दिल्ली पालम आग हादसा: साध नगर में भीषण आग, 3 बच्चों समेत 9 की मौत
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के दक्षिण-पश्चिमी इलाके पालम से बुधवार सुबह एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां साध नगर स्थित एक बहुमंजिला इमारत में भीषण आग लगने से तीन बच्चों सहित नौ लोगों की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ा दी है, जबकि कई अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आग सुबह करीब 6:40 बजे राम चौक मार्केट स्थित एक इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर लगी। बताया जा रहा है कि नीचे की मंजिल पर मौजूद एक कॉस्मेटिक दुकान में अचानक आग भड़क उठी, जो देखते ही देखते पूरी इमारत में फैल गई। शुरुआती जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है, हालांकि अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत जांच के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा।
यह इमारत व्यावसायिक और रिहायशी उपयोग दोनों के लिए इस्तेमाल की जा रही थी। ग्राउंड फ्लोर और पहली मंजिल पर दुकानें थीं, जबकि दूसरी और तीसरी मंजिल पर लोग रहते थे। घटना के समय अधिकांश लोग सो रहे थे, जिससे उन्हें आग लगने की जानकारी देर से मिली और वे समय पर बाहर नहीं निकल सके।
आग लगने के बाद इमारत में घना धुआं भर गया, जिससे लोगों का दम घुटने लगा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अंदर फंसे लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे, लेकिन धुएं और आग की वजह से उन्हें बाहर निकालना बेहद मुश्किल हो गया था। इस दौरान कुछ लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए इमारत से छलांग भी लगा दी, जिन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग को अलर्ट किया गया और मौके पर करीब 30 दमकल गाड़ियां भेजी गईं। दमकल कर्मियों ने कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया और राहत एवं बचाव कार्य चलाया। इस दौरान सात लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जिनमें तीन बच्चे भी शामिल थे।
इस हादसे का सबसे मार्मिक पहलू वह था जब परिजनों ने बच्चों को बचाने के लिए उन्हें पहली मंजिल से नीचे फेंक दिया। नीचे खड़े लोगों ने बच्चों को पकड़कर उनकी जान बचाने की कोशिश की और तुरंत अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, इस कोशिश के बावजूद तीन बच्चों सहित कुल नौ लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि दमकल विभाग की टीम को मौके पर पहुंचने में करीब 40 से 45 मिनट का समय लग गया, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। उनका कहना है कि यदि राहत दल समय पर पहुंच जाता, तो शायद कुछ और जिंदगियां बचाई जा सकती थीं। हालांकि, अधिकारियों ने इस पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
घटना के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी। वहीं, उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने भी घटना पर संवेदना व्यक्त की और कहा कि बचाव कार्यों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
दमकल विभाग और पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य चलाया और घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया। फिलहाल, आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया है और इमारत को खाली करा लिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं अक्सर फायर सेफ्टी मानकों की अनदेखी के कारण होती हैं। खासकर उन इमारतों में जहां व्यावसायिक और रिहायशी उपयोग एक साथ होता है, वहां खतरा और अधिक बढ़ जाता है। ऐसे में नियमित जांच और सुरक्षा उपायों का पालन करना बेहद जरूरी है।
यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि शहरी क्षेत्रों में आग से बचाव के लिए सख्त नियमों का पालन और जागरूकता बेहद जरूरी है। प्रशासन और नागरिकों को मिलकर इस दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके।
फिलहाल, पूरे मामले की जांच जारी है और प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि जल्द ही इस हादसे के कारणों का खुलासा किया जाएगा।
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