सुप्रीम कोर्ट की राहुल गांधी को कड़ी फटकार; कहा- न्यायपालिका को कोई डरा नहीं सकता, ऐसे प्रयास कमजोर
सुप्रीम कोर्ट ने विपक्षी नेताओं के अदालती परिसर में प्रदर्शन को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। देश की शीर्ष अदालत ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्ट किया है कि न्यायपालिका किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव में आने वाली नहीं है।
मामले की सुनवाई करते हुए देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, "न्यायपालिका को कोई डरा या दबा नहीं सकता। इस तरह के प्रयास बेहद कमजोर हैं, जिन पर कोई ध्यान नहीं देता।"
पढ़ें यह खबर : यूपी में तीन महीने के भीतर होंगे पंचायत चुनाव, इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा आदेश
कोर्ट परिसर में मार्च पर सुप्रीम कोर्ट सख्त :
यह पूरा मामला 12 अक्टूबर को राहुल गांधी के नेतृत्व में 'इंडी' (INDIA) गठबंधन के नेताओं द्वारा सुप्रीम कोर्ट परिसर की तरफ निकाले गए विरोध मार्च और वहां हुए हंगामे से जुड़ा है। वकीलों द्वारा कोर्ट परिसर की सुरक्षा और मर्यादा पर चिंता जताए जाने के बाद पीठ ने स्वतः संज्ञान लेते हुए यह सख्त टिप्पणियां कीं:
'हम हाथीदांत के मीनार में नहीं बैठे हैं':
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत देश में और कोर्ट के बाहर चल रही हर राजनीतिक गतिविधि और बयानों से पूरी तरह वाकिफ है।
न्यायपालिका को कोई डरा नहीं सकता:
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि दबाव बनाने के ऐसे हथकंडे न्यायपालिका पर बेअसर हैं और कोई भी संस्था को प्रभावित नहीं कर सकता।
यह एक कमजोर प्रयास था:
शीर्ष अदालत ने इस मार्च को न्यायपालिका पर दबाव बनाने की एक बेहद कमजोर और निष्प्रभावी कोशिश करार दिया।
CCTV फुटेज सुरक्षित रखने के आदेश:
शीर्ष अदालत ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए कानून प्रवर्तन एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे 12 अक्टूबर को कोर्ट परिसर और उसके आसपास की तमाम सीसीटीवी (CCTV) और डिजिटल फुटेज को पूरी तरह सुरक्षित रखें।
पढ़ें यह खबर : नीला ड्रम केस : मेरठ कोर्ट का बड़ा फैसला मुस्कान और साहिल को सुनाई गई मौत की सजा
राहुल गांधी, अखिलेश और खड़गे को नोटिस :
सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट परिसर में भीड़ जुटाने और अव्यवस्था फैलाने के आचरण को लेकर राहुल गांधी, अखिलेश यादव, मल्लिकार्जुन खड़गे और महुआ मोइत्रा को औपचारिक नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने अगली सुनवाई पर इन नेताओं से उनके इस आचरण को लेकर स्पष्टीकरण (Explanation) मांगा है।
चुनाव आयोग से भी मांगा जवाब :
एक तरफ जहाँ कोर्ट ने नेताओं को उनके आचरण पर घेरा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष द्वारा वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर दायर मुख्य याचिका पर भी संज्ञान लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले मेंचुनाव आयोग (ECI) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत दोनों पक्षों के जवाब देखने के बाद आगे का फैसला सुनाएगी।









