बागेश्वर हत्या केस में दो सगे भाइयों को उम्रकैद, कोर्ट ने सुनाई सख्त सजा
बागेश्वर हत्या मामले में दो सगे भाइयों को उम्रकैद, कोर्ट का बड़ा फैसला
उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के कपकोट थाना क्षेत्र में हुए चर्चित हत्या मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। जिला जज एवं सत्र न्यायाधीश पंकज तोमर की अदालत ने हत्या के दोषी पाए गए दो सगे भाइयों—चंचल सिंह और महेश सिंह—को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों पर 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
यह मामला दिसंबर 2022 में हुई एक हिंसक घटना से जुड़ा है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था।
क्या है पूरा मामला?
मामले के अनुसार, वादी सरुली देवी, निवासी नौकुटी बमनखेत, थाना कपकोट ने पुलिस में दर्ज प्राथमिकी में बताया कि 25/26 दिसंबर 2022 की रात गांव में एक धार्मिक पूजा कार्यक्रम आयोजित किया गया था। देर रात लगभग 12:30 बजे आरोपी चंचल सिंह और महेश सिंह, जो जौहार सिंह के पुत्र हैं, कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। आरोप है कि दोनों ने अचानक वहां मौजूद लोगों पर हमला कर दिया।
चाकू से हमला, एक की मौके पर मौत
प्राथमिकी के अनुसार, हमले के दौरान महेश सिंह ने वादी के पति को पकड़ लिया, जबकि चंचल सिंह ने चाकू से उन पर वार कर दिया। जब परिवार के अन्य सदस्य बीच-बचाव के लिए आगे आए, तो आरोपियों ने उन पर भी हमला कर दिया। इस दौरान वादी के जेठ शंकर सिंह पर भी चाकू से हमला किया गया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, वादी का पति, स्वयं सरुली देवी और उनकी जेठानी इस हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए।
पुरानी रंजिश बनी हत्या की वजह
जांच में सामने आया कि इस घटना के पीछे पुरानी रंजिश मुख्य कारण थी। दोनों पक्षों के बीच पहले से विवाद चला आ रहा था, जो इस हिंसक रूप में सामने आया।
पुलिस जांच और चार्जशीट
घटना के बाद थाना कपकोट पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचक प्रताप सिंह नगरकोटी ने मामले की गहन जांच करते हुए सभी आवश्यक साक्ष्य जुटाए और आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। जांच के दौरान गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य सबूतों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मजबूत केस तैयार किया गया।
अदालत ने सुनाई ये सजा
सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए विभिन्न धाराओं के तहत सजा सुनाई:
धारा 302/34 (हत्या): आजीवन कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माना
धारा 307/34 (हत्या का प्रयास): 10 वर्ष का कठोर कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माना
धारा 323/34 (मारपीट): 1 वर्ष का साधारण कारावास और 1000-1000 रुपये जुर्माना
धारा 506/34 (धमकी देना): 1 वर्ष का साधारण कारावास और 1000-1000 रुपये जुर्माना
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दोषी अर्थदंड अदा नहीं करते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन पक्ष की मजबूत पैरवी
इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) गोविंद बल्लम उपाध्याय और सहायक अधिवक्ता चंचल सिंह पपोला ने प्रभावी पैरवी की। अदालत में कुल 20 गवाहों के बयान कराए गए, जिनके आधार पर अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहराया। गवाहों के बयान और साक्ष्यों ने केस को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
न्यायालय के फैसले से मिला न्याय
इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद पूरी हुई है। लंबे समय से चल रहे इस मामले में अदालत का यह निर्णय कानून व्यवस्था और न्याय प्रणाली पर लोगों के विश्वास को मजबूत करता है।
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