भारत विरोधी टिप्पणियों पर लॉरा लूमर ने मांगी माफी, लेकिन H-1B वीजा विरोध पर कायम
भारत विरोधी टिप्पणियों पर लॉरा लूमर ने मांगी माफी, H-1B वीजा विरोध पर कायम रहीं
अमेरिका की राजनीतिक कार्यकर्ता और डोनाल्ड ट्रंप की समर्थक लॉरा लूमर ने भारत और भारतीयों को लेकर की गई अपनी विवादित टिप्पणियों पर माफी मांग ली है। सोशल मीडिया पर उनके कई पुराने पोस्ट सामने आने के बाद भारत में काफी नाराजगी देखने को मिली थी। हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्वीकार किया कि उनकी कुछ टिप्पणियां गलत थीं और उन्हें ऐसा नहीं कहना चाहिए था।
भारत आने की घोषणा के बाद बढ़ा विवाद
विवाद उस समय बढ़ गया जब लॉरा लूमर ने एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए भारत आने की घोषणा की। इसके बाद सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने उनके पुराने पोस्ट शेयर करते हुए नाराजगी जाहिर की। इन पोस्ट में भारत और भारतीयों के खिलाफ आपत्तिजनक और नस्लभेदी टिप्पणियां बताई जा रही थीं। कई लोगों ने सवाल उठाया कि ऐसे बयान देने वाली व्यक्ति को भारत में कार्यक्रम में क्यों बुलाया जा रहा है।
कार्यक्रम में पूछा गया सवाल
एक कार्यक्रम के दौरान जब उनसे इन विवादित टिप्पणियों को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि उनकी कई टिप्पणियां गलत थीं और उन्हें ऐसा नहीं कहना चाहिए था। लूमर ने माना कि उन बयानों से लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं और इसके लिए उन्होंने खेद जताया।
H-1B वीजा पर माफी से इनकार
हालांकि H‑1B वीजा को लेकर की गई अपनी टिप्पणियों पर लॉरा लूमर ने माफी मांगने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “मैं H-1B वीजा के विरोध के लिए माफी नहीं मांगूंगी क्योंकि अमेरिका के हितों के लिए खड़े होना मेरा काम है।” लूमर के अनुसार अमेरिका के अप्रवासन और श्रम कानूनों का कई बार गलत फायदा उठाया गया है और वह अमेरिकी कामगारों के हितों के लिए आवाज उठाती रहेंगी।
भारत और हिंदुओं के प्रति नफरत से किया इनकार
लूमर ने यह भी कहा कि उनके दिल में भारत या हिंदू समुदाय के प्रति कोई नफरत नहीं है। उन्होंने कहा कि वह खुद हिंदुओं के अधिकारों की समर्थक रही हैं और दुनिया भर में हिंदुओं के खिलाफ होने वाले अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाती रही हैं। उनके अनुसार उनकी टिप्पणियां उनके देश और वहां के लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए की गई थीं।
सोशल मीडिया पर जारी बहस
लॉरा लूमर के बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस जारी है। कुछ लोग उनके माफी मांगने के कदम को सकारात्मक बता रहे हैं, जबकि कई यूजर्स का कहना है कि उनके पुराने बयान बेहद आपत्तिजनक थे और उन्हें पूरी तरह से स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए था।
भारत और अमेरिका के बीच मजबूत संबंधों को देखते हुए ऐसे बयानों पर अक्सर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं।
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