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Uttarakhand : नौकरी के लिए पूर्व सैनिकों को भेजा जाएगा विदेश, यहां बनेंगे सैनिक विश्राम गृह!

Uttarakhand : आज देश भर में कारगिल विजय दिवस की 26वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। यह वह दिन है जब हम 1999 के कारगिल युद्ध में पाकिस्तान पर भारत की ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाते हैं और उन वीर सपूतों के सर्वोच्च बलिदान को याद करते हैं जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।

इसी कड़ी में, उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में स्थित गांधी पार्क के शहीद स्मारक में एक भावपूर्ण समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर, शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई और उनकी वीरांगनाओं को सम्मानित किया गया।

Uttarakhand : सीएम धामी ने किया वीरांगनाओं का सम्मान

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कारगिल युद्ध के शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनकी वीरांगनाओं को सम्मानित कर कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी सहित कारगिल युद्ध में भाग ले चुके कई दिग्गज सैनिक भी उपस्थित थे, जिन्होंने इस गौरवशाली दिन को और भी गरिमामय बना दिया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारों से शहीदों को नमन किया।

Uttarakhand : कारगिल युद्ध: एक गौरवशाली गाथा

कारगिल युद्ध, जो लगभग दो महीने तक चला, भारतीय सैन्य इतिहास के सबसे चुनौतीपूर्ण संघर्षों में से एक था। इसकी शुरुआत 5 मई 1999 को हुई थी, जब पाकिस्तानी सेना ने भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ कर भारतीय सेना के पांच जवानों को शहीद कर दिया था।

इसके जवाब में, भारतीय सेना ने 10 मई 1999 को 'ऑपरेशन विजय' की शुरुआत की। 26 जुलाई 1999 को, भारतीय सेना ने कारगिल की चोटियों से घुसपैठियों को पूरी तरह खदेड़ दिया और युद्ध पर पूर्ण विराम लग गया।

इस युद्ध में भारत के 527 जवान शहीद हुए और 1363 जवान घायल हुए, लेकिन उनके बलिदान ने देश की अखंडता और संप्रभुता को अक्षुण्ण रखा। हर साल 26 जुलाई को भारतीय सेना के इस अदम्य साहस, वीरता और सर्वोच्च बलिदान को याद करते हुए कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है।

Uttarakhand का अद्वितीय योगदान: 75 शहादत

कारगिल युद्ध में उत्तराखंड ने अतुलनीय योगदान दिया था। इस छोटे से राज्य के 75 वीर जवानों ने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। राज्य के विभिन्न जिलों से शहीदों की संख्या इस प्रकार है:

* देहरादून: 25 जवान

* टिहरी: 12 जवान

* पौड़ी गढ़वाल: 13 जवान

* चमोली: 5 जवान

* नैनीताल: 6 जवान

* पिथौरागढ़: 4 जवान

* अल्मोड़ा: 3 जवान

* बागेश्वर: 2 जवान

* रुद्रप्रयाग: 3 जवान

* उधम सिंह नगर: 2 जवान

इन शहीदों में से 2 जवानों को महावीर चक्र, 9 जवानों को वीर चक्र, 15 जवानों को सेना मेडल, और 11 जवानों को मेंशन इन डिस्पैच से सम्मानित किया गया था, जो उनकी अद्वितीय वीरता और बलिदान का प्रमाण है।

Uttarakhand : मुख्यमंत्री धामी की बड़ी घोषणाएं

कारगिल विजय दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शहीद जवानों को नमन करते हुए कहा कि राज्य सरकार उनके बलिदान के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर दिया कि जवानों के परिवारों, पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों के कल्याण के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है।

उत्तराखंड एक सैनिक बाहुल्य राज्य है, और ऐसे में सैनिकों के उत्थान के लिए काम करना सरकार का परम कर्तव्य है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं:

* चमोली में ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक और सैनिक विश्राम गृह: सीमांत जनपद चमोली के कालेश्वर में ईसीएचएस पॉलीक्लिनिक और एक सैनिक विश्राम गृह का निर्माण किया जाएगा, जिससे पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और ठहरने की सुविधा मिल सके।

* नैनीताल में सैनिक विश्राम गृह: नैनीताल में भी एक सैनिक विश्राम गृह का निर्माण किया जाएगा, जिससे इस क्षेत्र के सैनिकों और उनके परिवारों को सुविधा मिल सके।

* उपनल के माध्यम से विदेश में नौकरी: उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम (उपनल) के माध्यम से पूर्व सैनिकों को विदेश में नौकरी के अवसर प्रदान किए जाएंगे। इस योजना में 50% सीटें सिविलियन युवाओं के लिए भी आरक्षित होंगी, जिससे अन्य युवाओं को भी अंतरराष्ट्रीय रोजगार के अवसर मिल सकें।

* उपनल कर्मचारियों का विनियमितीकरण: मुख्यमंत्री ने बताया कि उपनल के जरिए अब तक 22 हजार लोगों को रोजगार मिला है। इनके विनियमितीकरण के लिए मंत्रिमंडल ने पहले ही निर्णय ले लिया है, जिसे जल्द ही पूरा किया जाएगा। यह घोषणा उन हजारों परिवारों के लिए राहत लेकर आई है जो लंबे समय से विनियमितीकरण की प्रतीक्षा कर रहे थे।

मुख्यमंत्री धामी की ये घोषणाएं उत्तराखंड सरकार की पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। कारगिल विजय दिवस हमें न केवल अपने वीर नायकों के बलिदान की याद दिलाता है, बल्कि यह देश की रक्षा और सुरक्षा के लिए निरंतर समर्पण की प्रेरणा भी देता है।

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