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Axiom-4 Mission : इतिहास रच धरती पर लौटे शुभांशु शुक्ला, पीएम मोदी ने दी बधाई!

Axiom-4 Mission : भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम ने मंगलवार को एक और मील का पत्थर स्थापित किया जब भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से पृथ्वी पर सफलतापूर्वक वापसी की।

यह ऐतिहासिक उपलब्धि उन्हें ISS का दौरा करने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बनाती है। स्पेसएक्स का ड्रैगन अंतरिक्ष यान "ग्रेस", जिसमें ग्रुप कैप्टन शुक्ला और तीन अन्य अंतरिक्ष यात्री सवार थे, कैलिफ़ोर्निया के तट से दूर प्रशांत महासागर में सफलतापूर्वक उतरा।

Axiom-4 Mission : ऐतिहासिक वापसी

शुभांशु शुक्ला और उनकी टीम की पृथ्वी पर वापसी की प्रक्रिया बेहद सटीक और सफल रही। सोमवार को भारतीय समयानुसार शाम 4:45 बजे ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट 'ग्रेस' ने ISS से अनडॉकिंग की प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद 22.5 घंटे की यात्रा के बाद, मंगलवार को दोपहर 3:01 बजे (भारतीय समयानुसार), यह अंतरिक्ष यान कैलिफोर्निया के सैन डिएगो तट पर प्रशांत महासागर में स्प्लैशडाउन के साथ पृथ्वी पर लौट आया।

इस पूरी प्रक्रिया को नासा, स्पेसएक्स और एक्सिओम स्पेस ने लाइव प्रसारित किया, जिसे दुनिया भर के लाखों लोगों ने देखा। यह वापसी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए भी एक महत्वपूर्ण क्षण था, क्योंकि यह भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन गगनयान की दिशा में एक बड़ा कदम है।

Axiom-4 Mission : लखनऊ में जश्न का माहौल

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के परिजनों, विशेषकर उनकी मां आशा शुक्ला, के लिए यह पल बेहद भावनात्मक और गर्व से भरा था। लखनऊ स्थित उनके आवास पर शुभांशु की सुरक्षित वापसी को लेकर उत्साह का माहौल देखा गया।

आशा शुक्ला ने अपने बेटे के धरती पर लौटने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "मेरा बेटा सुरक्षित लौट आया है, मैं ईश्वर और आप सभी का शुक्रिया अदा करती हूं जिन्होंने इस घटना को कवर किया। मैं भावुक हो गई थी, आखिरकार मेरा बेटा कई दिनों बाद लौट आया है।" उनकी इन बातों से एक मां का अपने बेटे की वापसी पर सुकून और खुशी साफ झलक रही थी, जिसने एक जटिल और जोखिम भरी यात्रा पूरी की थी।

Axiom-4 Mission : प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी। पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, "मैं ग्रुप कैप्टन शुभ्रांशु शुक्ला का उनके ऐतिहासिक अंतरिक्ष मिशन से पृथ्वी पर लौटने पर पूरे देश के साथ स्वागत करता हूं।

अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का दौरा करने वाले भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री के रूप में उन्होंने अपने समर्पण, साहस और अग्रणी भावना से करोड़ों सपनों को प्रेरित किया है।"

पीएम ने यह भी रेखांकित किया कि यह उपलब्धि भारत के अपने मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन - गगनयान की दिशा में एक और मील का पत्थर है। यह टिप्पणी भारत की बढ़ती अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं और भविष्य के मानवयुक्त मिशनों के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

Axiom-4 Mission : अंतरिक्ष में बिताए 18 दिन

शुभांशु शुक्ला अपने चार अंतरिक्ष यात्रियों के दल के साथ 25 जून को फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से फाल्कन 9 रॉकेट के जरिए ISS के लिए रवाना हुए थे। पृथ्वी से 28 घंटे की यात्रा कर वे अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचे, जहां उन्होंने 18 दिन का बहुमूल्य समय बिताया।

इस दौरान, ग्रुप कैप्टन शुक्ला ने 60 से अधिक प्रयोगों में सक्रिय रूप से भाग लिया, जिनमें से सात भारतीय प्रयोग भी शामिल थे। इन प्रयोगों का उद्देश्य विभिन्न वैज्ञानिक क्षेत्रों में अनुसंधान को आगे बढ़ाना था, जिसमें अंतरिक्ष में पौधों के विकास का अध्ययन भी शामिल था।

विशेष रूप से, शुभांशु ने अंतरिक्ष में मेथी और मूंग के बीजों को सफलतापूर्वक उगाया है, जो भविष्य के दीर्घकालिक अंतरिक्ष मिशनों के लिए खाद्य उत्पादन की संभावनाओं को समझने में महत्वपूर्ण योगदान देगा। यह प्रयोग अंतरिक्ष में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण कदम है।

Axiom-4 Mission : गगनयान मिशन की तैयारी

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की यह सफल यात्रा भारत के गगनयान मिशन के लिए एक महत्वपूर्ण पूर्वाभ्यास और प्रेरणा स्रोत साबित होगी। गगनयान मिशन के तहत भारत अपने स्वयं के अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने की योजना बना रहा है, जिससे भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जिनके पास मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान की क्षमता है।

शुभांशु शुक्ला का अनुभव और उनसे प्राप्त डेटा गगनयान मिशन की योजना और प्रशिक्षण में अमूल्य साबित होंगे। उनकी उपलब्धि ने युवा पीढ़ी को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया है, जिससे भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति को और बढ़ावा मिलेगा।

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की वापसी ने निश्चित रूप से भारतीय अंतरिक्ष इतिहास में एक स्वर्णिम पृष्ठ जोड़ दिया है। यह एक ऐसी उपलब्धि है जो न केवल उनके व्यक्तिगत साहस और समर्पण को दर्शाती है, बल्कि भारत की बढ़ती वैज्ञानिक शक्ति और अंतरिक्ष अन्वेषण में उसकी महत्वाकांक्षाओं को भी रेखांकित करती है।

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