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नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन में 'कमीशन' का खेल, डबल इंजन सरकार के नाक के नीचे भ्रष्टाचार का 'एक्सप्रेसवे'!

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 'जीरो टॉलरेंस' और 'बाबा का बुलडोजर' जैसे शब्द भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की पहचान बन चुके हैं। लेकिन क्या यह दांव केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित है? ताज़ा मामला नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (NMRC) के मुख्य कार्यालय से सामने आया है, जिसने सिस्टम की ईमानदारी पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं।

खबरों के मुताबिक, नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन में हाउसकीपिंग सामग्री की आपूर्ति के लिए ₹91,58,150 का एक टेंडर जारी हुआ। आरोप है कि इस टेंडर के रनिंग बिलों को पास करने के बदले JE मुकुल चौधरी खुलेआम 5 से 7 प्रतिशत कमीशन की मांग कर रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि यह वसूली केवल निचले स्तर पर नहीं हो रही; चर्चा है कि JE मुकुल चौधरी ने खुद यह कबूला है कि इस बंदरबांट में GM अनुपमा परमार का भी हिस्सा तय है।

अब सवाल ये है कि क्या भ्रष्टाचार की यह गंगा ऊपर से नीचे की ओर बह रही है? क्या GM अनुपमा परमार तक वाकई इस करप्शन के पैसे की आंच पहुंच रही है, या उनके नाम का इस्तेमाल कर नीचे के अधिकारी अपनी तिजोरियां भर रहे हैं? इसकी उच्चस्तरीय जांच और इन अधिकारियों की चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा खंगाला जाना अब अनिवार्य हो गया है।

विवादों से पुराना नाता

यह पहली बार नहीं है जब नोएडा मेट्रो प्रशासन सवालों के घेरे में है। अगर हम इतिहास के पन्ने पलटें, तो नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (NMRC) के कार्यकारी निदेशक रहे IAS महेंद्र प्रसाद का 'कैलेंडर विवाद' आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। जब सरकारी रसूख और अपनी ब्रांडिंग के चक्कर में विवाद खड़ा हुआ था, तब भी सिस्टम की कार्यशैली पर उंगलियां उठी थीं।

सिर्फ आर्थिक भ्रष्टाचार ही नहीं, बल्कि कार्यप्रणाली में लापरवाही ने भी मासूमों की जान ली है। इसी विभाग की देखरेख में चल रहे मेट्रो निर्माण के दौरान मिट्टी की डाई गिरने से एक मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई थी।

सवाल यह है कि जो विभाग एक मजदूर की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पा रहा, वह करोड़ों के टेंडर में 'ईमानदारी' कैसे सुनिश्चित करेगा? क्या कमीशनखोरी के चक्कर में ही निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा के साथ समझौता किया जा रहा है?

एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार के खिलाफ हुंकार भरते हैं, तो दूसरी तरफ उनके नाक के नीचे बैठे अधिकारी 7% कमीशन की 'सेटिंग' कर रहे हैं। क्या डबल इंजन की सरकार इन 'सफेदपोश' भ्रष्टाचारियों पर नकेल कस पाएगी? या फिर 91 लाख का यह टेंडर कमीशनखोरी की भेंट चढ़ जाएगा?

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