उत्तराखंड के सभी थानों को बम से उड़ाने की धमकी देने वाला गिरफ्तार, सोशल मीडिया पोस्ट से फैली थी दहशत
उत्तराखंड के सभी पुलिस थानों को बम से उड़ाने की धमकी देने वाला आरोपी गिरफ्तार, सोशल मीडिया पोस्ट से फैली थी दहशत
सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट के बाद हरकत में आई पुलिस
उत्तराखंड पुलिस ने पूरे राज्य के पुलिस थानों को बम विस्फोट से उड़ाने की धमकी देने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। आरोपी ने इंस्टाग्राम समेत विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर धमकी भरी पोस्ट और रील साझा कर प्रदेश में दहशत फैलाने की कोशिश की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर साइबर जांच शुरू की और कुछ ही दिनों में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान जसप्रीत सिंह (26 वर्ष) के रूप में हुई है, जो हरियाणा के अंबाला का रहने वाला है। आरोपी के कब्जे से वह मोबाइल फोन भी बरामद किया गया है, जिससे कथित तौर पर धमकी भरी पोस्ट और रील अपलोड की गई थीं।
25 जून को वायरल हुई थीं धमकी भरी पोस्ट
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, 25 जून 2026 को सोशल मीडिया पर कई ऐसी पोस्ट वायरल हुईं, जिनमें उत्तराखंड के सभी पुलिस थानों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। इन पोस्टों ने देखते ही देखते सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा पैदा कर दी और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं।मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए देहरादून कोतवाली नगर में तत्काल मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) प्रमेंद्र सिंह डोबाल के निर्देशन में एक विशेष जांच टीम गठित की गई।
साइबर सर्विलांस और तकनीकी जांच से आरोपी तक पहुंची पुलिस
धमकी देने वाले व्यक्ति की पहचान आसान नहीं थी, क्योंकि सोशल मीडिया के माध्यम से अपराध करने वाले अक्सर अपनी डिजिटल पहचान छिपाने का प्रयास करते हैं। इसके बावजूद उत्तराखंड पुलिस की साइबर टीम ने तकनीकी विश्लेषण, डिजिटल फुटप्रिंट, सोशल मीडिया अकाउंट्स और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की मदद से आरोपी तक पहुंचने में सफलता हासिल की। पुलिस ने डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए आरोपी की लोकेशन का पता लगाया और 28 जून को उसे गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई साइबर जांच और तकनीकी निगरानी के प्रभावी उपयोग का उदाहरण मानी जा रही है।
आरोपी हरियाणा के अंबाला का निवासी
गिरफ्तार आरोपी की पहचान जसप्रीत सिंह (26 वर्ष) के रूप में हुई है। वह मूल रूप से हरियाणा के अंबाला का रहने वाला है। पुलिस ने आरोपी के पास से वह मोबाइल फोन जब्त किया है, जिससे कथित रूप से धमकी भरी रील और सोशल मीडिया पोस्ट अपलोड की गई थीं। अब मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच भी कराई जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरोपी ने अकेले यह काम किया या किसी अन्य व्यक्ति की भी इसमें भूमिका थी।
पूछताछ में क्या खुलासा हुआ?
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने सोशल मीडिया पर धमकी भरी पोस्ट साझा की थी।प्रारंभिक पूछताछ के अनुसार आरोपी ने बताया कि चमोली जिले के कर्णप्रयाग में स्थानीय युवकों और कुछ निहंग सिखों के बीच हुए विवाद तथा उसके बाद पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई से वह नाराज था।
पुलिस के अनुसार आरोपी ने कथित तौर पर इसी नाराजगी में राज्यभर के पुलिस थानों को निशाना बनाते हुए धमकी भरी पोस्ट साझा की, ताकि दहशत फैलाई जा सके।हालांकि पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि आरोपी का उद्देश्य केवल सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देना था या इसके पीछे किसी प्रकार की बड़ी साजिश अथवा अन्य लोगों की संलिप्तता भी मौजूद थी।
पुलिस सभी पहलुओं की कर रही जांच
फिलहाल जांच एजेंसियां कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर काम कर रही हैं। इनमें शामिल हैं—
- सोशल मीडिया अकाउंट्स की विस्तृत जांच।
- मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल डिवाइस का फॉरेंसिक विश्लेषण।
- आरोपी के संपर्कों और चैट हिस्ट्री की जांच।
- यह पता लगाना कि क्या किसी अन्य व्यक्ति ने पोस्ट तैयार करने या वायरल करने में मदद की।
- धमकी के पीछे वास्तविक उद्देश्य और संभावित नेटवर्क की पड़ताल।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सोशल मीडिया पर अफवाह और धमकी को गंभीरता से ले रही पुलिस
पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर अफवाह फैलाने, धमकी देने और सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है। ऐसे मामलों को देखते हुए उत्तराखंड पुलिस लगातार साइबर मॉनिटरिंग बढ़ा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरनेट पर की गई धमकी भी वास्तविक अपराध की श्रेणी में आती है। यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था या किसी सरकारी संस्थान को निशाना बनाकर धमकी देता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
जनता से की गई अपील
उत्तराखंड पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की भड़काऊ, धमकी भरी या संदिग्ध पोस्ट साझा करने से बचें। यदि किसी व्यक्ति को इस प्रकार की कोई पोस्ट दिखाई देती है तो उसे तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को सूचित करना चाहिए। अफवाहों को आगे बढ़ाने के बजाय जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाना सभी की जिम्मेदारी है।
कानून के तहत हो सकती है सख्त कार्रवाई
कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने, सार्वजनिक संस्थानों को धमकी देने और सोशल मीडिया के माध्यम से भय का माहौल बनाने जैसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा सूचना प्रौद्योगिकी (IT) से संबंधित प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई की जा सकती है। यदि जांच में अपराध सिद्ध होता है तो आरोपी को गंभीर कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।
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