होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर मुंबई पहुंचा कच्चे तेल का टैंकर, पश्चिम एशिया तनाव के बीच बड़ी खबर
मुंबई: पश्चिम एशिया तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर कच्चे तेल का टैंकर सुरक्षित पहुंचा
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच एक बड़ी समुद्री खबर सामने आई है। लाइबेरियाई ध्वज वाला कच्चे तेल का टैंकर रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर सुरक्षित रूप से मुंबई बंदरगाह पहुंच गया। इस टैंकर की कमान एक भारतीय कप्तान के हाथों में थी।
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार यह टैंकर सऊदी अरब के रास तनुरा बंदरगाह से कच्चा तेल लेकर भारत के लिए रवाना हुआ था। मौजूदा तनावपूर्ण हालात में इस समुद्री मार्ग से सुरक्षित पारगमन को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुंबई पोर्ट पर पहुंचा टैंकर
मुंबई पोर्ट ट्रस्ट के अधिकारियों ने बताया कि “शेनलोंग सुएजमैक्स” नाम का यह टैंकर बुधवार को मुंबई पोर्ट पर पहुंचा। जहाज 1 मार्च को सऊदी अरब के रस तनुरा पोर्ट से रवाना हुआ था।
होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते समय जहाज को ईरानी अधिकारियों से औपचारिक अनुमति भी प्राप्त करनी पड़ी। हाल के दिनों में इस क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, जिसके चलते जहाजों को गुजरने से पहले अनुमति लेना जरूरी हो गया है।
अधिकारियों के अनुसार टैंकर ने सफलतापूर्वक इस जलडमरूमध्य को पार किया, जो फारस की खाड़ी को वैश्विक बाजारों से जोड़ने वाला सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है।
बढ़ी सुरक्षा चिंताएं
हाल के सैन्य घटनाक्रमों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही को लेकर चिंता बढ़ गई है। कई देशों ने अपने जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है।
इसी बीच ईरान ने भी इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर निगरानी और प्रतिबंध कड़े कर दिए हैं। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अब जहाजों को जलडमरूमध्य से गुजरने से पहले तेहरान से अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है।
ईरान की चेतावनी
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की नौसेना के कमांडर रियर एडमिरल अलीरेजा तंगसीरी ने हाल ही में चेतावनी दी है कि निर्देशों की अनदेखी करने वाले जहाजों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की जा सकती है।
उन्होंने दावा किया कि चेतावनी की अनदेखी करने पर एक्सप्रेस रोम और मयूरी नारी नामक जहाजों को निशाना बनाया गया था। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन क्षेत्र में चिंता और बढ़ गई है। ईरानी अधिकारियों का यह भी कहना है कि अमेरिका और इजराइल के हितों से जुड़े जहाजों को छोड़कर अन्य जहाजों को सुरक्षित पारगमन की अनुमति दी जा सकती है।
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर और वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों से जोड़ता है। आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता है, जो वैश्विक दैनिक तेल खपत का करीब 20 प्रतिशत है।
इसके अलावा वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग एक चौथाई हिस्सा भी इसी जलडमरूमध्य से गुजरता है। इतना ही नहीं, दुनिया के बड़े हिस्से का तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) व्यापार भी इसी रास्ते से संचालित होता है। ऐसे में अगर इस मार्ग में किसी भी तरह की बाधा आती है तो उसका असर तुरंत वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल की कीमतों और सप्लाई चेन पर पड़ सकता है।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर सरकार की नजर
वर्तमान स्थिति को देखते हुए भारत सरकार भी फारस की खाड़ी क्षेत्र में भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर सतर्क है। शिपिंग मंत्रालय लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। मंत्रालय के अनुसार इस क्षेत्र में इस समय 28 भारतीय ध्वज वाले जहाज संचालित हो रहे हैं। इनमें से 24 जहाजों पर 677 भारतीय नाविक होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में मौजूद हैं।
वहीं चार जहाजों पर 101 भारतीय क्रू सदस्य जलडमरूमध्य के पूर्वी हिस्से में तैनात हैं। स्थिति की निगरानी के लिए शिपिंग मंत्रालय और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग ने 28 फरवरी से 24 घंटे का कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है।
दूतावासों और एजेंसियों के साथ समन्वय
अधिकारियों के अनुसार भारतीय प्राधिकरण, शिप मैनेजमेंट कंपनियां और भर्ती एजेंसियां क्षेत्र में मौजूद भारतीय दूतावासों और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रही हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में भारतीय नाविकों और जहाजों की सुरक्षा बनी रहे। सरकार का कहना है कि भारत के समुद्री हितों और भारतीय नाविकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच इस टैंकर का सुरक्षित मुंबई पहुंचना भारत के लिए राहत की खबर माना जा रहा है। यह न केवल समुद्री सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के सुचारु संचालन के लिए भी सकारात्मक संकेत देता है।
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