देहरादून में कायस्थ महासभा का भव्य होली मिलन समारोह, महिलाओं का सम्मान
देहरादून में कायस्थ महासभा का भव्य होली मिलन समारोह, महिलाओं को किया सम्मानित
देहरादून में उत्तराखंड कायस्थ महासभा की ओर से प्रदेश स्तरीय होली मिलन समारोह का भव्य आयोजन किया गया। सोडा सरोली स्थित एक निजी रिसॉर्ट में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए चित्रांश समाज के सैकड़ों लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। रंगों के इस पर्व पर लोगों ने एक-दूसरे को गुलाल और अबीर लगाकर होली की खुशियां साझा कीं और आपसी भाईचारे व प्रेम का संदेश दिया।
हरी-भरी पहाड़ियों और सुहावने मौसम के बीच आयोजित इस समारोह का माहौल बेहद खुशनुमा रहा। लोगों ने परिवार और मित्रों के साथ मिलकर होली के गीतों, संगीत और रंगों का आनंद लिया। इस अवसर पर समाज के लोगों ने पारंपरिक तरीके से होली मनाते हुए एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं।
कलाकारों ने बांधा समां
कार्यक्रम को खास और यादगार बनाने में चित्रांश समाज के कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पीयूष निगम, सुभाष सक्सेना, विक्रम श्रीवास्तव, राजीव श्रीवास्तव और आदित्य सक्सेना ने अपने गीतों और भजनों से पूरे माहौल को संगीतमय बना दिया। उनके प्रस्तुत किए गए होली गीतों और भजनों पर लोगों ने जमकर आनंद लिया।
संगीत के साथ-साथ नृत्य और हंसी-ठिठोली ने कार्यक्रम को और भी जीवंत बना दिया। लोगों ने पारंपरिक होली गीतों पर नाचते-गाते हुए उत्सव का भरपूर आनंद उठाया। रंग, संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का यह संगम कार्यक्रम में शामिल लोगों के लिए लंबे समय तक यादगार बन गया।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं का सम्मान
समारोह के दौरान अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर समाज की महिलाओं को विशेष सम्मान भी दिया गया। वृंदावन से आए चित्रगुप्त पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद के हाथों समाज की कई महिलाओं को उनके विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
सम्मानित महिलाओं को प्रतीक चिन्ह, शॉल और पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया गया। आयोजकों ने कहा कि समाज के विकास और प्रगति में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसलिए उनके योगदान को सम्मान देना बेहद जरूरी है।
समाज में एकता का संदेश
इस अवसर पर उत्तराखंड कायस्थ महासभा के प्रदेश अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव ने सभी को होली की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह प्रेम, सद्भाव और एकता का प्रतीक भी है। इस पर्व के माध्यम से समाज के लोग आपसी मतभेदों को भुलाकर एक-दूसरे के करीब आते हैं।
उन्होंने समाज के सभी लोगों से सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान भी किया। उनका कहना था कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराने का माध्यम बनते हैं।
चित्रगुप्त महाराज की आरती से शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रूप से चित्रगुप्त महाराज की आरती के साथ की गई। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू हुआ, जिसमें होली गीत, भजन और संगीत प्रस्तुतियां शामिल रहीं। समारोह का समापन पारंपरिक होली गीतों और आपसी शुभकामनाओं के साथ हुआ।
रिसॉर्ट की प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण ने पूरे आयोजन को और भी आकर्षक बना दिया। खुले वातावरण में आयोजित इस कार्यक्रम में लोगों ने प्रकृति के बीच रंगों के इस त्योहार का भरपूर आनंद लिया।
अगले वर्ष फिर मिलने की उम्मीद
कायस्थ महासभा द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने समाज में एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने का संदेश दिया। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने इसे एक पारिवारिक मिलन की तरह यादगार बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं।समारोह में शामिल लोगों ने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में भी इसी तरह के आयोजन होते रहेंगे, जिससे समाज के लोगों को एक मंच पर मिलने और अपनी परंपराओं को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता रहेगा।
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