वतीय क्षेत्र और घने जंगलों के कारण खोज अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। टीमों द्वारा संभावित मार्गों, ट्रैकिंग रूट्स और आसपास के जंगलों में व्यापक स्तर पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।
दयारा बुग्याल ट्रैक क्षेत्र में बढ़ी चिंता
दयारा बुग्याल उत्तराखंड के सबसे लोकप्रिय ट्रैकिंग स्थलों में से एक माना जाता है। हर साल बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक और ट्रैकर्स यहां पहुंचते हैं। समुद्र तल से लगभग 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित यह बुग्याल प्राकृतिक सौंदर्य और एडवेंचर गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध है। हालांकि ऊंचाई, बदलते मौसम और घने जंगलों के कारण यह क्षेत्र कई बार चुनौतीपूर्ण भी साबित होता है। ऐसे में किसी ट्रैकर के लापता होने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूचना देने में देरी पर उठे सवाल
इस घटना ने साहसिक पर्यटन और ट्रैकिंग गतिविधियों के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर भी बहस छेड़ दी है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार युवती के लापता होने के बाद पुलिस और प्रशासन को सूचना देने में देरी हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में किसी भी ट्रैकर के संपर्क से बाहर होने या लापता होने की स्थिति में तत्काल प्रशासन को सूचना देना बेहद जरूरी होता है। शुरुआती घंटों में शुरू किया गया सर्च ऑपरेशन कई बार सफल रेस्क्यू की संभावना को बढ़ा देता है।
ट्रैकिंग के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार पर्वतीय क्षेत्रों में ट्रैकिंग के दौरान कुछ महत्वपूर्ण सुरक्षा नियमों का पालन करना आवश्यक है। ट्रैकर्स को समूह से अलग नहीं होना चाहिए और अपने साथ जीपीएस, मोबाइल, टॉर्च तथा आवश्यक सुरक्षा उपकरण रखने चाहिए।
इसके अलावा मौसम की जानकारी, स्थानीय प्रशासन से अनुमति और निर्धारित ट्रैकिंग रूट का पालन करना भी बेहद जरूरी माना जाता है। दयारा बुग्याल जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम अचानक बदल सकता है, जिससे जोखिम बढ़ जाता है।
प्रशासन ने जारी की निगरानी व्यवस्था
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि युवती की तलाश के लिए सभी संबंधित एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। खोज अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक युवती का पता नहीं चल जाता। स्थानीय लोगों और ट्रैकिंग गाइड्स से भी जानकारी जुटाई जा रही है। प्रशासन को उम्मीद है कि जल्द ही युवती के संबंध में कोई महत्वपूर्ण सुराग मिल सकता है।
दयारा बुग्याल में बढ़ती ट्रैकिंग गतिविधियों के बीच सुरक्षा बड़ा मुद्दा
उत्तराखंड में एडवेंचर टूरिज्म तेजी से बढ़ रहा है। दयारा बुग्याल, हर की दून, रूपकुंड और केदारकांठा जैसे ट्रेकिंग रूट्स पर हर साल हजारों पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में सुरक्षा मानकों का पालन और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र मजबूत करना बेहद आवश्यक हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रैकिंग आयोजकों, गाइड्स और पर्यटकों को सुरक्षा प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करना चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
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