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देहरादून में कारोबारी का फर्जी पुलिस बनकर अपहरण, MCOCA और NDPS में फंसाने की धमकी देकर मांगी 25 लाख की रंगदारी

देहरादून में कारोबारी का फर्जी पुलिस बनकर अपहरण, MCOCA और NDPS में फंसाने की धमकी देकर मांगी 25 लाख की रंगदारी

देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में अपराध का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों के बाद अब फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर कारोबारी के कथित अपहरण और रंगदारी मांगने की घटना ने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का पुलिस इंस्पेक्टर बताने वाले व्यक्ति ने अपने साथियों के साथ मिलकर एक कारोबारी को जबरन कार में बैठाया, पिस्टल दिखाकर धमकाया और 25 लाख रुपये की मांग की।

मामले की शिकायत मिलने के बाद पटेल नगर थाना पुलिस ने एक महिला सहित चार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

कारोबारी के प्रतिष्ठान पर पहुंची संदिग्ध एसयूवी

पीड़ित कारोबारी सिद्धार्थ अग्रवाल, जो पेपर उत्पाद निर्माण का व्यवसाय करते हैं, ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि 25 जून को एक एसयूवी उनके प्रतिष्ठान पर आकर रुकी। कार से तीन पुरुष और एक महिला नीचे उतरे। इनमें से एक व्यक्ति ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का पुलिस इंस्पेक्टर रंजीत कांसले बताया। उसने कारोबारी से कहा कि उनके खिलाफ मुंबई में गंभीर शिकायत दर्ज है और उन्हें पूछताछ के लिए साथ चलना होगा।

मोबाइल छीनकर किसी से संपर्क नहीं करने दिया

शिकायत के अनुसार आरोपियों ने सबसे पहले सिद्धार्थ अग्रवाल का मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया, ताकि वह किसी से संपर्क न कर सकें। इसके बाद उन्हें जबरदस्ती कार में बैठाकर सहारनपुर चौक के पास स्थित एक होटल के बाहर ले जाया गया। कारोबारी का आरोप है कि पूरे समय उन्हें मानसिक दबाव में रखा गया और किसी भी व्यक्ति से संपर्क करने की अनुमति नहीं दी गई।

MCOCA और NDPS एक्ट में फंसाने की धमकी

पीड़ित ने आरोप लगाया कि होटल के बाहर कथित पुलिस अधिकारी ने पिस्टल दिखाकर उन्हें डराया और कहा कि उनके खिलाफ MCOCA (महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट) तथा NDPS एक्ट के तहत गंभीर मुकदमे दर्ज कर जेल भेज दिया जाएगा। आरोपियों ने दावा किया कि यदि मामला "सेटल" करना है तो उन्हें बड़ी रकम देनी होगी, अन्यथा उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर दी जाएगी।

25 लाख रुपये की रंगदारी की मांग

कारोबारी का कहना है कि आरोपियों ने उनसे 25 लाख रुपये की मांग की। जब उन्होंने बताया कि उनके पास इतनी रकम तत्काल उपलब्ध नहीं है और वे अपने पिता से बात करना चाहते हैं, तब आरोपी उन्हें वापस उनके कार्यालय लेकर पहुंचे। यहीं से पूरे घटनाक्रम ने नया मोड़ लिया।

पिता और लोगों के पहुंचते ही भाग निकले आरोपी

जैसे ही कारोबारी अपने कार्यालय पहुंचे, उनके पिता और आसपास के अन्य लोग भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने कथित पुलिस अधिकारी से उसका पहचान पत्र दिखाने को कहा और साथ ही स्थानीय पुलिस को बुलाने की बात कही। पुलिस का नाम सुनते ही कथित मुंबई क्राइम ब्रांच अधिकारी और उसके साथ आए अन्य लोग वहां से निकल गए। जाते-जाते उन्होंने पुलिस स्टेशन बुलाने की धमकी भी दी और मौके से फरार हो गए।

पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

घटना की शिकायत मिलने के बाद पटेल नगर कोतवाली पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पटेल नगर कोतवाली प्रभारी विनोद गुसाईं के अनुसार, पीड़ित की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और पूरे घटनाक्रम की गंभीरता से जांच की जा रही है। पुलिस घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके।पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

फर्जी पुलिस अधिकारियों के बढ़ते मामले चिंता का विषय

विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में फर्जी सरकारी अधिकारी, फर्जी पुलिसकर्मी और डिजिटल अरेस्ट के मामलों में लगातार वृद्धि हुई है। अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, क्राइम ब्रांच या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और उनसे मोटी रकम वसूलने की कोशिश करते हैं। हालांकि इस मामले में अपराधियों ने एक कदम आगे बढ़ते हुए कथित तौर पर कारोबारी को जबरन वाहन में बैठाकर बंधक बनाया और हथियार दिखाकर रंगदारी मांगने का प्रयास किया।

कारोबारियों और आम लोगों के लिए पुलिस की सलाह

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति खुद को किसी एजेंसी का अधिकारी बताकर कार्रवाई की धमकी देता है, तो सबसे पहले उसकी पहचान की पुष्टि करें। बिना सत्यापन के किसी के साथ न जाएं और न ही किसी प्रकार की रकम का भुगतान करें। यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति पुलिस या सरकारी अधिकारी बनकर दबाव बनाने की कोशिश करे तो तुरंत स्थानीय पुलिस, डायल 112 या संबंधित थाने से संपर्क करें।

जांच जारी, गिरफ्तारी का इंतजार

फिलहाल देहरादून पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध सबूतों के आधार पर जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा किया जाएगा।

यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि अपराधी अब लोगों को ठगने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में सतर्कता, पहचान का सत्यापन और समय रहते पुलिस को सूचना देना ही इस तरह के अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

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