चमोली में लावारिश हालात में मिले बच्चे को अपनाने वालों की लगी लम्बी लाइन, लेकिन बच्चा किसका ये पहेली अनसुलझी
उत्तराखंड के चमोली जिले से एक बेहद भावुक करने वाली और संवेदनशील घटना 6 अगस्त को सामने आई थी यहाँ के दशोली विकासखंड के रांगतोली गांव में एक नवजात शिशु लावारिस हालत में मिला था जिसे किसी ने जन्म लेते ही मरने के लिए छोड़ दिया था। इस घटना ने जहां एक तरफ मानवता को शर्मसार किया है, वहीं दूसरी तरफ लोग इस बच्चे को सहारा देने के लिए आगे आ रहे हैं।
चमोली के पास ग्राम रांगतोली में गौशाला के पास बरसाती नाले में एक नवजात मिला था. पुलिस ने सूचना के बाद नवजात को पुलिस ने जिला चिकित्सालय भर्ती कराया था, बताया गया कि नवजात को हाइपोथर्मिया है इसमें शरीर का तापमान कम होने से अन्य दिक्कतें आती हैं।
जिला चिकित्सालय में प्राथमिक उपचार के बाद नवजात को प्रशासन की मदद से श्रीनगर मेडिकल कालेज उपचार के लिए ले जाया गया जहां नवजात आईसीयू में भर्ती है। नवजात को लेकर क्षेत्र में तरह तरह की चर्चा है। लोग इस कुमाता को कौस रहे हैं।बच्चे को छोड़ने वाले ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी थीं। शिशु के रोने की आवाज बाहर न जा सके, इसके लिए उसके मुंह में बालों का रबड़ ठूंस दिया गया था।
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कहते हैं "जाको राखे साइयां, मार सके ना कोय" इस बच्चे के साथ भी वही हुआ गौशाला जा रही एक महिला की नजर इस पर पड़ी और समय रहते ग्राम प्रधान और पुलिस को सूचना देने से नवजात को बचाया जा सका।
इस संवेदनशील घटना से ग्रामीण आक्रोशित हैं और दोषी को कड़ी से कड़ी सजा मिलने की मांग कर रहे हैं लेकिन ये कुकृत्य किसने किया इसका अभी तक खुलासा नहीं हो पाया है,पुलिस आंगनबाड़ी केंद्रों से गर्भवती महिलाओं की लिस्ट खंगाल रही है।
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वहीं सोशल मीडिया और समाचार पत्रों में खबर पढ़ने के बाद लोग बच्चे को गोद लेने की इच्छा जता रहे हैं और अस्पताल और पुलिस से पूछताछ कर रहे हैं,प्राप्त जानकारी के अनुसार नवजात शिशु बालक है।इस वजह से यह कन्या भ्रूण हत्या का मामला भी नहीं लग रहा तो सवाल अब भी बाकी है कि दोषी ने आखिर ऐसा क्यों किया एक तरफ समाज जहां बेटा- बेटी एक समान को अपना चुका है लोग वारिश पाने के लिए लाखों रुपए खर्च कर रहे हैं तो ऐसा कुकृत्य क्यों किया गया।
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कानूनी प्रक्रिया के बाद ही मिल सकेगा बच्चा :
यदि कोई भी व्यक्ति ऐसे लावारिस मिले बच्चे को अपनाना चाहता है, तो वह सीधे तौर पर या अवैध तरीके से ऐसा नहीं कर सकता। इसके लिए भारत सरकार की CARA (Central Adoption Resource Authority) संस्था के माध्यम से कानूनी प्रक्रिया अपनानी होती है
ऐसे बच्चे सबसे पहले जिला बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee) की देखरेख में आते हैं।बच्चे को कुछ समय के लिए किसी मान्यता प्राप्त शिशु गृह (Specialised Adoption Agency) में रखा जाता है।
प्रशासन द्वारा अखबारों और माध्यमों से बच्चे के माता-पिता की तलाश के लिए निर्धारित समय (लगभग 60 दिन) दिया जाता है। यदि कोई दावा नहीं करता, तो बच्चे को कानूनी रूप से "गोद लेने के लिए स्वतंत्र" (Legally Free for Adoption) घोषित किया जाता है
इच्छुक दंपत्तियों को CARA की आधिकारिक वेबसाइट पर पंजीकरण कराना होता है, जिसके बाद पात्रता और वरिष्ठता के आधार पर कानूनी रूप से बच्चा गोद दिया जाता है।



















