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हमीरपुर में अवैध खनन का विवाद: सौरभ सिंह ने जान का खतरा बताया, पुलिस और प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप

हमीरपुर में अवैध खनन को लेकर बढ़ा विवाद, सौरभ सिंह ने जान का खतरा बताते हुए लगाए गंभीर आरोप

सिसोलर निवासी युवक ने खनन माफियाओं और कुछ पुलिस अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप, निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग

हमीरपुर, उत्तर प्रदेश। जनपद हमीरपुर के सिसोलर थाना क्षेत्र के निवासी सौरभ सिंह ने कथित अवैध खनन माफियाओं और कुछ पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित का दावा है कि अवैध खनन के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उन्हें और उनके परिवार को लगातार धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने भारत की जनता से भावुक अपील करते हुए अपनी जान की सुरक्षा की मांग की है।

सौरभ सिंह का आरोप है कि क्षेत्र में सक्रिय कथित खनन माफियाओं द्वारा उन पर और उनके परिवार पर हमला किया गया, जिसमें उनकी विधवा माता घायल हो गईं। उनका कहना है कि इस घटना के बाद भी उन्हें पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल सकी और उनके खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कराने की कोशिश की जा रही है।

एफआईआर दर्ज होने के बाद भी उठ रहे सवाल

पीड़ित पक्ष के अनुसार मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक मृगांक शेखर पाठक ने एफआईआर दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। हालांकि सौरभ सिंह का आरोप है कि अब तक आरोपियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच होती है तो पूरे कथित अवैध खनन नेटवर्क का खुलासा हो सकता है। वहीं प्रशासन की ओर से इस मामले में सार्वजनिक रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

पुलिस अधिकारियों पर भी लगाए गंभीर आरोप

सौरभ सिंह ने आरोप लगाया है कि कथित खनन माफियाओं के कुछ प्रभावशाली पुलिस अधिकारियों से संबंध हैं। उन्होंने CO मौदहा, SHO मौदहा तथा SHO सिसोलर का नाम लेते हुए दावा किया कि अवैध खनन से जुड़े वीडियो और अन्य साक्ष्य सार्वजनिक करने के बाद उनके खिलाफ कथित रूप से दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों की ओर से इन दावों पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।

देर रात घर पहुंची पुलिस, परिवार को धमकाने का आरोप

पीड़ित का दावा है कि 16 जून की देर रात लगभग 1:40 बजे पुलिस उनके घर पहुंची। सौरभ सिंह के अनुसार उस दौरान उनकी पत्नी के साथ कथित अभद्र व्यवहार किया गया और उन्हें एनकाउंटर की धमकी दी गई।यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है तो यह मामला मानवाधिकार और पुलिस की कार्यप्रणाली से जुड़े गंभीर प्रश्न खड़े कर सकता है। फिलहाल इन दावों की स्वतंत्र जांच होना बाकी है।

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता ने भी उठाया मामला

सौरभ सिंह के अनुसार मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन से जुड़े अधिवक्ता इसरार ने जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया। पीड़ित पक्ष का दावा है कि प्रारंभिक स्तर पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया, लेकिन बाद में अपेक्षित जवाब नहीं मिला। पीड़ित का कहना है कि इस घटनाक्रम के बाद मामले को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी उठाया गया, जिससे यह मुद्दा व्यापक चर्चा का विषय बन गया।

सुरक्षा देने या छवि सुधारने की कोशिश?

सौरभ सिंह का आरोप है कि सोशल मीडिया पर मामला सामने आने के बाद उनके घर के बाहर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। उनका दावा है कि यह कदम वास्तविक सुरक्षा देने के बजाय प्रशासन की छवि सुधारने का प्रयास प्रतीत होता है। हालांकि इस संबंध में पुलिस प्रशासन की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

अवैध खनन से पर्यावरण को नुकसान का भी आरोप

पीड़ित का कहना है कि क्षेत्र में कथित अवैध खनन के कारण भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। इसके अलावा जमीन कमजोर होने, हवा और पानी के प्रदूषित होने तथा सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी क्षेत्र में अवैध खनन होता है तो उसका प्रभाव पर्यावरण, कृषि और स्थानीय लोगों के जीवन पर पड़ सकता है। ऐसे मामलों की वैज्ञानिक और प्रशासनिक जांच आवश्यक होती है।

पीड़ित पक्ष की प्रमुख मांगें

सौरभ सिंह ने प्रशासन और सरकार से कई मांगें की हैं। इनमें संबंधित पुलिस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से हटाकर निष्पक्ष विभागीय जांच कराना, कथित खनन माफियाओं के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करना, परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा पूरे कथित अवैध खनन नेटवर्क की उच्चस्तरीय जांच कराना शामिल है।

निष्पक्ष जांच की मांग

यह मामला अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर पीड़ित पक्ष लगातार गंभीर आरोप लगा रहा है, वहीं दूसरी ओर इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और आधिकारिक जांच अभी बाकी है। ऐसे में आवश्यक है कि संबंधित एजेंसियां निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कर तथ्यों को सामने लाएं, ताकि यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई हो सके और यदि आरोप निराधार हों तो वह भी स्पष्ट हो सके।

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