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ब्रिटिश काल में बनी इमारत पर चल रहा नैनीताल हाईकोर्ट अब होगा शिफ्ट , जानिए अब कहां होगा हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट का ब्रिटिश काल में बनी करीबन 126 साल पुरानी इमारत से साथ छूटने वाला है ,सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी पर नैनीताल हाईकोर्ट को अब दूसरी जगत शिफ्ट किया जाएगा,राज्य स्थापना के साथ ही नैनीताल हाईकोर्ट की स्थापना हुई थी। 

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरित करने का रास्ता साफ कर दिया है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को हल्द्वानी में हाईकोर्ट की नई इमारत के निर्माण और अन्य जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए चिह्नित की गई जमीन का कब्जा हाईकोर्ट प्रशासन को सौंपने का आदेश दिया है।मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और बी. मोहन की पीठ ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश को भी रद्द कर दिया।

हाईकोर्ट ने वकीलों और वादियों के बीच इस बात पर जनमत संग्रह कराने का निर्देश दिया था कि क्या हाईकोर्ट को नैनीताल से किसी दूसरी जगह स्थानांतरित करना चाहिए या नहीं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि हाईकोर्ट को न्यायिक पक्ष में ऐसे आदेश देने का कोई अधिकार नहीं है। ऐसे मुद्दों पर न्यायिक कार्यवाही में विचार नहीं किया जाता है। 

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इसके साथ ही उत्तराखंड हाईकोर्ट को प्रशासनिक स्तर पर राज्य सरकार के साथ मिलकर नई जगह पर हाईकोर्ट के लिए बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों का समाधान करने का आदेश दिया है।पीठ ने हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

पीठ ने राज्य सरकार को छह सप्ताह में हाईकोर्ट के हल्द्वानी में जमीन का कब्जा सौंपने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि हमें बताया गया कि राज्य सरकार ने हल्द्वानी जिले में हाईकोर्ट की नई इमारत का निर्माण करने के लिए भूमि चिह्नित की है।इस छह सप्ताह में 'जैसी है, जहां है' के आधार पर सभी मंजूरियों के साथ हाईकोर्ट प्रशासन को सौंपा जाएगा।

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इससे पहले, उत्तराखंड हाईकोर्ट की ओर से पक्ष रख रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराज ने शीर्ष अदालत को बताया कि 'राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के नए परिसर के लिए हल्द्वानी में जमीन चिह्नित कर ली है।' उत्तर प्रदेश से अलग राज्य बनने के बाद उत्तराखंड हाईकोर्ट की प्रधान पीठ नैनीताल में स्थापित की गई और तब से वहीं से काम कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल अपील पर यह फैसला दिया है।

पीठ ने राज्य सरकार को छह सप्ताह में हाईकोर्ट के हल्द्वानी में जमीन का कब्ज़ा सौंपने के आदेश दिए हैं,ब्रिटिशकालीन भवन में चल रहा अभी उत्तराखंड हाईकोर्ट का करीब 126 साल पुरानी ब्रिटिशकालीन इमारत से साथ छूट जाएगा। यह वही इमारत है जहां अंग्रेजों के जमाने में सचिवालय संचालित हुआ करता था।

स्वीकृत जजों की संख्या सात से बढ़कर नौ हुई : 9 नवंबर 2000 को जब उत्तराखंड राज्य की स्थापना की गई, तो इसके साथ ही नैनीताल में अंग्रेजों के बनाए सचिवालय भवन में हाईकोर्ट का भी उद्घाटन हुआ। 2000 में सृजन के समय स्वीकृत जजों की संख्या 7 थी, जिसे 2003 में बढ़ाकर 9 कर दिया गया। न्यायमूर्ति अशोक देसाई ने हाईकोर्ट का उद्घाटन किया था। वह यहां के पहले न्यायमूर्ति थे।

जेटली ने की थी हाईकोर्ट बनाने की घोषणा : देहरादून के राजधानी बनने के बाद राज्य के लिए हाईकोर्ट की जरूरत महसूस हुई। केंद्रीय कानून मंत्री रहे अरुण जेटली ने 2000 में नैनीताल आकर हाईकोर्ट बनाने की घोषणा कर दी। तब जेटली ने बचपन से नैनीताल के प्रति लगाव का जिक्र किया था। जेटली के मित्र आईपीएस विजय भूषण का घर नैनीताल में ही था। जेटली अक्सर उनके घर आया करते थे।


" सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला है। हमारी मांग थी कि हाईकोर्ट नैनीताल जिले में कहीं भी शिफ्ट हो, लेकिन बाहर न जाए। जिसपर सुप्रीम अदालत ने मुहर लगा दी है। "— डीसीएस रावत, अध्यक्ष, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, नैनीताल।
 

 

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