केतन हत्याकांड: हरिद्वार में फिर रोके गए सांसद चंद्रशेखर आजाद, टिहरी जाते समय पुलिस ने शंकराचार्य चौक पर रोका
केतन हत्याकांड: हरिद्वार में फिर रोके गए सांसद चंद्रशेखर आजाद, टिहरी जाने से पहले पुलिस ने की बैरिकेडिंग
हरिद्वार: उत्तराखंड के चर्चित केतन हत्याकांड को लेकर राजनीतिक हलचल लगातार तेज होती जा रही है। मंगलवार को भीम आर्मी प्रमुख और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद एक बार फिर पीड़ित परिवार से मिलने टिहरी के लिए रवाना हुए, लेकिन हरिद्वार में पुलिस ने उन्हें शंकराचार्य चौक पर रोक दिया। पुलिस द्वारा बैरिकेडिंग किए जाने के बाद मौके पर काफी देर तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा और समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन भी किया। यह दूसरी बार है जब सांसद चंद्रशेखर आजाद को केतन हत्याकांड के पीड़ित परिवार से मिलने जाते समय पुलिस ने रास्ते में रोक दिया। इससे पहले भी इसी स्थान पर पुलिस और समर्थकों के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी।
शंकराचार्य चौक पर रोका गया काफिला
मंगलवार सुबह चंद्रशेखर आजाद समर्थकों के काफिले के साथ हरिद्वार से टिहरी की ओर रवाना हुए। पहले से सतर्क पुलिस प्रशासन ने शंकराचार्य चौक पर भारी पुलिस बल तैनात कर बैरिकेडिंग कर दी थी। जैसे ही उनका काफिला मौके पर पहुंचा, पुलिस ने आगे बढ़ने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इस दौरान भीम आर्मी कार्यकर्ताओं ने आगे जाने की मांग करते हुए नारेबाजी की। कुछ समय तक पुलिस और समर्थकों के बीच बहस भी हुई, लेकिन प्रशासन अपने फैसले पर कायम रहा।
कुछ समर्थक पहले ही निकल गए आगे
जानकारी के अनुसार, चंद्रशेखर आजाद के काफिले के कुछ पदाधिकारी और समर्थक मुख्य काफिले से पहले ही अन्य वाहनों के जरिए आगे निकल गए थे। पुलिस अधिकारियों को जैसे ही इसकी जानकारी मिली, वे उनकी तलाश में आगे रवाना हो गए। प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर स्थिति पर नजर बनाए रखी, ताकि किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न न हो।
पहले भी हुआ था हंगामा
कुछ दिन पहले भी जब चंद्रशेखर आजाद और खानपुर विधायक उमेश कुमार केतन हत्याकांड के पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे थे, तब भी हरिद्वार के शंकराचार्य चौक पर पुलिस ने उन्हें रोक दिया था। उस दौरान समर्थकों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई थी। इस दौरान चंद्रशेखर आजाद की शर्ट भी फट गई थी। उन्होंने पुलिस पर अभद्र व्यवहार और लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का आरोप लगाया था। घंटों चले विरोध प्रदर्शन के बाद मामला शांत हुआ था।
आईजी गढ़वाल ने दिया था आश्वासन
पिछले घटनाक्रम के बाद आईजी गढ़वाल ने चंद्रशेखर आजाद से फोन पर बातचीत कर उन्हें भरोसा दिलाया था कि जल्द ही उन्हें पीड़ित परिवार से मिलने का अवसर दिया जाएगा। साथ ही मामले में आवश्यक कार्रवाई का भी आश्वासन दिया गया था। इसी आश्वासन के बाद चंद्रशेखर आजाद वापस लौट गए थे। हालांकि मंगलवार को उन्होंने दोबारा टिहरी जाने का प्रयास किया, लेकिन इस बार भी पुलिस ने उन्हें हरिद्वार में ही रोक दिया।
केतन हत्याकांड बना राजनीतिक मुद्दा
केतन हत्याकांड अब केवल एक आपराधिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक बहस का भी विषय बन चुका है। विपक्षी दल, सामाजिक संगठन और विभिन्न राजनीतिक नेता लगातार पीड़ित परिवार से मुलाकात कर न्याय की मांग कर रहे हैं।
भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल पीड़ित परिवार से मिलकर उन्हें न्याय दिलाने की लड़ाई में समर्थन देना है।दूसरी ओर पुलिस और प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसी कारण सुरक्षा कारणों से काफिले को आगे नहीं बढ़ने दिया गया।
पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था रही कड़ी
हरिद्वार में संभावित विरोध प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने पहले से व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे। शंकराचार्य चौक पर अतिरिक्त पुलिस बल, बैरिकेडिंग और वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती की गई थी।पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों ने लगातार स्थिति पर नजर बनाए रखी। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए समर्थकों को समझाने का प्रयास किया गया और यातायात व्यवस्था भी नियंत्रित रखी गई।
आगे क्या होगा?
फिलहाल चंद्रशेखर आजाद और उनके समर्थकों को टिहरी जाने की अनुमति नहीं दी गई है। प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई नया आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं, केतन हत्याकांड की जांच अपने स्तर पर जारी है और राजनीतिक गतिविधियां भी लगातार तेज हो रही हैं। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में और हलचल देखने को मिल सकती है। केतन हत्याकांड ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था, राजनीतिक हस्तक्षेप और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।
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