10 नवंबर को मनाई जाएगी गोवर्धन पूजा, 11 नवंबर को भाई दूज; जानें दोनों पर्वों का महत्व
दीपावली के बाद देशभर में गोवर्धन पूजा और भाई दूज की तैयारियां शुरू होने जा रही हैं। हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाले ये दोनों पर्व श्रद्धा, आस्था और पारिवारिक रिश्तों का प्रतीक हैं। इस बार गोवर्धन पूजा 10 नवंबर 2026, मंगलवार को मनाई जाएगी, जबकि भाई दूज का त्योहार 11 नवंबर, बुधवार को मनाया जाएगा।
खास बात यह है कि इस बार दीपावली और गोवर्धन पूजा के बीच एक दिन का अंतर रहेगा। दीपावली 8 नवंबर को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर को दोपहर से शुरू होकर 10 नवंबर को दोपहर तक रहेगी। इसी वजह से सूर्योदय के समय प्रतिपदा तिथि होने के आधार पर 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा मनाई जाएगी।
गोवर्धन पूजा का क्या है महत्व?
गोवर्धन पूजा को अन्नकूट पर्व के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण, गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को देवराज इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया था। इसी घटना की स्मृति में हर साल कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा की जाती है।
इस दिन घरों और मंदिरों में गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाई जाती है। भगवान श्रीकृष्ण को विभिन्न प्रकार के पकवानों का भोग लगाया जाता है। कई मंदिरों में अन्नकूट और छप्पन भोग का विशेष आयोजन भी किया जाता है।
11 नवंबर को मनाई जाएगी भाई दूज
गोवर्धन पूजा के अगले दिन यानी 11 नवंबर को भाई दूज का त्योहार मनाया जाएगा। यह पर्व भाई-बहन के प्रेम और अटूट रिश्ते का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर पहुंचे थे। यमुना ने उनका तिलक कर स्वागत किया और भोजन कराया। तभी से भाई दूज मनाने की परंपरा चली आ रही है।
इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। वहीं भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं और उनके प्रति स्नेह एवं सुरक्षा का संकल्प दोहराते हैं।
दीपावली के बाद त्योहारों की रौनक रहेगी बरकरार
दीपावली के बाद गोवर्धन पूजा और भाई दूज के साथ उत्सव का माहौल बना रहेगा। जहां गोवर्धन पूजा प्रकृति, गौ-संरक्षण और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति आस्था का संदेश देती है, वहीं भाई दूज भाई-बहन के रिश्ते की मिठास और पारिवारिक एकता को दर्शाता है।
दोनों पर्वों को लेकर मंदिरों और घरों में तैयारियां शुरू होने की उम्मीद है।









