केरल विधानसभा चुनाव 2026: क्या पिनाराई विजयन लगाएंगे जीत की हैट्रिक या कांग्रेस करेगी वापसी?
केरल विधानसभा चुनाव 2026: क्या पिनाराई विजयन लगाएंगे जीत की हैट्रिक या कांग्रेस करेगी वापसी?
केरल की राजनीति हमेशा से दिलचस्प रही है। यहां दशकों से सत्ता का समीकरण लगभग तय माना जाता रहा है, जहां हर चुनाव के बाद सरकार बदल जाती थी। लेकिन 2021 में यह परंपरा टूट गई जब Pinarayi Vijayan के नेतृत्व में Left Democratic Front (एलडीएफ) ने लगातार दूसरी बार सरकार बनाकर इतिहास रच दिया।
अब एक बार फिर राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है क्योंकि Election Commission of India ने केरल विधानसभा चुनाव 2026 की तारीख का ऐलान कर दिया है। राज्य की 140 सीटों के लिए 9 अप्रैल को मतदान होगा। ऐसे में सभी राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति तेज कर दी है और यह सवाल उठने लगा है कि इस बार केरल में किसकी सरकार बनेगी।
क्या पिनाराई विजयन लगा पाएंगे जीत की हैट्रिक?
केरल के मौजूदा मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan राज्य की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। 81 वर्ष की उम्र में भी वे सक्रिय राजनीति में पूरी तरह मजबूत स्थिति में हैं।
विजयन की पहचान एक ऐसे नेता के रूप में रही है जो कठिन राजनीतिक परिस्थितियों में भी मजबूत फैसले लेने से पीछे नहीं हटते। उनकी सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर, सामाजिक सुरक्षा और विकास परियोजनाओं पर काफी जोर दिया है।
उनकी नेतृत्व क्षमता का ही परिणाम था कि 2021 में एलडीएफ ने सत्ता बरकरार रखते हुए राज्य की पुरानी परंपरा को तोड़ दिया। हालांकि उनके राजनीतिक करियर पर कुछ विवादों की छाया भी रही है, जिनमें सबसे ज्यादा चर्चा SNC-Lavalin Case को लेकर हुई। विपक्ष अक्सर इस मुद्दे को चुनावी बहस में उठाता रहा है।
फिर भी विजयन को एक मजबूत प्रशासक और रणनीतिक नेता के तौर पर देखा जाता है। यही वजह है कि इस बार भी एलडीएफ को उनसे काफी उम्मीदें हैं।
कांग्रेस की उम्मीदें वी डी सतीशन पर
केरल की राजनीति में एलडीएफ के मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में United Democratic Front (यूडीएफ) को देखा जाता है, जिसका नेतृत्व कांग्रेस करती है। इस बार कांग्रेस की उम्मीदें काफी हद तक विपक्ष के नेता V. D. Satheesan पर टिकी हुई हैं।
सतीशन पिछले दो दशकों से राज्य की राजनीति में सक्रिय हैं और अपने तेजतर्रार भाषणों तथा मुद्दों पर मजबूत पकड़ के लिए जाने जाते हैं। विधानसभा में वे अक्सर पब्लिक फाइनेंस, गवर्नेंस, पर्यावरण नीति और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे विषयों पर विस्तार से अपनी बात रखते हैं।
विपक्ष के नेता बनने के बाद से सतीशन ने एलडीएफ सरकार के खिलाफ लगातार आक्रामक रुख अपनाया है। साथ ही उन्होंने कांग्रेस के संगठन को मजबूत करने और पार्टी के भीतर लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी को कम करने की कोशिश भी की है।
अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे अपनी आक्रामक विपक्षी राजनीति को एक मजबूत चुनावी अभियान में बदल सकें और यूडीएफ को सत्ता में वापसी दिला सकें।
बीजेपी की रणनीति और राजीव चंद्रशेखर की भूमिका
केरल की राजनीति में लंबे समय तक मुकाबला मुख्य रूप से एलडीएफ और यूडीएफ के बीच ही रहा है। लेकिन अब National Democratic Alliance (एनडीए) भी राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इस अभियान का चेहरा Rajeev Chandrasekhar को माना जा रहा है। वे बीजेपी के वरिष्ठ नेता होने के साथ-साथ पार्टी के प्रमुख रणनीतिकारों में भी गिने जाते हैं।
चंद्रशेखर की चुनौती सिर्फ अपने चुनाव क्षेत्र में जीत हासिल करने तक सीमित नहीं है। उनका लक्ष्य केरल में बीजेपी को एक भरोसेमंद राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित करना भी है। हाल के लोकसभा चुनावों में एनडीए के बेहतर प्रदर्शन से पार्टी का मनोबल बढ़ा है और बीजेपी नेतृत्व को उम्मीद है कि विधानसभा चुनाव में भी पार्टी पहले से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।
किसकी बनेगी सरकार?
केरल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक माहौल बेहद दिलचस्प हो चुका है। एक तरफ एलडीएफ तीसरी बार सत्ता में लौटने का इतिहास रचने की कोशिश कर रहा है, वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ सत्ता में वापसी के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है।
दूसरी ओर बीजेपी भी राज्य में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। 9 अप्रैल को होने वाला मतदान यह तय करेगा कि केरल की जनता इस बार किसे सत्ता की जिम्मेदारी सौंपती है। क्या पिनाराई विजयन जीत की हैट्रिक लगाएंगे या फिर कांग्रेस सत्ता में वापसी करेगी, इसका जवाब चुनाव परिणाम आने के बाद ही मिलेगा।
Watch Video
Watch the full video for more details on this story.











