बिजनौर में असदुद्दीन ओवैसी का बड़ा बयान: भाजपा को हराने के लिए किसी से भी गठबंधन को तैयार, राम मंदिर चंदा मामले पर भी बोले
बिजनौर में असदुद्दीन ओवैसी का बड़ा बयान, बोले- भाजपा को हराने के लिए किसी भी दल से गठबंधन को तैयार
बिजनौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नजीबाबाद में आयोजित एक जनसभा के दौरान एआईएमआईएम (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कई राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सत्ता से बाहर करने के लिए किसी भी राजनीतिक दल के साथ गठबंधन करने के लिए तैयार है। इसके साथ ही उन्होंने मुस्लिम नेतृत्व, समाजवादी पार्टी, 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव और अयोध्या राम मंदिर चंदा विवाद को लेकर भी तीखे बयान दिए।ओवैसी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होती जा रही हैं और विभिन्न दल अपने-अपने समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं।
'70 साल तक मुसलमानों को नेतृत्व नहीं मिला'
सोमवार रात नजीबाबाद के आजाद चौक के निकट आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया कि पिछले कई दशकों से विभिन्न राजनीतिक दलों ने मुसलमानों को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया है।
उन्होंने कहा कि करीब 70 वर्षों से मुसलमानों को वास्तविक राजनीतिक नेतृत्व नहीं दिया गया। उन्हें केवल चुनाव के दौरान वोट देने और राजनीतिक कार्यक्रमों में भीड़ जुटाने तक सीमित रखा गया।ओवैसी ने कहा कि यदि मुस्लिम समाज केवल वोटर बनकर रहेगा तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित नहीं होगा। उन्होंने लोगों से राजनीतिक रूप से जागरूक होने और नेतृत्व की भूमिका निभाने का आह्वान किया।
भाजपा और सपा दोनों पर साधा निशाना
अपने संबोधन में ओवैसी ने भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों पर हमला बोला।उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा मुसलमानों को चुनाव में टिकट नहीं देती, जबकि समाजवादी पार्टी ने मुस्लिम समाज को केवल वोट बैंक बनाकर रखा है।ओवैसी ने कहा कि अब समय आ गया है कि मुस्लिम समाज अपनी राजनीतिक ताकत को पहचाने और अपना स्वतंत्र नेतृत्व तैयार करे।
'भाजपा को हराने के लिए किसी से भी गठबंधन करेंगे'
मीडिया से बातचीत के दौरान ओवैसी ने स्पष्ट कहा कि भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए उनकी पार्टी किसी भी राजनीतिक दल के साथ गठबंधन करने को तैयार है।उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता भाजपा को रोकना है और यदि इसके लिए किसी भी दल के साथ मिलकर चुनाव लड़ना पड़े तो AIMIM इसके लिए तैयार है।हालांकि उन्होंने किसी विशेष दल का नाम नहीं लिया और संभावित गठबंधन को लेकर कोई औपचारिक घोषणा भी नहीं की।
2027 चुनाव को बताया निर्णायक
जनसभा में AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष डॉ. मेहताब चौहान ने भी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।दोनों नेताओं ने कहा कि समाजवादी पार्टी लंबे समय से मुस्लिम वोटों की राजनीति करती रही है और अब मुस्लिम समाज को नए राजनीतिक विकल्प पर विचार करना चाहिए।सभा के दौरान यह भी कहा गया कि वर्ष 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है।
राम मंदिर चंदा विवाद पर भी दी प्रतिक्रिया
नजीबाबाद में पत्रकारों से बातचीत के दौरान असदुद्दीन ओवैसी से अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर भी सवाल पूछा गया।इस पर उन्होंने कहा कि इस मामले में ट्रस्ट से गलती हुई है। इसके बाद उन्होंने इस मुद्दे पर अपनी राजनीतिक टिप्पणी भी की और कानून के समान अनुपालन को लेकर सवाल उठाए।ओवैसी के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि इस मामले की जांच जारी है और संबंधित आरोप न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।
मुस्लिम समाज से की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की अपील
अपने भाषण के दौरान ओवैसी ने कहा कि केवल चुनाव के समय वोट डालने से समाज की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि समाज नेतृत्व की भूमिका में नहीं आएगा तो विकास की प्रक्रिया में उसकी भागीदारी सीमित रहेगी। उन्होंने लोगों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने और राजनीतिक रूप से संगठित होने की अपील की।
बिजनौर में AIMIM की सक्रियता बढ़ाने की कोशिश
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में AIMIM लगातार अपनी संगठनात्मक मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रही है। बिजनौर, नजीबाबाद, मुरादाबाद, अमरोहा और आसपास के जिलों में पार्टी लगातार जनसभाएं और कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित कर रही है।
2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए AIMIM मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में असदुद्दीन ओवैसी की यह जनसभा भी उसी अभियान का हिस्सा मानी जा रही है।
फिलहाल ओवैसी के गठबंधन संबंधी बयान और विभिन्न राजनीतिक दलों पर किए गए हमलों को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। अब यह देखना होगा कि आगामी चुनावी रणनीति में AIMIM किस दिशा में आगे बढ़ती है और विपक्षी दलों के साथ उसके संबंध किस रूप में विकसित होते हैं।
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