डेढ़ साल के मासूम की हत्या मामले में दोषी को मौत की सज़ा, फैसले के बाद भावुक हुई मां - “न्याय मिला, लेकिन मेरा बेटा नहीं लौटेगा”
“न्याय तो मिल गया, लेकिन मेरा बेटा कभी वापस नहीं आएगा…”
ये शब्द उस मां के हैं, जिसने अपने डेढ़ साल के मासूम बेटे आरव को हमेशा के लिए खो दिया। अदालत का फैसला आने के बाद भी उनकी आंखों में आंसू हैं, क्योंकि कोई भी सजा उनके बच्चे को वापस नहीं ला सकती।
करीब 40 दिन पहले उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में हुई इस दर्दनाक घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इस वारदात का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। जिसने भी वह भयावह दृश्य देखा, वह आज तक उसे भूल नहीं पाया। समय बीत गया, लेकिन उस मासूम की मौत का दर्द आज भी लोगों के दिलों में ताजा है।
महज डेढ़ साल का आरव अब इस दुनिया में नहीं है। आरोप है कि 30 मई को आरोपी वीराज उर्फ जितेंद्र पाठक ने मासूम को बेरहमी से जमीन पर पटक-पटककर उसकी हत्या कर दी थी। इस घटना ने हर किसी को झकझोर दिया। मामले की सुनवाई के बाद फिरोजाबाद की जिला एवं सत्र अदालत ने आरोपी को मौत की सजा सुनाई है।
आरव की मां रति शर्मा का कहना है कि उन्हें इस बात से कुछ राहत जरूर मिली है कि जिला अदालत ने कम समय में फैसला सुनाकर यह भरोसा दिलाया कि न्याय मिल सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि हाई कोर्ट में भी इस फैसले को बरकरार रखा जाएगा और कानूनी प्रक्रिया जल्द पूरी होगी। रति शर्मा ने पुलिस, प्रशासन, सरकारी वकीलों और मामले में गवाही देने वाले सभी लोगों का भी धन्यवाद किया।
हालांकि, एक मां के लिए यह फैसला भी उसके बेटे की कमी कभी पूरी नहीं कर सकता। रति शर्मा आज भी गहरे सदमे में हैं। उनका कहना है कि जिस तरह उनका मासूम बेटा तड़प-तड़पकर इस दुनिया से चला गया, दोषी को भी उसके अपराध की कठोर सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे वह अपने बेटे के बिछड़ने का दर्द हर दिन सह रही हैं, वैसे ही आरोपी के परिवार को भी उसके अपराध का अहसास हो। उनकी मांग है कि दोषी को जल्द से जल्द फांसी दी जाए।
रति शर्मा और पूरे गांव के लोगों को उम्मीद है कि अदालत का यह फैसला आगे भी कायम रहेगा और मासूम आरव को पूरा न्याय मिलेगा। न्याय मिलने से उन्हें कुछ संतोष जरूर है, लेकिन बेटे को खोने का दर्द उनकी जिंदगी में हमेशा बना रहेगा।
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