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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री की कुर्सी 'म्यूजिकल चेयर' जैसी: 26 साल, 10 सीएम, 13 शपथ; जानिए रोचक किस्सा

2027 विधानसभा चुनाव नजदीक है.राजनैतिक पार्टियां जी तोड़ मेहनत कर रही हैं, सबकी नजर उस 'म्यूजिकल चेयर' पर है जिसका इतिहास अस्थिरता से जुड़ा है. हालांकि वर्तमान मुख्यमंत्री धामी ने इस मिथक को जरूर तोड़ा है लेकिन वो पार्टी का निर्णय था चुनाव में वो हार गए थे इस खबर में जानिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री की कुर्सी के रोचक किस्से। 

लम्बे संघर्षों और राज्य आंदोलनकारियों के बलिदानों के बाद 9 नवम्बर 2000 को उत्तराखंड (तब उत्तरांचल ) उत्तरप्रदेश से अलग होकर एक राज्य बना, इन 26 सालों में उत्तराखंड की राजनीति ने कई रंग दिखाए, राजनैतिक उठा पटक के बीच राज्य को 10 मुख्यमंत्री मिले और कुल 13 बार मुख्यमंत्री की शपथ हुई. 

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अक्सर मीडिया में "12 मुख्यमंत्रियों" का जिक्र होता है, लेकिन असली गणित यह है कि बीते 26 सालों में चेहरा भले ही 10 व्यक्तियों का रहा हो, पर सूबे ने कुल 13 बारमुख्यमंत्री पद की शपथ देखी है। हाल ही में जुलाई 2026 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने निरंतर 5 साल पूरे कर इतिहास रच दिया है। अब उत्तराखंड के इतिहास में नारायण दत्त तिवारी के बाद धामी  दूसरे ऐसे मुख्यमंत्री बन गए हैं जिन्होंने अपना 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा किया है

उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों की पूरी लिस्ट और कार्यकाल : 

1. नित्यानंद स्वामी (9 नवंबर 2000 – 29 अक्टूबर 2001): राज्य केपहले अंतरिम मुख्यमंत्री। नए राज्य की शुरुआती प्रशासनिक व्यवस्था खड़ी करने का श्रेय इन्हें जाता है, लेकिन चुनाव से ठीक पहले सांगठनिक फेरबदल के कारण इन्हें हटाया गया।

2. भगत सिंह कोश्यारी (30 अक्टूबर 2001 – 1 मार्च 2002): राज्य के दूसरे अंतरिम मुख्यमंत्री। इनका कार्यकाल मात्र 4 महीने का रहा, जिसके बाद राज्य में पहले विधानसभा चुनाव हुए। हालांकि कोश्यारी जिन्हें उनके समर्थक भगत दा कहते हैं का राजनैतिक कद कितना बड़ा है ये किसी से छुपा नहीं है,महाराष्ट्र के राज्यपाल, गोवा के प्रभारी राज्यपाल और हाल ही में पदमश्री से सम्मानित हुए।

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3. नारायण दत्त तिवारी (2 मार्च 2002 – 7 मार्च 2007): उत्तराखंड के पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री बने, विकास पुरुष कहे जाने वाले एन. डी तिवारी राज्य के पहले ऐसे नेता बने जिन्होंने भीतरघात और गुटबाजी के बावजूद अपना5 साल का कार्यकाल पूरा किया। हालांकि लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी का एक गीत जिसका शीर्षक है 'नौछमी नारेणा ' कहा जाता है कि ये इन्हीं पर आधारित था। 

4. भुवन चंद्र खंडूरी (प्रथम: 7 मार्च 2007 – 26 जून 2009 | द्वितीय: 11 सितंबर 2011 – 13 मार्च 2012): अपनी बेहद कड़क और ईमानदार छवि के लिए लोकप्रिय फौजी अफसर थे मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी  ये दो अलग-अलग कार्यकालों में मुख्यमंत्री बने (शपथ नंबर 4 और 6), लेकिन पार्टी की आंतरिक खींचतान के कारण दोनों ही बार समय से पहले हटा दिए गए।हाल ही में इनका निधन हो गया है।इनकी बेटी ऋतु भूषण खंडूरी विधानसभा अध्यक्ष के पद पर हैं। 

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5. डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक' (27 जून 2009 – 10 सितंबर 2011): मेजर जनरल खंडूरी के पहले इस्तीफे के बाद सत्ता में आए। इनके कार्यकाल के दौरान कुंभ घोटालों के आरोपों और राजनीतिक दबाव के चलते चुनाव से ठीक 5 महीने पहले पार्टी ने दोबारा खंडूरी जी को कमान सौंप दी थी। डॉ निशंक केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री (शिक्षा मंत्री ) भी रहे।इन दिनों राजनैतिक गलियारों में चर्चा है कि निशंक को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। 

6. विजय बहुगुणा (13 मार्च 2012 – 31 जनवरी 2014): कांग्रेस की सरकार बनने पर सीएम बने। वर्ष 2013 की भीषण केदारनाथ आपदा के बाद पैदा हुए राजनीतिक असंतोष और राहत कार्यों में ढिलाई के आरोपों के चलते इन्हें कार्यकाल के बीच में ही इस्तीफा देना पड़ा।इनके बेटे सौरव बहुगुणा धामी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं. 

7. हरीश रावत (1 फरवरी 2014 – 18 मार्च 2017): इनके कार्यकाल में उत्तराखंड ने इतिहास का सबसे बड़ा राजनैतिक संकट देखा। कांग्रेस के बागी विधायकों के कारण सरकार अल्पमत में आई और राज्य में अल्पकाल के लिए राष्ट्रपति शासन लागू करना पड़ा।हरीश रावत का स्टिंग ऑपरेशन करने वाले उमेश कुमार खानपुर के विधायक हैं आज भी गाहे बगाहे इस स्टिंग की चर्चाएं होती रहती हैं,हालाँकि हरीश रावत इन दिनों स्वास्थ्य कारणों से राजनीति से दूरी बनाए हुए हैं और कांग्रेस के पोस्टरों से भी गायब नजर आते हैं। 

8. त्रिवेंद्र सिंह रावत (18 मार्च 2017 – 10 मार्च 2021): पूर्ण बहुमत के साथ उन्होंने लगभग 4 साल सरकार चलाई। लेकिन गैरसैंण को कमिश्नरी बनाने के विवाद और देवस्थानम बोर्ड के कड़े विरोध के चलते चुनाव से ठीक एक साल पहले इन्हें बदल दिया गया।

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9. तीरथ सिंह रावत (10 मार्च 2021 – 4 जुलाई 2021): उत्तराखंड के इतिहास में सबसे छोटा कार्यकाल (मात्र 114 दिन)। लोकसभा सांसद होने के कारण इन्हें 6 महीने में विधानसभा चुनाव जीतना था, लेकिन कोरोना काल में उपचुनाव न हो पाने के संवैधानिक संकट के चलते इन्हें पद छोड़ना पड़ा।हालांकि सीएम रहते इनके बयानों ने भी खूब सुर्खियां बटोरी इन दिनों राजनैतिक मंचों से थोड़ा दूर ही नजर आते हैं। 

10. पुष्कर सिंह धामी (प्रथम: 4 जुलाई 2021 – मार्च 2022 | द्वितीय: मार्च 2022 – वर्तमान): लगातार दो बार मुख्यमंत्री की शपथ लेने वाले (शपथ नंबर 11 और 13)राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री।2022 में अपनी पारंपरिक सीट (खटीमा) हारने के बावजूद आलाकमान ने इन पर भरोसा जताया। इन्होंने चंपावत उपचुनाव रिकॉर्ड मतों से जीता और जुलाई 2026 में सीएम के रूप में लगातार 5 साल पूरे करने का ऐतिहासिक गौरव हासिल किया।

है ना उत्तराखंड की यह सियासी 'म्यूजिकल चेयर' यह साफ दर्शाती है कि यहाँ का सीएम सिंहासन जितना प्रतिष्ठित है, क्षेत्रीय असंतोष और आंतरिक राजनीति के कारण उतना ही अस्थिर भी रहा है। लेकिन वर्तमान में पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व ने राज्य को लंबे समय बाद एक मजबूत राजनैतिक स्थिरता दी है। 

अब 2027 में क्या होगा ये तो भविष्य के गर्त में छिपा हुआ है...

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