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24 नवंबर से गोमती तट पर लगेगा कतकी मेला, टेंडर राशि में 66% की बढ़ोतरी

लखनऊ में ऐतिहासिक कतकी मेले का आयोजन इस बार 24 नवंबर 2026 से 7 जनवरी 2027 तक किया जाएगा। गोमती नदी के तट पर स्थित झूलेलाल वाटिका में लगने वाला यह मेला 45 दिनों तक चलेगा। इस बार मेले के ठेके की राशि में बड़ा इजाफा हुआ है। नगर निगम ने वर्ष 2026-27 के लिए 4.61 करोड़ रुपये की बोली को मंजूरी दी है, जबकि पिछले वर्ष मेले का टेंडर 2.77 करोड़ रुपये में हुआ था।
 

कतकी मेले के टेंडर में 1.84 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी

नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, कतकी मेले के टेंडर की राशि में पिछले साल के मुकाबले करीब 1.84 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है। यह बढ़ोतरी लगभग 66.43 प्रतिशत है। इस बार मेले के आयोजन का ठेका मेसर्स खुशी ट्रेडर्स की वित्तीय बोली को मंजूरी मिलने के बाद दिया गया है।

निविदा समिति के सदस्यों की संस्तुति के आधार पर नगर आयुक्त गौरव कुमार ने बोली को स्वीकृति प्रदान की। टेंडर की राशि बढ़ने के बाद मेले में लगने वाली दुकानों, झूलों और अन्य मनोरंजन गतिविधियों की लागत को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

ठेका लेने वाली फर्म को 24 घंटे में जमा करने होंगे 50% रुपये

नगर निगम ने टेंडर स्वीकृत होने के बाद संबंधित फर्म को निर्धारित नियमों के तहत भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। इसके अनुसार, स्वीकृत धनराशि का 50 प्रतिशत हिस्सा 24 घंटे के भीतर नगर निगम के खाते में जमा करना होगा।

टेंडर राशि में हुई इस बड़ी बढ़ोतरी का असर मेले में आने वाले लोगों के खर्च पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय स्तर पर चिंता है कि यदि आयोजन की लागत का बोझ दुकानों, पार्किंग और झूलों के शुल्क में शामिल किया गया, तो आम लोगों को पहले से अधिक पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। हालांकि, इस बार अलग-अलग सेवाओं के शुल्क कितने होंगे, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

 

  • मेला स्थल: झूलेलाल वाटिका, गोमती तट, लखनऊ
  • आयोजन की शुरुआत: 24 नवंबर 2026
  • आयोजन का अंतिम दिन: 7 जनवरी 2027
  • वर्तमान टेंडर राशि: 4.61 करोड़ रुपये
  • पिछले वर्ष की टेंडर राशि: 2.77 करोड़ रुपये
  • टेंडर राशि में वृद्धि: 66.43 प्रतिशत
  • ठेका प्राप्त करने वाली फर्म: मेसर्स खुशी ट्रेडर्स

लखनऊ की सांस्कृतिक पहचान है कतकी मेला

कतकी मेले को बुड़क्की का मेला और गंगा स्नान मेला भी कहा जाता है। यह लखनऊ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मेले की परंपरा अवध के नवाबी दौर से जुड़ी हुई है।

यह मेला हिंदू-मुस्लिम सामाजिक सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल के रूप में भी जाना जाता है। हर साल बड़ी संख्या में लोग मेले में पहुंचते हैं और धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ खरीदारी, मनोरंजन तथा पारंपरिक आयोजनों का आनंद लेते हैं।

पहले डालीगंज पुल के पास लगता था मेला

परंपरागत रूप से कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गोमती नदी में स्नान के साथ कतकी मेले की शुरुआत होती रही है। पहले इसका आयोजन डालीगंज पुल और सूरज कुंड के आसपास किया जाता था। समय के साथ आयोजन स्थल में बदलाव हुआ और अब यह मेला गोमती तट स्थित झूलेलाल वाटिका में आयोजित किया जाता है।

इस बार 24 नवंबर से शुरू होने वाले मेले में भी लोगों को विभिन्न दुकानों, झूलों और मनोरंजन गतिविधियों की उम्मीद है। हालांकि, मेले में प्रवेश, पार्किंग और अन्य सुविधाओं की दरों को लेकर विस्तृत जानकारी का इंतजार है।

24 नवंबर से 7 जनवरी तक चलेगा आयोजन

लखनऊ नगर निगम की ओर से स्वीकृत टेंडर के मुताबिक, कतकी मेला 24 नवंबर 2026 से 7 जनवरी 2027 तक आयोजित किया जाएगा। 45 दिवसीय इस आयोजन में शहर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है।

अब देखने वाली बात होगी कि टेंडर राशि में 66.43 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बावजूद मेले में आने वाले लोगों को सुविधाएं किस स्तर पर मिलती हैं और झूलों, पार्किंग तथा अन्य गतिविधियों के शुल्क किस प्रकार निर्धारित किए जाते हैं।